दलित शोषित पीड़ितजनों की मजबूत आवाज एवं ताकत थे पूर्व विधायक रामगोपालजी भारतीय

दलित शोषित पीड़ितजनों की मजबूत आवाज एवं ताकत थे पूर्व विधायक रामगोपालजी भारतीय
-विक्रम विद्यार्थी
वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार, मंदसौर
पूर्व विधायक श्री रामगोपाल भारतीय के निधन की जानकारी मिलने पर मन बैचेन हो गया। वे दलित, शोषित एवं पीड़ितजनों की मजबूत आवाज एवं ताकत थे। इंटक से भी उनका लगाव था।
लगभग 93 वर्षीय भारतीयजी पिछले काफी अरसे से बीमार थे। उनकी भलमनसात, मिलनसारिता, ईमानदारी, सक्रियता के कारण कांग्रेस के उच्च वर्ग में उनकी पैठ थी। 1972 में वे जिले के सुवासरा से कांग्रेस टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बने थे। उनके कार्यकाल में सुवासरा अंचल में अनेकों विकास कार्य हुए। तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुनसिंह, श्यामचरण शुक्ल, दिग्विजयसिंह, कमलनाथ से उनका सीधा संपर्क था। पूर्व श्रममंत्री एवं गांधीवादी नेता श्री श्यामसुंदर पाटीदार के अनन्य सहयोगी थे। श्रम संगठन इंटक एवं मजदूर परिवारों से जुड़े थे।
भारतीयजी ने दलित नेता जंगीबाबू तंवर, कांग्रेस नेता साहित्यकार, मदनकुमार चौबे, अशोक त्रिपाठी के साथ दलितों को मंदिर प्रवेश, उनकी जमीनों के विवाद में राहत दिलाने में भरपूर सहयोग दिया। सादा जीवन उच्च विचार के वे संवाहक थे। श्रमिक आंदोलन में भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। दलौदा के मिल श्रमिकों के आंदोलन में सक्रिय रहे। उस समय तत्कालीन विधायकद्वय श्रमिक नेता श्री श्यामसुंदर पाटीदार, श्री भारतसिंह दीपाखेड़ा के नेतृत्व में मिल मजदूरों ने आंदोलन किया था तब उस समय श्री अर्जुनसिंह मुख्यमंत्री थे ने तत्कालीन मंत्रीद्वय श्री भारतसिंह जावरा एवं दिग्विजयसिंह को भेजकर सुलह कराई थी।
एक वाकिया याद आ रहा है, कांग्रेस इंदिरा लहर के दौरान 1972 में विधानसभा चुनाव के नतीजों में मंदसौर जिले में चार विधानसभा सीटों में से तीन में कांग्रेस प्रत्याशी जीत चुके थे। सुवासरा सीट पर श्री भारतीय पीछे चल रहे थे। उत्साही कांग्रेसजनों ने विजय जुलूस निकालने की बात कही तब श्री पाटीदार ने कहा कि श्री भारतीय का चुनाव परिणाम आने तक धैर्य क्यों नहीं रखते। जब सुवासरा का नतीजा आया तब श्री भारतीय को साथ लेकर कांग्रेस का जुलूस निकला। यह थी उस जमाने में कांग्रेसजनों में आपसी सामंजस्य एवं सौहार्दता की मिसाल।
श्री भारतीय के सद्गुणों से आज के कांग्रेस नेता कार्यकर्ता सबक सीख तो वे जनआंदोलनों में जनता की आवाज मुस्तैदी से उठा सकेंगे। सोश्यल मीडिया, ऊपरी दिखावे से कोई भी राजनीतिक दल एवं नेता, कार्यकर्ता मजबूत नहीं होता और न ही 5 वर्ष में केवल चुनाव के 21 दिनों में कार्यकर्ताओं के दिल जीवन से। सतत सम्पर्क, संघर्ष, सहयोग के बल पर नेता कार्यकर्ता मजबूती पाएँगे। दतिया उपचुनाव में कांग्रेस कांग्रेस से तो भाजपा-भाजपा से लड़ रही थी। आम मतदाता के निर्णय से उम्मीदवार जीता। हालांकि ताकत एवं पैसा तो सभी उम्मीदवारों ने लगाया था। श्री भारतीयजी को विनम्र श्रद्धांजलि।



