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संघर्ष महान बनाता है पर आजकल बच्चों का सब काम माता पिता ही कर देते – साध्वी वर्षा नागर 

संघर्ष महान बनाता है पर आजकल बच्चों का सब काम माता पिता ही कर देते – साध्वी वर्षा नागर 

लदुना। संघर्ष महान बनाता है। किताब के पन्ने कभी कोरे नहीं रहते उसमें अक्षर रहते हैं। ऐसे ही भगवान को भाव पूर्वक चढाया गया नैवेद्य भोग होता है और उसके बाद प्रसाद हो जाता है।निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर वर्षा नागर ने लदुना में आयोजित शिवमहापुराण कथा के छठवें दिन ज्ञानामृत पान कराते हुए कही

उन्होंने कहा कि बच्चों में सुविधा देने से उनकी शारीरिक रूप से कमजोर हुए हैं। पहले यहां बैठें कई वरिष्ठ जन बड़े बुजुर्ग है जिन्होंने बिना बिजली बिना बस्ते के यहां तक किताबें भी मिलती नहीं मिलतीं थी और पढ़ाई में अच्छे अंक लाए पढ़ाई भी करते और घर के काम में हाथ भी बंटाते थे।पर आज माता पिता उनका सब काम कर देते हैं थोड़ा भी उनको संघर्ष नहीं करने देते।

शंकर भगवान और भगवान कार्तिकेय कि कथा प्रसंग विवाह के पहली बार वो काशी आए। माता पार्वती के गोद में

उनका घर का आंगन सुना सुना रहता जिनका घर बेटीयों के बिना रहता है। ऐसे ही माता पार्वती अपने मन में गंगा किनारे बैठ कर सोच रही थी तो गंगा से एक सुंदर कन्या प्रगट होकर माता पार्वती के पास पहुंचीं और बोली मां आ गई। मा पार्वती भगवती अशोक के नीचे बैठी तो बेटी का नाम अशोक सुंदरी बनी और मां बेटी दोनों बातें में लिन होकर नृत्य करने लगी जिसको हम आज गरबा कहते गरबा का नृत्य तब से प्रारंभ हुआ।गरबा नृत्य फुल्लहड के लिए नहीं तेज प्रकाश है।भगती के खुशी के आशु से बेल के पेड़ कि उत्पत्ति हुई है।

श्रद्धा भक्ति और विश्वास बिल पत्र के तीन पत्ते है। माता ने बेल पत्र को ज्योतिर्लिंग पर चढ़ाया तो भगवान शिव को शितलता मिली।

शिव का ज्योतिर्लिंग वो प्रकाश पूंज है जिसमें सतरंग निकलती है और हमारे तन मन को स्वस्थ रखने के लिए शात भाव से ग्रहण करते हैं।

राजा जनक ने कहा कि बेटा एक कुल को तारता है पर बेटी दो कुल को तारती है मै आज खुश हूं कि मेरे घर सीता ने जन्म लिया।

ऋषिकेश के कथा में पधार कर 4500 रु कि पंजीयन शुल्क के साथ भोजन आवास व्यवस्था रहेगी।04 सितंबर कृष्ण जन्माष्टमी से 10 सितंबर 2026 तक आयोजित होगी।

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