भोपालमध्यप्रदेश

PM सूर्य घर योजना ने दिया ज़ोर का झटका ,MP में 1.37 लाख घरों पर फिक्स्ड चार्ज का बोझ

PM सूर्य घर योजना ने दिया ज़ोर का झटका ,MP में 1.37 लाख घरों पर फिक्स्ड चार्ज का बोझ

सोलर से बिजली बेची, नेट बिल जीरो फिर भी देना पड़ा ₹800 और ₹1000 रुपया

मध्य प्रदेश में छत पर सोलर पैनल लगाकर बिजली बनाने और बची हुई बिजली ग्रिड को लौटाने वाले घरों को राहत की जगह हर महीने नया झटका लग रहा है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर लगाने वाले उपभोक्ताओं से बिजली कंपनियां हर महीने ₹800 से ₹1000 तक फिक्स्ड चार्ज वसूल रही हैं।

आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में करीब 1.37 लाख सोलर उपभोक्ता इस चार्ज की वजह से हर महीने लगभग ₹10 करोड़ का अतिरिक्त भार उठा रहे हैं। दिक्कत ये है कि कई घर ऐसे भी हैं जो जरूरत से ज्यादा बिजली बनाकर ग्रिड में भेज रहे हैं, यानी उनका नेट कंजम्पशन शून्य या नेगेटिव है, इसके बावजूद उनसे फिक्स्ड चार्ज लिया जा रहा है।

ये मामला बीते दिनों मध्य प्रदेश विधानसभा में भी गूंजा। विधायक नीना विक्रम वर्मा ने सवाल किया कि जब उपभोक्ता खुद बिजली बना रहा है और ग्रिड को दे भी रहा है, तो उससे फिक्स्ड चार्ज क्यों वसूला जाए।

सरकार की तरफ से जवाब में कहा गया कि यह कंपनियों का मनमाना फैसला नहीं है। घरेलू सोलर उपभोक्ताओं से लिया जाने वाला फिक्स्ड चार्ज मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग यानी MPERC के टैरिफ आदेश और ‘MPERC ग्रिड इंटरएक्टिव रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम्स रिलेटेड मैटर्स रेगुलेशंस संशोधन-II, 2024’ के तहत तय है।

सरकार ने साफ किया कि ग्रिड में भेजी गई ‘एक्सपोर्ट यूनिट्स’ पर कोई अलग चार्ज नहीं लगता। वित्तीय वर्ष खत्म होने पर अतिरिक्त बिजली का भुगतान या बिल में समायोजन किया जाता है। सूरज मेहता न्यूज़

लेकिन उपभोक्ताओं का तर्क वही है: अगर महीने भर में हमने ग्रिड से एक यूनिट भी नहीं ली, या उल्टा बिजली दी, तो फिर कनेक्शन बनाए रखने के नाम पर ₹800-₹1000 का फिक्स्ड चार्ज किस बात का।

इस मुद्दे पर अब देखना होगा कि नियामक आयोग इस चार्ज की समीक्षा करता है या मौजूदा नियम ऐसे ही चलते हैं।

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