निजी स्कूल द्वारा भारी भरकम फीस वसूली को लेकर लड़ाई पहुंची कोर्ट ,कोर्ट ने दिया आदेश-जिला शिक्षा विभाग करे जांच

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मंदसौर। निजी स्कूल द्वारा भारी भरकम फीस वसूली को लेकर एक अभिभावक ने जिला शिक्षा विभाग को शिकायत की। लेकिन शिक्षा विभाग शिकायत को इधर उधर घूमाता रहा। इसके बाद अभिभावक ने कोर्ट का रास्ता चुना। न्यायालय ने इस मामले में जिला शिक्षा विभाग को जांच का आदेश दिया है। मामला कोरोना के समय ज्यादा फीस वसूली और टीसी का है। जहां अभिभावक की बेटी पड़ रही थी। अब बेटी आठवीं में अन्य निजी स्कूल में है। अब नौवीं में बच्ची को टीसी की जरुरत होगी। इस मामले में अभिभावक ने शिक्षा विभाग से जल्द इस मामले में जांच करने कर टीसी दिलवाने की मांग की है।
निजी स्कूल की मनमर्जी पर आरोप लगाते हुए एक अभिभावक अपनी बेटी की टीसी और फीस संबंधी मेटर में लम्बे समय से परेशान चला आ रहा है। स्कूल प्रबंधन अभिभावक की बात मानने को तैयार नहीं है, जबकि वह लिखित में अपनी बात बता रहा है। उधर, शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों को भी तात्कालीक समय में अभिभावक भूपेन्द्रसिंह चावड़ा ने शिकायत की। समाधान की बजाय शिकायत इधर से उधर होती रही। यह सब आरोप लगाते हुए व परेशानी झेल चुके अभिभावक चावड़ा ने लोक अदालत की शरण ली। यहां उन्होंने अपने सभी लिखित दस्तावेज व अन्य कागजातों से लोक अदालत को अवगत कराया। लोक अदालत ने निर्णय पाया है कि जांच जिला शिक्षा अधिकारी स्तर पर की जा सकती है, इसलिए जिला शिक्षा अधिकारी इस संबंध में विधिवत जांच कर कार्रवाई करें।
स्थाई लोक अदालत में आदेश दिया गया है कि छात्रा की फीस व टीसी मामले में जिला शिक्षा अधिकारी स्तर पर जांच की जा सकती है। ये आदेश स्थायी लोक अदालत (लोकोपयागी सेवाओं के लिए) के न्यायाधीश ने दिए। बता दें कि मंदसौर निवासी अभिभावक भूपेंद्रसिंह चावड़ा ने इस संबंध में आवेदन पेश किया था। इसमें कोविड दौर का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया था कि बेटी 5वीं में निजी स्कूल में पढ़ रही थी और नियमों से अधिक फीस मांगने के बाद से निराकरण नहीं हुआ। टीसी तक रुकी है। स्कूल प्रशासन ने फैल प्रोमोटेड टू नेक्स्ट क्लास कर दिया था।जबकि शिक्षा विभाग की नीति के अनुसार किसीभी बच्चे को फैल का नियम नही है इस पर अध्यक्ष, अपर जिला न्यायाधीश स्थायी लोकअदालत (लोक उपयोगी सेवाओं के लिए) ने उल्लेख किया कि इस बारे में विस्तृत जांच उपरांत विधिवत कार्रवाई जिला शिक्षा अधिकारी मंदसौर के द्वारा ही की जा सकती है। साथ ही उल्लेख किया कि जो शिकायत आवेदक के द्वारा पूर्व से प्रस्तुत की जा चुकी है, उक्त शिकायत का शीघ्र नियमानुसार जंच कर विधिवत कार्रवाई करें साथ ही प्रकरण का परिणाम संबंधित पंजी में दर्ज होकर अभिलेख नियत अवधि में अभिलेखागार में जमा हो । अभिभावक चावड़ा ने बताया कोविड दौर के वक्त का मामला है और न्याय के लिए कोर्ट तक गया। बेटी अब 8वीं में अन्य निजी स्कूल में है जहां 9वीं से उसे टीसी की जरूरत भी लगेगी।यहाँ अब अभिभावक का कहना है कि स्कूल की मान्यता को रद्द किया जाए मेरी बेटी के साथ जो हुआ है वह और किसी बेटी के साथ ना हो हम चाहते हैं जल्द कमेटी निर्णय दें।