भक्ति/ आस्थामंदसौर जिलासीतामऊ
सीतामऊ में एक ऐसा मंदिर जहां सुनहरी मेंढक आता और धनतेरस बाद गायब हो जाता, भक्तों ने किया पाठ और दर्शन

सीतामऊ में एक ऐसा मंदिर जहां सुनहरी मेंढक आता और धनतेरस बाद गायब हो जाता, भक्तों ने किया पाठ और दर्शन
सीतामऊ। धर्म आध्यात्म कि नगरी छोटी काशी में एक ऐसा ही वाक्या देखने को मिला जिसे लोग देख कर अपने अपने स्तर से इसको लेकर चर्चाएं कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं सीतामऊ नगर के सबसे प्राचीन सिद्ध स्थल उसके बारे में बताया जाता है कि किसी सिद्ध पुरुष जती (योग तपस्वी) द्वारा स्थापित मंदिर जो कि नगर में पांच स्थानों में एक है यह पोरवाल मांगलिक भवन से थोड़ी दूर काशी नगरी के पास स्थित नांदिया बावड़ी महादेव मंदिर है जहां पर भगवान विष्णु माता लक्ष्मी, राम जानकी और शिव पार्वती अपने परिवार के साथ विराजमान हैं वहीं मंदिर के पूर्व में पश्चिम मुखी हनुमान जी विराजमान हैं। यहां पर दिन भर दर्शनार्थीयों का आवागमन लगा रहता है। यहां पर आज मंगलवार के दिन महंत जितेंद्र दास जी महाराज के सानिध्य में ब्रहामण समाज अध्यक्ष नवीन विश्वास द्विवेदी पोरवाल समाज अध्यक्ष कैलाश घाटिया काका, भाजपा नेता राजेश गिरोठिया लक्ष्मीनारायण मांदलिया संजय घाटिया ने भगवान के दर्शन कर सर्वे भवन्तु सुखिन कि कामना कर सामुहिक हनुमान चालीसा पाठ किया।इस अवसर पर पं संजय शर्मा ने बताया कि मंदिर में दिपावली से पहले सुनहरी मेंढक आता है और धनतेरस के बाद चला जाता सभी ने जाकर देखा तो बाबा भोलेनाथ महादेव के पास लगे त्रिशूल के ऊपर एक सुनहरी रंग का मेंढक बैठा ऐसा लग रहा कि भोलेनाथ कि भक्ति करता दिखाई दे रहा है। इस अवसर पर लाला सेन सहित भक्त जन उपस्थित थे।
महंत जितेंद्र दास महाराज ने कहा कि मनुष्य ही नहीं जीव जंतु भी अपने अपने स्तर पर भगवान कि तप साधना करते हैं। आज भोलेनाथ के साथ मेंढक जो कि सुनहरे रंग का ऐसा लग रहा कि साधना कर रहा है।महंत जी ने कहा कि जीव जंतु और तरु तंतु ही पर्यावरण है पर्यावरण है तो हम हैं पर्यावरण नहीं तो कुछ भी नहीं है ऐसे ही सनातन समय से ही हमारे शास्त्रों में सभी जीवों को सम्मान दिया गया है कछुए और मेंढक सुख-शांति, समृद्धि और भविष्य में धन-संपत्ति के योग या मां लक्ष्मी के आगमन का शुभ संकेत माना जाता है।कछुए को भगवान कुर्म के रुप में और अच्छी बरसात सुख समृद्धि के लिए मेंढक कि पूजा कि जाती है।



