सहकारी सोसायटी के किसानों से ऋण वसूली के लिए राजस्व विभाग द्वारा नोटिस जारी करना उचित नही– श्री गुर्जर

सन्तोष धनगर
मंदसौर। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी पूर्व महामंत्री किसान नेता महेन्द्र सिंह गुर्जर ने कहा कि वर्ष 2018- 2019 में तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रथम केबिनेट बैठक में किसानों के 2 लाख रुपये तक बकाया ऋण माफ करने का निर्णय लिया था। तब प्रदेश के लगभग 55 लाख किसानों के ऋण माफ हुए थे और शेष बकाया किसानों के ऋण माफ करने की चरणबद्ध प्रकिया जारी थी।
श्री गुर्जर ने कहा कि विगत 5 साल की अवधि में शेष किसानों से बकाया ऋण वसूली के लिए मध्यप्रदेश सरकार के सहकारिता विभाग द्वारा किसी भी प्रकार का प्रथम सूचना पत्र किसानों को जारी नही किये गए हैं। अब वर्तमान मध्यप्रदेश सरकार के राजस्व विभाग के न्यायालय द्वारा सीधे किसानों को म.प्र. भू- राजस्व सहिंता 1959 की धारा 146 के तहत ऋण वसूली के नोटिस दिये जा रहे हैं जो कि न्याय संगत नही है।
इस सम्बंध में श्री गुर्जर ने माननीय मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार की केबिनेट बैठक के निर्णय अनुसार शेष बकायादार किसानों को ऋण माफी योजना में शामिल कर उचित राहत प्रदान की जावे।
श्री गुर्जर ने कहा कि केन्द्र एवं राज्य की भाजपा सरकार ने किसानों की आय को वर्ष 2022 तक दो गुना करने का संकल्प लिया था लेकिन आज तक किसानों की आय दोगुना करना तो कोसों दूर रह गया है उल्टे अन्नदाता किसानों को राहत देने के बजाय मध्यप्रदेश सरकार द्वारा राजस्व विभाग के माध्यम से किसानों को नोटिस जारी कर असंवैधानिक और मानसिक रूप से दबाव डालकर वसूली के प्रयास किये जा रहे हैं।
श्री गुर्जर ने इस सम्बंध में मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, सहकारिता मंत्री, मुख्य सचिव, कृषि सचिव, आयुक्त सहकारिता, मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष जीतू पटवारी, राज्यसभा सांसद श्री दिग्विजय सिंह,राज्यसभा सांसद विवेक तनखा, पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को पत्र भेजकर तत्काल प्रभाव से अन्नदाता किसानों से न्यायालय कार्यवाही द्वारा जबरन वसूली के मामले में संज्ञान लेकर किसानों को राहत प्रदान करने का अनुरोध किया है।