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बंद कुटिया से गायब संत 100 KM दूर मिले, 12 घंटे का सस्पेंस खत्म!

बंद कुटिया से गायब संत 100 KM दूर मिले, 12 घंटे का सस्पेंस खत्म!

12 घंटे का हाई-वोल्टेज ड्रामा: ‘बेसुध’ कदम और महादेव की राह, मध्य प्रदेश के नीमच जिले के जीरन के पास स्थित रामझर महादेव के पुजारी कन्हैयालालजी महाराज की वापसी हुई!

नीमच | मध्यप्रदेश के नीमच जिले में स्थित प्राचीन तपोस्थली रामझर महादेव इन दिनों भक्ति और रहस्य के दोराहे पर खड़ी है। सोमवार सुबह जिस कुटिया का दरवाजा अंदर से बंद था, वहां से एक वृद्ध संत का ‘हवा’ में गायब हो जाना और फिर अचानक 100 किलोमीटर दूर तिलस्वां महादेव में प्रकट होना—यह किसी फिल्मी पटकथा जैसा लग रहा है। भक्त इसे ‘दिव्य बुलावा’ कह रहे हैं, तो तर्कशास्त्री इसे ‘अबूझ पहेली’ मान रहे हैं।

कुटिया का ताला… और अंदर सन्नाटा:-

सोमवार की सुबह जब भक्तों ने संत कन्हैयालाल जी महाराज की कुटिया का दरवाजा खटखटाया, तो अंदर से कोई हलचल नहीं हुई। सांकल अंदर से लगी थी, लेकिन जब दरवाजा तोड़कर भक्त अंदर घुसे, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। महाराज गायब थे! न उनकी लाठी वहां थी, न झोली और न ही मोबाइल। सवाल उठा—क्या महाराज दीवार फांदकर निकले या ‘अंतर्ध्यान’ हो गए?

12 घंटे का हाई-वोल्टेज ड्रामा: ‘बेसुध’ कदम और महादेव की राह:-

करीब 12 घंटे तक पुलिस और मंदिर समिति महाराज को तलाशती रही, लेकिन देर शाम एक फोन कॉल ने सबको चौंका दिया। महाराज तिलस्वां महादेव (सिंगोली) पहुंच चुके थे। वापस लौटने पर महाराज ने जो आपबीती सुनाई, वह रोंगटे खड़े करने वाली है. उन्होंने बताया कि रविवार शाम 5 बजे मैंने कुटिया बंद की थी। अचानक मन में एक अजीब सा रोमांच उठा और मैं बेसुध हो गया। मुझे याद नहीं कि मैं दरवाजा खोलकर कब बाहर निकला। बस महादेव का नाम था और मैं चलता गया। चीताखेड़ा से नीमच और फिर रात 10 बजे तिलस्वां महादेव पहुँच गया। सुबह 10 बजे अचानक सुध आई कि रामझर में हड़कंप मचा होगा।

पुलिस भले ही महाराज को ससम्मान वापस ले आई हो, लेकिन ‘चर्चाओं का बाजार’ इन सवालों पर गर्म है:

अभी बने हुए है ये सवाल: जिनका जवाब नहीं है:-

👉अंदर से बंद कुटिया: अगर सांकल भीतर से चढ़ी थी, तो महाराज बाहर कैसे निकले? क्या कोई ‘गुप्त रास्ता’ है या यह वाकई अध्यात्म का कोई चमत्कार?

👉खाली जेब, लंबा सफर: न हाथ में पैसे थे, न मोबाइल। एक बुजुर्ग संत बिना किसी सहारे और संसाधनों के इतनी दूर बस और गाड़ियों के तालमेल से कैसे पहुंच गए?

👉महाराज का कहना है कि वे ‘बेसुध’ थे। विज्ञान इसे ‘ट्रांस’ या ‘डिसोसिएटिव अवस्था’ कह सकता है, लेकिन भक्त इसे सीधे महादेव का आकर्षण मान रहे हैं।

फिलहाल रामझर महादेव में रौनक लौट आई है। मंदिर समिति और पुलिस ने राहत की सांस ली है।

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