रावण महाज्ञानी ऋषि पुत्र था परन्तु उसमें राक्षसिय गुण थे इसलिए रावण मारा गया- श्री सोनी

सीतामऊ में विजयादशमी पर संघ ने मनाया स्थापना दिवस माधव बस्ती का निकला पथ संचलन

सीतामऊ।आश्विन शुक्ल दशमी के दिन देवी दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने रावण का वध किया था।इसको विजयादशमी कहते हैं और दशहरा पर्व मनाते हैं । आज के दिन पांडवों ने अज्ञात वास समाप्त होने पर शम्मी वृक्ष में शस्त्र छिपाये उसे निकाल कर शम्मी पेड़ शस्त्रों कि पूजा की थी इस दिन यश, विजय और समृद्धि की कामना के लिए शमी के पेड़ और अपराजिता देवी की पूजा कि जाती है। रावण महाज्ञानी ऋषि पुत्र था परन्तु उसमें राक्षसिय गुण थे। इसलिए रावण मारा गया। उक्त उद्बोधन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सीतामऊ के माधव बस्ती के मोडी़माता जी मंदिर परिसर में आयोजित पथ संचलन में मुख्य वक्ता संघ के पर्यावरण गतिविधि जिला सह संयोजक गौरव सोनी ने व्यक्त किए।श्री सोनी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 100 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। विजयादशमी के शुभ अवसर पर आज ही के दिन संघ कि स्थापना हुई थी। संघ कि जब शुरुआत हुई तब मुट्ठी भर लोग थे पर आज संघ विश्व स्तर पर है।
डॉ साहब बचपन से ही देश भक्त थे जब बाल अवस्था में स्कूल में पढ़़ते थे, तब महारानी विक्टोरिया के राज्यारोहण (डायमंड जुबली) पर स्कूलों में मिठाई बांटी गई उन्होंने वह मिठाई कचरे में फेंक दी थी।जब उनसे पूछा गया कि मिठाई क्यों फेंकी तो उन्होंने कहा कि मेरा देश गुलाम है तो मैं मिठाई कैसे खा सकता हूं। उन्होंने आजादी के आंदोलन में भाग लिया। भविष्य में देश गुलाम नहीं हो इसी सोच को लेकर संघ कि स्थापना कि गई। संघ चाहता है कि हिंदू समाज संरक्षित रहें परन्तु हिंदू समाज को जातियों में बांटा जा रहा है श्री सोनी ने उदाहरण देकर कहा कि बाबर और राणा सांगा के बीच युद्ध चल रहा था रात हो गई रात्रि में बाबर शिविर के बाहर आया और देखा तो राणा सांगा के महल में आग लग रही थी उसने सेनापति से कहा तो सेनापति ने देखकर कहा कि वहां आग नहीं लग रही अलग अलग जाति के लोग अपने अपने भोजन बना रहे हैं बस उसी कमजोरी का फायदा बाबर ने उठाया था।श्री सोनी ने कहा कि सनातन काल में चार जातियां नहीं वर्ण व्यवस्था काम के आधार पर थी पर आज कई जातियां हो गई। श्री सोनी ने कहा कि धर्मांतरण के लिए लालच दिया जाता है या चमत्कार के नाम पर हमारे धर्म पर हमला किया जा रहा है। कान्वेंट स्कूलों में बच्चों को जिजस ताकतवर बता कर हमारे कोमल ह्रदय के बच्चों को सनातन धर्म से दुर किए जाने का षड्यंत्र चल रहा है। हमें अपने बच्चों को ऐसे स्कूल में नहीं भेजना चाहिए।
श्री सोनी ने कहा कि सनातन धर्म कि संस्कृति परंपरा को समाप्त करने के लिए कुछ लोग लगे हुए हैं।वे सावन में दुध चढ़ाने से,होली पर पानी से खेलने दिपावली पर आतिशबाजी पटाखे जलाने से रोकते हैं।पर जब यही कार्य 31 दिसंबर को आतिशबाजी आदि दुसरे करते हैं तो उसे अच्छा बताते हैं। यह दोहरा चरित्र समझना होगा। श्री सोनी ने कहा कि महावीर स्वामी से दिक्षा लेकर सांप ने अहिंसा का व्रत किया परिणाम हुआ कि उस पर लोग कंकड़ पत्थर फेंकने लगे वह घायल हो गया वह स्वामी जी के पास गया तो स्वाम जी ने कहा कि तुने नहीं काटने और जीव जंतु कि हिंसा नहीं करने का व्रत किया किया था पर तुने पार फुंकारना छोड़ दिया है इसलिए यह हाल हुआ। ऐसे ही हमने कर दिया हमें झगड़ना नही है पर अपनी रक्षा के लिए तैयार रहना है। संघ आज अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है आज ऐसी अनुकुलता के लिए पांच पिढिया लगा दी है। हमें समाज को संघ के पांच अभियान से जोड़ने का क्रम जारी रखना है। वे स्व बोध, सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य है। इन अभियानों के माध्यम से प्रत्येक घर को समाज देश कि रक्षा के लिए जोड़ना जुड़ना है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य वक्ता संघ के पर्यावरण गतिविधि जिला सह संयोजक गौरव सोनी , नगर कार्यवाह विजय कुमार उमठ मंचासिन एवं विभाग शारीरिक प्रमुख परशराम राठौर कि उपस्थित में भारत माता, गुरुजी, डॉ हेडगेवार जी के तस्वीर पर माल्यार्पण दिप प्रज्वलित कर एवं शस्त्र पूजन कर शुभारंभ किया। उद्बोधन के पश्चात मोड़ी माताजी मंदिर से नगर के माधव बस्ती में स्वयं सेवकों का पथ संचलन निकाला गया। जगह जगह नागरिकों ने संचलन का फुल बरसा कर स्वागत अभिनंदन किया। संचलन पुनः मंदिर प्रांगण पहुंचा जहां पर समापन किया गया।



