पूर्ण पारदर्शिता के साथ अफीम तोल व मार्फिन जांच की जा रही है किसान भाई भ्रमित ना हो : सांसद सुधीर गुप्ता

नीमच/ मंदसोर। किसानों द्वारा लाई जाने वाली अफीम की तौल और जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से क्षेत्रीय सांसद सुधीर गुप्ता ने अफीम फैक्ट्री का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक व नारकोटिक्स अधिकारियों के साथ फैक्ट्री में तौल परिक्षण सहित अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया।डिजिटल ट्रैकिंग और भंडारण क्षमता को सराहा
सांसद गुप्ता ने भंडारण क्षेत्र में व्यवस्थाओं को देखा। उन्होंने अधिकारियों से रखरखाव की व्यवस्था जानी और सीधे कर्मचारियों व कंप्यूटर ऑपरेटरों के पास जाकर उनकी कार्यप्रणाली को देखा। उन्होंने कंप्यूटर स्क्रीन पर जांचा कि कैसे प्रत्येक कंटेनर का डेटा सिस्टम में दर्ज किया जा रहा है और पूरी प्रक्रिया को किस तरह से डिजिटल रूप से ट्रैक किया जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान सांसद गुप्ता ने उस नई पारदर्शी प्रणाली को भी परखा, जिसने जांच को पूरी तरह निष्पक्ष बना दिया है। इस व्यवस्था के तहत कंटेनर से किसान का नाम हटाकर सबसे पहले उस पर एक ‘क्यूआर कोड’ (QR Code) लगाया जाता है। इसके बाद लैब में भेजने से पूर्व उसे ‘माइक्रो कोड’ में बदल दिया जाता है, जिससे जांच करने वाले किसी भी विशेषज्ञ को यह भनक नहीं लगती कि वह किस किसान की अफीम का परीक्षण कर रहा है। साथ ही उनके पास ऐसा कोई भी डिजिटल इंस्ट्रूमेंट नहीं है जिससे वो कोडिंग-डिकोडिंग कर सकें।
अत्याधुनिक मशीनों से हो रहा मॉर्फिन का परीक्षण
सांसद ने अफीम परीक्षण लैब का निरीक्षण कर पाया कि अब फैक्ट्री में मॉर्फिन के परीक्षण के लिए अत्याधुनिक और उन्नत तकनीक (‘FTNIR’) से लैस नई मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे जांच के परिणाम पूरी तरह शत प्रतिशत आ रहे हैं। इसी के साथ ही
फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते हुए सांसद ने पाया कि संपूर्ण जांच प्रक्रिया कोटा डीएनसी (DNC) और जीएम (GM) जैसे वरिष्ठ अधिकारियों की कड़ी निगरानी में संचालित हो रही है। किसी भी तरह की अनियमितता रोकने के लिए परिसर में सीसीटीवी कैमरे सक्रिय हैं और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी करवाई जा रही है। वही अफीम की वैज्ञानिक और सटीक जांच के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से 20 से अधिक केमिकल इंजीनियरों (विशेषज्ञों) की एक विशेष टीम फैक्ट्री में तैनात की गई है। इसके अलावा जांच में 250 से अधिक कलर कोड की लाइब्रेरी का भी उपयोग किया जा रहा है। सांसद ने स्पष्ट किया कि इस हाई-टेक और डिजिटल प्रणाली के लागू होने से अफीम जांच प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कोई अनियमितता ना हो। किसानों से की विशेष अपील- ‘अफवाहों पर ध्यान न दें, शिकायत के लिए दरवाजे खुले हैं’
निरीक्षण के बाद सांसद सुधीर गुप्ता ने अफीम उत्पादक किसानों को आश्वस्त करते हुए उनसे एक खास अपील भी की। उन्होंने कहा कि किसान भाई विपक्ष द्वारा फैलाई जा रही अफवाहों और भ्रांतियों के जाल में बिल्कुल न फंसें। कुछ लोग जानबूझकर पुरानी मशीनों से जांच होने और पट्टे कटने का भ्रम फैला रहे हैं, जो पूरी तरह निराधार है।
सांसद ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की मंशा हर पात्र किसान को पूरी प्रामाणिकता के साथ लाइसेंस (पट्टा) देने की है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि यदि किसी भी किसान भाई को इस जांच प्रणाली पर कोई संदेह है, असंतोष है या उनका कोई सुझाव है, तो वे निडर होकर अपनी बात रख सकते हैं।किसान अपनी समस्या सीधे विभागीय अधिकारियों, सरकार या स्वयं उनसे (सांसद से) संपर्क कर साझा कर सकते हैं; उनकी हर शिकायत और सुझाव को पूरी गंभीरता से सुना जाएगा और समाधान किया जाएगा।



