मध्यप्रदेशरतलाम

समाचार मध्यप्रदेश रतलाम 07 मई 2026 गुरुवार

प्रगणक घर – घर जाकर कर रहे मकान सूचीकरण चार्ज अधिकारियों ने किया निरीक्षण

भारत सरकार, गृह मंत्रालय के जनगणना कार्य निदेशालय के आदेश के परिपालन में भारत की जनगणना 2027 अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना संबंधी कार्य 30 मई 2026 तक किया जाना है।

प्रगणकों द्वारा ऑनलाइन एप के माध्यम से मकान सूचीकरण एवं गणना का कार्य किया जा रहा है प्रगणक, पर्यवेक्षक, फील्ड ट्रेनर द्वारा घर-घर जाकर जानकारी लेकर एप पर अपडेट की जा रही है । चार्ज अधिकारियों द्वारा अपने अपने क्षेत्र में निरीक्षण कर काम की प्रगति की जानकारी प्राप्त की गई ।

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लोक सेवा केन्द्रों पर मिल रही हैं राजस्व संबंधी विभिन्न सेवाएं

अधीक्षक भू अभिलेख श्री अखिलेश मालवीय ने बताया कि लोकसेवा केन्द्र में भूमि का सीमांकन, अभिलेख दुरुस्ती, रास्ता विवाद, भूमि बंटन, नजूल भूमि स्थायी पट्टे पर देना, चालू खसरा की प्रतिलिपियों का प्रदाय, बी-1 खतौनी की प्रतिलिपियों का प्रदाय, चालू नक्शा की प्रतिलिपियों का प्रदाय, अविवादित बंटवारा करना, जिला स्तरीय रिकॉर्ड रूम से पारित आदेश/अंतरिम आदेश आदि की सत्य प्रतिलिपि, खसरा की प्रतिलिपि(खाते के समस्त), अविवादित नामान्तरण करना, अभिलेखागार प्रतिलिपि, राजस्व प्रकरण में आदेश की प्रतिलिपि, आरसीएमएस-धारणाधिकार, भूमि का बटवारा, वृक्ष काटने की अनुमति, गैर खाते की भूमि पर वृक्ष लगाने की अनुमति, बन्दोबस्त सम्बन्धी मामले, बन्दोबस्त अभिलेख में सुधार, नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र, तहसील स्तरीय रिकॉर्ड रूम से पारित आदेश/अंतरिम आदेश आदि की सत्यप्रतिलिपि, तहसील स्तरीय रिकॉर्ड रूम से भू-अभिलेखों/राजस्व प्रकरणों/नक्शों आदि की सत्य प्रतिलिपि, भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिका प्रतिलिपि आदि सेवाएॅ लोक सेवा केन्द्र के माध्यम से दी जाती है, उक्त के संबंध में नागरिक अपने क्षेत्र के नजदीकी लोक सेवा केन्द्र में आवेदन दर्ज करा सकते है।

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नारी शक्ति वंदन: वन धन केन्द्रों से आत्मनिर्भर बन रहीं

जनजातीय वर्ग की महिलाएं वन धन विकास केन्द्र महिलाओं को बना रहे ‘लाभार्थी’ से ‘उद्यमी’

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय एवं विशेष रूप से पीवीटीजी वर्ग की महिलाओं के समग्र सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रभावी कदम उठा रही है। वन धन विकास केन्द्र इस वर्ग की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रमुख माध्यम बनकर उभरे हैं। यहां महिलाओं का कौशल उन्न्यन किया जा रहा है, इससे उन्हें आजीविकोपार्जन के आधार मिल रहे हैं और वह आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्हें सामाजिक सम्मान भी मिल रहा है। सरकार के इन प्रयासों के ‘नारी शक्ति वंदन’ की भावना व्यवहारिक रूप से साकार हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए ये कदम जनजातीय एवं पीवीटीजी महिलाओं के जीवन में स्थायी बदलाव ला रहे हैं। वन धन विकास केन्द्रों के माध्यम से सशक्त होती महिलाएं ‘सशक्त महिला, सशक्त समाज, सशक्त भारत’ के संकल्प को वास्तविक रूप दे रही हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना है कि समाज की प्रगति महिलाओं के सशक्तिकरण के बिना संभव नहीं है। उन्होंने कहा है कि हमारी संस्कृति में नारी शक्ति का स्थान सर्वोपरि है, इसलिए राज्य सरकार उनके आर्थिक, सामाजिक और मानवीय उत्थान के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। तेंदूपत्ता संग्राहक महिलाओं के हित में लिये गये कई ऐतिहासिक निर्णय भी इसी उद्देश्य की पूर्ति करते हैं।

तेंदूपत्ता संग्राहक महिलाओं का जीवन हुआ खुशहाल

तेंदूपत्ता संग्रहण वर्षों से वनवासी और जनजातीय परिवारों की आजीविका का प्रमुख स्रोत रहा है, जो अब इनके आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत आधार बन गया है। राज्य सरकार ने तेंदूपत्ता संग्रहण दर को ₹3, हजार से बढ़ाकर ₹4, हजार प्रति मानक बोरा कर दिया है। इस निर्णय के बाद प्रदेश के तेंदूपत्ता संग्राहकों को लगभग ₹708.8 करोड़ का परिश्रमिक भुगतान किया गया, जिसमें से लगभग ₹344.5 करोड़ सीधे महिला संग्राहकों को प्राप्त हुए। इसके साथ ही ₹132.42 करोड़ के वितरित बोनस में महिलाओं का हिस्सा लगभग ₹64.36 करोड़ रहा। इससे महिलाओं की आय बढ़ रही है। परिणामस्वरूप उनका आत्मसम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा भी बढ़ी है।

आत्मनिर्भरता और नेतृत्व विकास का केन्द्र बने वन धन विकास केन्द्र

वन धन विकास केन्द्र केवल आजीविका के साधन नहीं, बल्कि जनजातीय एवं पीवीटीजी वर्ग की महिलाओं के सर्वांगीण विकास के सशक्त मंच बन चुके हैं। इन केन्द्रों के माध्यम से महिलाएं लघु वनोपज के संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन की गतिविधियों से जुड़कर स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन कर रही हैं। प्रदेश में संचालित 83 पीवीटीजी वन धन विकास केन्द्रों में 3180 महिला सदस्य सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। प्रदेश के 126 पीएमजेवीएम वन धन विकास केन्द्रों में 10,591 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। अनेक स्व-सहायता समूह पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित हो रहे हैं, जो सामूहिक नेतृत्व और वित्तीय प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हैं इन केन्द्रों ने महिलाओं को ‘लाभार्थी’ से ‘उद्यमी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ाया है।

वन आधारित अर्थव्यवस्था में महिलाओं की मजबूत भागीदारी

प्रदेश में कुल 40.8 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों में लगभग 19.8 लाख महिलाएं शामिल हैं, जो कुल भागीदारी का लगभग 48.6% है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अब महिलाएं केवल श्रमिक के रूप में नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाली, समूह संचालक और आर्थिक गतिविधियों की अग्रणी भूमिका में सामने आ रही हैं। इससे ग्रामीण और जनजातीय समाज की संरचना में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है।

समग्र योजनाओं से नारी सशक्तिकरण

राज्य सरकार ने महिलाओं के जीवन को बहुआयामी रूप से बेहतर बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया है। चरण पादुका योजना के तहत संग्राहकों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से उन्हें सुरक्षा कवच दिया जा रहा है, वन समितियों से जुड़ कर इस वर्ग की महिलायें सामुदायिक भागीदारी से लाभान्वित हो रही हैं। ग्राम विकास एवं वन संरक्षण के लिए ₹35.31 करोड़ का प्रावधान किया गया है राज्य सरकार की इन पहलों से महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है। साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

‘नारी शक्ति वंदन’ बना सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का आधार

प्रदेश में ‘नारी शक्ति वंदन’ अब एक सशक्त जन-आंदोलन के रूप में विकसित हो चुका है। वन धन विकास केन्द्रों के माध्यम से जनजातीय महिलाएं आत्मनिर्भर बनते हुए अपने परिवार, समाज और प्रदेश के विकास में सक्रिय योगदान दे रही हैं। इस वर्ग की महिलाओं की आजीविका सुव्यवस्थित हो रही है। साथ ही ये नेतृत्व करते हुए नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन रही हैं। स्पष्ट है कि सरकार की नीतियां संवेदनशील और समावेशी होती हैं तो नारी शक्ति समाज के हर स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन लाने में सक्षम बनती है।

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कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह ने नामली में जनगणना के कार्यों का निरीक्षण किया

भारत सरकार, गृह मंत्रालय के जनगणना कार्य निदेशालय के आदेश के परिपालन में भारत की जनगणना 2027 अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना संबंधी कार्य 01 मई 2026 से 30 मई 2026 तक जिले में किया जा रहा है। राष्ट्रीय महत्व के इस कार्य को निर्धारित अवधि में अनिवार्य रूप से संपादित किए जाने हेतु कलेक्टर एवं प्रमुख जिला जनगणना अधिकारी श्रीमती मिशा सिंह द्वारा जिले में निरीक्षण किया जा रहा है।

कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह द्वारा आज नामली क्षेत्र में मकान सूचीकरण एवं गणना कार्य का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान प्रगणकों, सुपरवाइजर एवं फील्ड ट्रेनर्स द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली एवं नागरिकों को जनगणना के लिए प्रगणको को सही-सही जानकारी देने के लिए जागरूक किया। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर के साथ एसडीएम रतलाम ग्रामीण श्री विवेक सोनकर ,तहसीलदार रतलाम ग्रामीण श्री आशीष उपाध्याय सहित संबंधित अधिकारी /कर्मचारी उपस्थित थे ।

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कलेक्टर ने कालूखेड़ा उपार्जन केन्द्रों का आकस्मिक निरीक्षण किया ग्राम पंचायत कार्यालय में देखा समग्र ई केवायसी का काम

रबी विपणन वर्ष 2026-27 के अंतर्गत शासन के निर्देशानुसार जिले में उपार्जन केन्द्रो पर समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन किया जा रहा है । कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह द्वारा उपार्जन केन्द्रों का सतत निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को सुनिश्चित किया जा रहा है । आज कलेक्टर द्वारा सेवा सहकारी समिति कालूखेडा उपार्जन केन्द्र का आकस्मिक निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने तौल कांटों का सत्यापन करवाया तथा कंप्यूटर के माध्यम से संचालित ऑनलाइन प्रक्रिया को देखा। मॉइश्चर मशीन से गेहूं की नमी की जांच समक्ष मे करवाई। कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह ने किसानो से संवाद कर उपार्जन प्रक्रिया, उपलब्ध सुविधाओं एवं केंद्रों पर की जा रही व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की एवं उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए । तौल का सत्यापन करने के लिए गेहूं की बोरियों का वजन करवा कर सत्यापन करवाया। गर्मी की स्थिति को देखते हुए खरीदी केन्द्र पर ठण्डा पेयजल, ओ आर एस के पैकेट, छाया की इत्यादि की पर्याप्त व्यवस्था रखने के निर्देश दिए । किसानों की संख्या को देखते हुए तुलाई कार्य के लिए तौल काटो एवं हम्मालो की संख्या बढ़ाने के लिए निर्देशित किया ।

उपार्जन केन्द्र के निरीक्षण के बाद कलेक्टर ने ग्राम पंचायत कार्यालय कालूखेडा का भी आकस्मिक निरीक्षण कर समग्र ई केवायसी एवं 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड बनवाने की कार्यवाही को देखा एवं संबंधित अधिकारियों को काम लक्ष्य अनुसार त्वरित गति से करने के निर्देश दिए । निरीक्षण के दौरान कलेक्टर के साथ एसडीएम जावरा श्री सुनील जयसवाल, सीईओ जनपद श्री रामस्वरूप हंस, जिला आपूर्ति अधिकारी श्री आनंद गोले , तहसीलदार श्री दानगढ सहित संबंधित मैदानी अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित थे ।

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा के प्रथम जत्थे को हरी झंडी दिखाकर करेंगे रवाना

मध्यप्रदेश से पहली बार जा रहा 1100 श्रद्धालुओं का दल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार, 7 मई को रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक 1 से ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा’ के प्रथम जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह गौरवशाली यात्रा ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के अंतर्गत निकाली जा रही है। भारत की सांस्कृतिक चेतना, आस्था और राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक सोमनाथ स्वाभिमान पर्व–2026 (8 से 11 जनवरी 2026) का शुभारंभ ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर से किया गया है।

मध्यप्रदेश से पहली बार निकलने वाली इस विशेष यात्रा में प्रदेश के विभिन्न अंचलों से 1,100 श्रद्धालुओं का दल सम्मिलित होगा। यह रेलगाड़ी भोपाल और उज्जैन रेलवे स्टेशनों से भी तीर्थयात्रियों को अपने साथ लेकर सोमनाथ की ओर प्रस्थान करेगी। यात्रा के दौरान श्रद्धालु सोमनाथ की पावन धरा पर आयोजित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, दर्शन और आध्यात्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता करेंगे।

संचालक संस्कृति श्री एन.पी. नामदेव ने बताया कि ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का उद्देश्य देशभर के राज्यों के माध्यम से भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान, हजार वर्षों के संघर्ष और आस्था का स्मरण करना है। यह उत्सव राष्ट्र की गौरवमयी विरासत के उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। यह पर्व केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना के पुनरुत्थान और राष्ट्रीय अस्मिता का महाकुंभ है। इसका उद्देश्य देशवासियों को उन हजार वर्षों के लंबे संघर्ष और आस्था की याद दिलाना है, जिसने विपरीत परिस्थितियों में भी भारतीय सांस्कृतिक ज्योति को बुझने नहीं दिया। सोमनाथ मंदिर, जो हमारे राष्ट्रीय गौरव और अडिग श्रद्धा का प्रतीक है, वहीं से इस पावन पर्व की प्रेरणा ली गई है जिससे भावी पीढ़ी अपनी विरासत पर गर्व कर सके।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में निकाली जा रही यह यात्रा प्रदेश की सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय भावना को और अधिक सशक्त करेगी। श्रद्धा और भक्ति के इस अनूठे संगम का समापन 11 मई, 2026 को होगा, जब यह दल सोमनाथ महादेव का आशीर्वाद और सांस्कृतिक गौरव की स्मृतियां लेकर वापस लौटेगा। यह यात्रा जन-जन के मन में स्वाभिमान और श्रद्धा का नया संचार करेगी।

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हरिद्वार-ऋषिकेश तीर्थ दर्शन यात्रा 26 जून को होगी रवाना,

जिले को हुआ 196 सीटों का आवंटन आवेदन के लिए अंतिम तिथि 12 जून आवेदन समस्त तहसील कार्यालय, जनपद कार्यालय एवं नगर निगम रतलाम में कर सकते हैं जमा तीर्थ यात्रा संबंधित जानकारी वेबसाइट www.dharmasva.mp.gov.in पर उपलब्ध कलेक्टर श्रीमती सिंह ने जिले के वरिष्ठ नागरिकों से योजना का लाभ लेने का किया आग्रह

मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत हरिद्वार-ऋषिकेश तीर्थ यात्रा 26 जून 2026 को रवाना होगी जो 29 जून 2026 को वापस आएगी। जिले को यात्रा के लिए 196 सीटों का कोटा आवंटित किया गया है। यात्रा के लिए ट्रेन रतलाम रेलवे स्टेशन से प्रारंभ होगी एवं वापसी में आगमन भी रतलाम में ही होगा। यात्रा पर जाने के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 12 जून 2026 निर्धारित की गई है। इस संबंध में समय-समय पर संशोधित नियमों की जानकारी विभागीय वेबसाइट www.dharmasva.mp.gov.in पर उपलब्ध है। इस यात्रा से संबंधित विस्तृत नियम निर्देश एवं तीर्थयात्रा के लिए निर्धारित आवेदन पत्र विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध कराए गए हैं। कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह ने जिले के नागरिकों से इस योजना का लाभ लेने का आग्रह किया है।

आवेदन करने की प्रक्रिया

मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का लाभ लेने के इच्छुक व्यक्ति मध्यप्रदेश के मूल निवासी होना चाहिए। आवेदक आयकरदाता नहीं होना चाहिए। आवेदक जिनकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक हो। महिलाओं के लिए अधिकतम आयु में 2 वर्ष की छूट अर्थात 58 वर्ष है एवं 60 प्रतिशत से अधिक विकलांग व्यक्ति आवेदक के लिए आयुसीमा का बंधन लागू नहीं होगा। आवेदन जिले के समस्त तहसील कार्यालय, जनपद कार्यालय एवं नगर निगम रतलाम में जमा कर सकते हैं। होंगे।

आवेदकों का चयन

जिले को आवंटित निर्धारित कोटे से ज्यादा संख्या में आवेदन मिलते हैं, तो लॉटरी द्वारा तीर्थ यात्रियों का चयन किये जाकर सूची बनाई जाएगी।

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तहसीलदार श्री मनीष जैन ने बाजना उपमंडी स्थित गेहूं उपार्जन केन्द्र का निरीक्षण किया

रबी विपणन वर्ष 2026-27 के अंतर्गत शासन के निर्देशानुसार एवं कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह के मार्गदर्शन में जिले में उपार्जन केन्द्रो पर समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन किया जा रहा है । आज बाजना क्षेत्र में तहसीलदार श्री मनीष जैन ने बाजना उपमंडी स्थित गेहूं उपार्जन केन्द्रो का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान तौल कांटों का सत्यापन किया गया तथा किसानों से संवाद कर उपार्जन प्रक्रिया, उपलब्ध सुविधाओं एवं केंद्रों पर की जा रही व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की एवं उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए।

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रतलाम डाकघर में विशेष आधार महाअभियान का आयोजन 9 मई को

भारतीय डाक विभाग रतलाम संभाग द्वारा आम जनता को आधार संबंधी सेवाओं का लाभ प्रदान करने के उद्देश्य से 9 मई को विशेष आधार महाअभियान का आयोजन किया जा रहा है। इसके जरिए नागरिक अपने आधार कार्ड में नया नामांकन और अपडेशन आसानी से करवा सकेेंगे। यह सुविधा मुख्य डाकघर आलोट, जावरा, कालूखेड़ा, नामली, सैलाना, शिवपुर, रतलाम के कलेक्टोरेट, प्रधान डाकघर पर उपलब्ध रहेगी। इस अभियान के दौरान सभी सामान्य आधार केन्द्रों का संचालन सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक रहेगा। भारतीय डाक विभाग रतलाम डाक संभाग के अधीक्षक द्वारा सभी नागरिकों से इस महत्वपूर्ण अभियान का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की गई है।

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जिले में युवा संगम के तहत रोजगार एवं स्वरोजगार मेले का आयोजन, 73 प्रतिभागी चयनित

तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्रालय, भोपाल , सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भोपाल एवं रोजगार संचालनालय, भोपाल द्वारा जारी आदेशानुसार जिला प्रशासन, कौशल विकास और रोजगार विभाग एवं जिला रोजगार कार्यालय, मध्य प्रदेश डे ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त तत्वाधान में 6 मई को शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था, सज्जन मिल के सामने, सैलाना रोड, रतलाम में युवा संगम अंतर्गत संयुक्त रूप से रोजगार मेला, स्वरोजगार मेला, प्रधानमंत्री नेशनल अप्रेंटिसशिप मेला, प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना एवं मुख्यमंत्री सीखों कमाओं योजनांतर्गत मेलें का अयोजन किया गया। जिसमे भाग लेने वाली कंपनी माँ चामुंडा इंटरप्राइजेस (सुजलॉन), बदनावर, जिला धार द्वारा निर्धारित मापदंड एवं इंटरव्यू के उपरांत कुल 73 प्रतिभागी प्राथमिक रूप से चयनित हुए। चयनित प्रतिभागियों को संस्था के प्राचार्य महोदय श्री यू. पी. अहिरवार द्वारा उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए शुभकामनाएं दी गई। इसके अतिरिक्त जिले में संचालित लोन से सम्बंधित विभिन्न योजनाओं में रूपये 1000000/- के स्वीकृति पत्र भी हितग्राहियों को वितिरत किये गये तथा जिले में संचालित लोन से संबंधित समस्त योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई। मेले में सम्मिलित होने के लिये कुल 160 आवेदकों द्वारा अपना पंजीयन किया गया। संस्था के प्रशिक्षण अधीक्षक श्री एच. के. बाथम द्वारा उपस्थित युवक युवतियों को आत्म निर्भर होने के लिए उनका मनोबल बढ़ाया, साथ ही अधिक मेहनत कर उच्च पद की ओर अग्रसर होने के लिए प्रोत्साहित किया। आभार संस्था के टीपीओ श्री प्रफुल्ल सोनारकर द्वारा व्यक्त किया गया।

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नरवाई बचाओ खाद बनाओं

उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास श्री आर के सिंह ने बताया कि नरवाई (पराली) अवशेष जलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट हो जाती है कीमती भूसे की हानि होती है हमारे मित्र कीट केंचुआ, सांप सुक्ष्म जीव आदि आग में नष्ट हो जाते है मिट्टी की संरचना खराब हो जाती है, जिससे भूमि की जल धारण क्षमता कम होकर जुताई में अधिक उर्जा की खपत होती है। पर्यावरण दूषित होता है तथा धरती का तापमान बढ़ता है। कार्बन की मात्रा कम हो जाती है। नरवाई जलाने से जन-धन तथा जंगलों के नष्ट होने की संभावना होती है नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान से बचे, किसान भाई नरवाई में आग न लगायें।

वर्तमान में गैंहू की खेती यंत्रीकरण का उपयोग बढ़ने से गैंहू की कटाई कम्बाइन, हार्वेस्टर, ट्रेक्टर द्वारा आसानी से समय पर की जा रही है, किन्तु उससे गैंहू डंठल में याने नरवाई एवं भूसा खेत में छोड़ दिये जाता है जिसको किसान भाई कचरा समझ कर आग से जला देते है। गैंहू की नरवाई में आग लगने से सिर्फ नरवाई ही नही जलती उसमें जमीन के अन्दर उपस्थित सभी सुक्ष्म जीव तापक्रम बढ़ने से समाप्त हो जाते है। परिणाम स्वरूप जली हुई भूमि मृतावस्था में परिणित हो जाती है जिसको सजीव होने में कई वर्ष लग जाते है नरवाई जलाना न केवल किसान के लिए हानीकारक है अपितु प्रकृति, पर्यावरण, भूमि का भी प्रदुषण होता है। खेतो, में आग लगाने से प्रत्येक्ष रूप से बड़ा नुकसान होता है।

किसान भाइयों से अपिल है कि खेतो में नरवाई बिल्कुल नही जलायें तथा विभिन्न रूप से नरवाई का उपयोग खाद बनाने में – भूसा बनाने में उपयोग करें। जिला कण्ट्रोल रूम के प्रभारी सहायक संचालक कृषि श्री भीका वास्के एवं सह प्रभारी सहायक कृषि अभियांत्रिकी श्री विजय मीना से कंट्रोल रूम नंबर 07412- 299061 पर चर्चा कर सकते है।

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‘‘न कोई जीता न कोई हारा‘‘ यह संभव है परस्पर समझौते से- प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुश्री आशापुरे

09 मई को आयोजित होने वाली आगामी नेशनल लोक अदालत के प्रचार-प्रसार हेतु वाहन रवाना

जिला विधिक सहायता अधिकारी एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पूनम तिवारी ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली तथा म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष सुश्री नीना आशापुरे की अध्यक्षता में 09 मई को जिला न्यायालय रतलाम एवं तहसील न्यायालय जावरा, सैलाना, आलोट में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा।

उक्त लोक अदालत में न्यायालय में लंबित समझौता योग्य सिविल एवं आपराधिक, श्रम न्यायालय, उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, बैंकों के ऋण वसूली प्रकरण, बी.एस.एन.एल, संपत्तिकर एवं जलकर के प्री-लिटिगेशन प्रकरणों के निराकरण हेतु कुल 39 खण्डपीठे जिला स्तर एवं तहसील स्तर पर पृथक-पृथक गठित की गई है।

आज 6 मई को जिला न्यायालय रतलाम प्रांगण में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष सुश्री नीना आशापुरे, प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय, रतलाम श्री रामजी गुप्ता के कुशल नेतृत्व में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रतलाम द्वारा लोक अदालत के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। उक्त प्रचार अभियान में जिला प्राधिकरण की मोबाइल वैन, ई-रिक्शा, विद्युत विभाग एवं नगर निगम के वाहनों द्वारा संपूर्ण रतलाम शहर एवं जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पीएलव्ही के माध्यम से नेशनल लोक अदालत एवं अन्य योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

इस अवसर पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती सपना भारती कतरोलिया, जिला रजिस्ट्रार एवं न्यायाधीश श्री अनुपम तिवारी, सचिव/न्यायाधीश, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रतलाम श्री नीरज पवैया, जिला विधिक सहायता अधिकारी सुश्री पूनम तिवारी एवं अधिवक्ता संघ के उपाध्यक्ष श्री सुनील जैन एवं लीगल एड डिफेंस काउंसेल सिस्टम के डिप्टी चीफ श्री अनिल शर्मा एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रतलाम के समस्त कर्मचारीगण एवं अन्य पैरालीगल वालेंटियर्स उपस्थित थे।

नेशनल लोक अदालत के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु जिलें के विभिन्न स्थानों पर बैनर लगवाये गए है। प्रचार वाहनों के माध्यम से प्रसारित जिंगल एवं नालसा थीम सॉंग तथा विधिक साक्षरता शिविरों के आयोजन तथा पैरालीगल वालेंटियर के द्वारा आमजन तक पंहुच बनाकर उन्हें लोक अदालत आयोजन की व्यापक जानकारी दी जावेगी। उक्त लोक अदालत में विभिन्न विभागों जैसे एम.पी.ई.बी. विभाग, नगर पालिक निगम, बैंकों के मामलों इत्यादि में विभिन्न प्रकार के शुल्कों में छूट प्रदान की जा रही है। जिसके लिये संबंधित विभाग से संपर्क कर जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

09 मई को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत में न्यायालय में लंबित समझौता योग्य प्रकरण तथा (वाद पूर्व) प्री-लिटिगेशन प्रकरण निराकरण हेतु प्रस्तुत किए जा रहे है। लोक अदालत के माध्यम से मोटर दुर्घटना, क्षतिपूर्ति दावा, धारा 138 एन.आई.एक्ट, पारिवारिक मामले, ट्राफिक चालान, समझौता योग्य आपराधिक एवं सिविल मामलों का निराकरण कराया जा सकता है।

आमजन से अपील है कि उक्त आयोजित नेशनल लोक अदालत में भाग लेकर अपने प्रकरणों का अधिक से अधिक संख्या में समझौते के माध्यम से निराकरण करवाकर लाभ प्राप्त करें।

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