
भीषण गर्मी में यात्री बेहाल: 10 साल से बदहाल पड़ा गांधी चौक बस स्टैंड, गंदगी-अतिक्रमण के बीच इंतजार को मजबूर लोग
किशनगढ़ ताल
ठा शंभू सिंह तंवर
नगर के सबसे व्यस्त गांधी चौक बस स्टैंड की बदहाल स्थिति अब आमजन के लिए बड़ी मुसीबत बन चुकी है। करीब 10 वर्ष पहले तोड़े गए यात्री प्रतीक्षालय के बाद आज तक यहां नया बस स्टैंड या व्यवस्थित प्रतीक्षालय नहीं बन पाया। प्रतिदिन 50 से अधिक बसों की आवाजाही वाले इस महत्वपूर्ण स्थान पर यात्री भीषण गर्मी, अव्यवस्था और असुरक्षा के बीच बसों का इंतजार करने को मजबूर हैं।
तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है, लेकिन बस स्टैंड पर यात्रियों के लिए ना पर्याप्त छाया है, ना बैठने की समुचित व्यवस्था और ना ही ठंडे पानी की सुविधा। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे दुकानों के छज्जों व पेड़ों की छांव में खड़े होकर घंटों बसों का इंतजार कर रहे हैं। कई यात्री धूप और उमस के कारण तबीयत बिगड़ने की शिकायत भी कर चुके हैं।
10 साल बाद भी नहीं बनी स्थायी व्यवस्था
जानकारी के अनुसार लगभग एक दशक पूर्व तत्कालीन कलेक्टर बी. चंद्रशेखर ने गांधी चौक स्थित पुराने यात्री प्रतीक्षालय और गांधी प्रतिमा के नीचे बनी दुकानों को नियम विरुद्ध मानते हुए हटाने के निर्देश दिए थे। उस समय लोगों को उम्मीद थी कि यहां आधुनिक और सुविधायुक्त बस स्टैंड का निर्माण होगा, लेकिन कलेक्टर के स्थानांतरण के बाद पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
नगर परिषद द्वारा पुराना यात्री प्रतीक्षालय तो तोड़ दिया गया, लेकिन उसके बाद वहां कोई स्थायी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। आज भी वह स्थान वैसे ही उजाड़ पड़ा हुआ है। जहां यात्रियों को सुविधा मिलनी थी, वहां अब गंदगी फैली हुई है और कई स्थानों पर लोगों ने दोबारा कब्जा कर अस्थायी गुमटियां एवं ढांचे खड़े कर दिए हैं। लगातार बढ़ते अतिक्रमण के कारण यात्रियों के बैठने तक की जगह नहीं बची है।
त्रिबल इंजन सरकार पर भी उठने लगे सवाल
इधर स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों में इस मुद्दे को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। जनता का कहना है कि नगर में पार्षद से लेकर नगर परिषद अध्यक्ष, विधायक और सांसद तक भारतीय जनता पार्टी से जुड़े होने के बावजूद भी आमजन को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
लोगों का कहना है कि “डबल इंजन सरकार” होने के बावजूद भी पिछले 10 वर्षों से यात्री प्रतीक्षालय का मामला केवल आश्वासनों में उलझा हुआ है। जनता सवाल उठा रही है कि आखिर नगर के सबसे महत्वपूर्ण बस स्टैंड की समस्या का स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं हो पाया।
वैकल्पिक शेड भी यात्रियों के काम नहीं आ रहा
नगर परिषद द्वारा विद्युत मंडल कार्यालय के बाहर एक छोटा वैकल्पिक यात्री प्रतीक्षालय बनाया गया था, लेकिन वह भी यात्रियों के उपयोग में नहीं आ पा रहा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकांश समय वहां शराबियों, असामाजिक तत्वों और ठेला-गाड़ी लगाकर दुकान चलाने वालों का कब्जा रहता है। ऐसे में महिला यात्रियों, छात्राओं और बुजुर्गों को वहां खड़ा होने में भी असुरक्षा महसूस होती है।
बस स्टैंड क्षेत्र में होटल संचालकों और दुकानदारों द्वारा किए गए अतिक्रमण ने भी यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी है। शाम के समय यात्रियों को सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है, जिससे दुर्घटना का खतरा लगातार बना रहता है।
पेयजल व्यवस्था भी केवल दिखावा
यात्रियों की सुविधा के लिए नगर परिषद द्वारा पानी की नांद तो रखी गई है, लेकिन उसमें नल तक नहीं लगाया गया। भीषण गर्मी में प्यासे यात्री पानी के लिए भटकते नजर आते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल औपचारिक व्यवस्था कर जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया जा रहा है।
जनता में बढ़ रहा आक्रोश
नगरवासियों का कहना है कि गांधी चौक बस स्टैंड नगर की पहचान है, लेकिन इसकी दुर्दशा प्रशासनिक संवेदनहीनता की तस्वीर पेश कर रही है। वर्षों से केवल आश्वासन मिल रहे हैं, जबकि जमीन पर कोई ठोस कार्य दिखाई नहीं दे रहा।
स्थानीय नागरिक मुकेश सोलंकी ने मांग की है कि बस स्टैंड क्षेत्र को तत्काल अतिक्रमण मुक्त कर साफ-सफाई कराई जाए तथा यहां बड़ा टीन शेड, व्यवस्थित बैठने की सुविधा, स्वच्छ पेयजल और स्थायी यात्री प्रतीक्षालय का निर्माण शीघ्र शुरू किया जाए। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो जनआंदोलन किया जाएगा।
इनका कहना है
“नगर परिषद को तुरंत यात्रियों के लिए छाया, बैठने और पेयजल की स्थायी व्यवस्था करनी चाहिए। वर्षों से जनता परेशान है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।”
— अभिषेक परमार



