रतलामकृषि दर्शन

खरीफ की फसल को कीटो बीमारियों आदि से बचा के लिए किसानों को सलाह

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जिलें में 3 लाख 21 हजार हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुआई

रतलाम –  जिलें में सोयाबीन की बोनी बी.बी.एफ. पद्धित (ब्रांड बैड फरो) पद्धित एवं रीज एण्ड फरों पद्धित से किसानो ने बोनी की है लेकिन जिन कृषकों द्वारा अपने खेतों में परम्परागत विधि से सोयाबीन की बोनी है, उन खेतो में पानी भरने की स्थिति‍ में जल निकास का कार्य करें। इस समय सोयाबीन फसल में कहीं-कहीं चक्र भंग (गर्डल बीटल) के साथ-साथ पत्ती खाने वाली इल्लियो का प्रकोप दिखाई दे रहा है जिसके नियंत्रण के लिये मिश्रित कीटनाश्क इंडोक्साकर्ब 850 मि.ली. प्रति हेक्टेयर या बीटा सल्फूरिन इमिडाक्लारोपिड 350 मि.ली. प्रति हेक्टे.यर का छिडकाव करें। इसके अलावा सोयाबीन फसल में पीला मोजेक रोग का भी प्रकोप सफेद मक्खी एवं जल भराव के कारण हो रहा है, इसकी रोकथाम के लिये मिश्रित कीटनाशक, थायोमिथोकस्म, लेमडासायलोथ्रिन 125 मि.ली. प्रति हेक्टेरयर में छिडकाव करें।

इसके अलावा प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को इल्लियो के रोकथाम के लिये बेसिलस थूरिन्जीसएनसिस या ब्यूवेरिया बे‍सियाना एक लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिडकाव करने की सलाह दी गयी। साथ् ही प्रकाश प्रपंच का उपयोग के साथ पक्षियों के बैठने के लिये टी आकार के बडे परचर लगाने के बारे में बताया गया। इसी प्रकार मक्का फसल में फालआर्मी वर्म का प्रकोप देखा गया है । इसके नियंत्रण के लिये एमामेक्टिन बेंजोएट 5WG पांच ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर मक्का की फसल में छिडकाव करने की सलाह दी गई।

उप संचालक कृषि श्री विजय चौरसिया द्वारा बताया गया कि रतलाम जिलें में 3 लाख 21 हजार हेक्टेयर में खरीफ फसलों सोयाबीन, मक्का आदि प्रमुख फसलों की बुआई की गई है। वर्तमान में जिलें में 620 मि.मी. वर्षा हो चुकी है। खरीफ फसलें बॅहुत ही अच्छी  स्थिति में खडी है।

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