
ताल में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई आदि शंकराचार्य जयंती, आदित्य वाहिनी और वैदिक सनातन श्रद्धालुओं ने कि महाआरती

ताल ब्यूरो चीफ शिवशक्ति शर्मा
सनातन धर्म के पुनरुद्धारक, महान दार्शनिक और अद्वैत वेदांत के प्रणेता जगद्गुरु आदि शंकराचार्य जी का 2533वां प्राकट्य उत्सव ताल नगर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
नगर के मुख्य बालाजी का बाग हनुमान जी मंदिर ताल में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में आदित्य वाहिनी एवं वैदिक सनातन श्रद्धालु जनों द्वारा भगवान शंकराचार्य जी की विधि-विधान से आरती कर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
पुरी पीठाधीश्वर का सूक्ष्म मार्गदर्शन यह विशेष आयोजन ऋग्वैदिक पूर्वाम्नाय गोवर्धन मठ, पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज के सूक्ष्म मार्गदर्शन एवं उनके शिष्यों के प्रयास से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी के संदेशों को रेखांकित करते हुए बताया कि राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए शंकराचार्य जी के बताए मार्ग पर चलना आज के समय की महती आवश्यकता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान आदि शंकराचार्य जी के चित्र पर माल्यार्पण और वैदिक मंत्रोचार के साथ हुआ। तत्पश्चात, उपस्थित जनसमूह ने सामूहिक रूप से भगवान शंकराचार्य जी की महाआरती की। आरती के पश्चात विशाल प्रसादी का वितरण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं ने धर्म लाभ लिया। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि आज से 2533 वर्ष पूर्व जब सनातन संस्कृति संक्रमण काल से गुजर रही थी, तब आदि शंकराचार्य जी ने अवतरित होकर भारत के चारों कोनों में चार मठों की स्थापना की और सांस्कृतिक एकता के सूत्र में पिरोया। आज का यह आयोजन उन्हीं की विरासत को अक्षुण्ण रखने का एक प्रयास है।
कार्यक्रम में आदित्य वाहिनी के सदस्य अश्विन मेहता, मोहित शर्मा, दिनेश राठौड़, प्रधुमन शास्त्री, कुणाल शुक्ला, अनुपम बोड़ाना, पवन राठौड़, विवेक नागर, जय बैरागी, आदित्य दूबे, अर्पित सोनी सहित नगर के वरिष्ठ नागरिक, मातृशक्ति और युवा उपस्थित रहे। संपूर्ण वातावरण ‘जय-जय शंकर, हर-हर शंकर’ के उद्घोष से गुंजायमान रहा।
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