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कथा श्रवण करने के भी नियम होते है जिनका हमें पालन करना चाहिए – स्वामी श्री सनिष्ठानंद जी महाराज

कथा श्रवण करने के भी नियम होते है जिनका हमें पालन करना चाहिए – स्वामी श्री सनिष्ठानंद जी महाराज

मंदसौर। श्री केशव सत्संग भवन खानपुरा में परम पूज्यपाद 1008 स्वामी श्री सनिष्ठानंद जी महाराज का दिव्य चातुर्मास अध्यात्म सत्संग का भव्य आयोजन 29 जुलाई से 26 सितंबर तक किया जा रहा है। जिसमें प्रतिदिन स्वामी जी द्वारा प्रात: 8.30 से 10बजे तक शिव महापुराण के गूढ़ रहस्यों पर आधारित आध्यात्मिक प्रवचन दिये जा रहे है।
8 अगस्त शनिवार को धर्मसभा में श्री सनिष्ठानंद जी महाराज ने बताया कि जहां भी भगवान की कथा हो रही है उसका श्रवण हमें अवश्य करना चाहिए क्योंकि हमारे शास्त्रों के अनुसार कथा श्रवण का अत्यधिक महत्व है। स्वामी जी ने बताया कि कथा श्रवण करने के लिए श्रोता के कुछ नियम भी होते है जिनका पालन हमें करना चाहिए। आपने कहा कि कथा श्रवण करने से पूर्व श्रोता को कुछ न कुछ संकल्प लेना चाहिए कि मैं कथा पूर्ण होने पर यह कार्य करूंगा संकल्प का विशेष महत्व है, ब्रम्हचर्य का पालन करना चहिए, धरती पर सोना चाहिए,पत्तल में खाना चाहिए। कथा श्रवण करने के लिए जो हमारा सामर्थ्य हो वो करना चाहिए जैसे एक समय भोजन करें शक्ति हो तो उपवास करें सिर्फ फलिहार ग्रहण करें या कथा खत्म होने के बाद भोजन करें कुछ भी किया जा सकता है, कंद मूल नहीं खाना चाहिए यह वर्जित है, गुरू ,साधु संतों की निंदा नहीं करना चाहिए, त्याग करना चाहिए तभी हमें कथा श्रवण का लाभ मिलेगा। कथा श्रवण करने के बाद सभी अपने – अपने हिसाब से लाभ प्राप्त करते है। आपने बताया कि कथा खत्म होने के बाद अपनी स्थिति अनुसार उद्यपान करना चाहिए। इसी प्रकार स्वामी जी ने कथा श्रवण करने के कुछ नियमों को उपस्थित श्रद्धालुओं को बताया।
स्वामी जी ने कहा कि इस प्रकार आज स्कंद पुराण का समापन हुआ अब 9 अगस्त रविवार शिवमहापुराण का वाचन प्रारंभ किया जायेगा जिसमें जीवन का कल्याण करने वाले शिव तत्व के बारे में विस्तार से बताया जायेगा। इस अवसर पर बडी संख्या में महिला पुरूष उपस्थित थे।

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