500 करोड़ के डीजे प्लाजा का हो रहा दो वर्ष से प्रचार, दुकान का पता नहीं और लाखों में हो रही बुकिंग

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सीधी। शहर के सम्राट चौक में डीजे प्लाजा के निर्माण का प्रचार-प्रसार दो वर्षों से काफी तेजी के साथ किया जा रहा है। साथ ही डीजे प्लाजा में करीब 500 दुकानों के निर्माण को प्रचारित कर उसकी बुकिंग भी की जा रही है।
जानकारों का कहना है कि किसी भी बड़े प्रोजेक्ट में पूंजी लगाने से पहले धरातल पर उसकी मौजूदगी और स्थिति के बारे में लोगों को मालूम होना चाहिए। कागजों में तो प्रोजेक्ट को बहुआयामी बताकर लोगों को आकर्षित किया जा रहा है। साथ ही यह भी दावे किए जा रहे हैं कि एक ही स्थान पर सभी तरह की दुकानें संचालित होंगी। जिससे लोगों को बड़े महानगरों के तर्ज पर डीजे प्लाजा में ही खरीदी की सभी सुविधाएं बिना किसी भटकाव के उपलब्ध होगी। छोटी से लेकर बड़ी-बड़ी वस्तुएं यहां रियायती दामों पर उपलब्ध होगी। खैर यह दावे तो अभी भविष्य की गर्त में है। निर्माण कार्य में कोई तेजी न आने से केवल लोगों को तस्वीरों में ही भव्य डीजे प्लाजा नजर आ रहा है। डीजे प्लाजा के प्रोजेक्ट से जुड़े बड़े कर्ता-धर्ता इस मामले में प्रचार का कार्य ही करने में सबसे ज्यादा व्यस्त हैं।
उनकी दिलचस्पी इस बात पर कतई नहीं है कि डीजे प्लाजा में दुकान लेने वालों को धरातल पर भी कही जाने वाली सभी सुविधाएं जल्द से जल्द नजर आएं। लोग भी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि डीजे प्लाजा का भव्य रूप धरातल पर नजर आए और उन्हें भी बड़ा व्यवसाय करने का सुनहरा अवसर मिले।उधर कुछ लोगों का कहना है कि डीजे प्लाजा का निर्माण शुरू होने से पहले ही इसमें फर्जीवाड़ा करने की पूरी रूपरेखा तय कर ली गई है। इसके जिम्मेदार केवल भारी-भरकम रकम समेटने में ही मशगूल हैं। बड़े प्रोजेक्ट में शामिल दीपक गुप्ता एसआईटी कॉलेज के चर्चित डायरेक्टर हैं। वहीं भोला गुप्ता एवं कमल कामदार शहर के नामचीन व्यवसायी हैं। यह सभी पूर्व में कांग्रेस पार्टी से संबद्ध थे। कुछ माह पहले भी इनके द्वारा भाजपा की सदस्यता ले ली गई है। उनके पार्टी बदलने से यह चर्चा है कि यह सबकुछ डीजे प्लाजा के नाम पर चल रहे कार्ययोजना का ही प्रमुख भाग है। सत्ता पक्ष में आने के बाद उनके द्वारा क्या गुल खिलाया जाएगा इसकी जांच दबवाने में मदद मिलेगी। बताया गया है कि डीजे प्लाजा बड़ा प्रोजेक्ट है।
इसके निर्माण का दावा तीन वर्ष में पूर्ण करने का था। वर्तमान में काफी हो-हल्ला मचने पर केवल भू-तल की खुदाई का काम ही काफी धीमी गति से किया गया है। जिससे यह दिखाया जा सके कि निर्माण कार्य शुरू है। यदि तत्परता से कार्य किया गया होता तो डीजे प्लाजा का प्रथम तल अस्तित्व में आ गया होता। ऐसा आभाष हो रहा है कि डीजे प्लाजा का निर्माण कार्य बिना पूर्ण किए ही बुकिंग के नाम पर राशि वसूलने का सिलसिला ही शुरू किया गया है। जिसके चलते व्यवसायी भी संशय में हैं।
नवीन कलेक्ट्रेट भवन का निर्माण अधूरा
डीजे प्लाजा के कर्ता-धर्ताओं द्वारा आरंभ में नवीन कलेक्टे्रट भवन के निर्माण का ठेका लिया गया था। करोड़ों के कार्य में काफी सुस्ती आरंभ से ही दिखाई दे रही है। कलेक्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण भवन का निर्माण कार्य तीन वर्षों बाद भी पूर्ण नहीं हुआ है। जानकारों का कहना है कि कलेक्ट्रेट भवन का निर्माण कार्य पूर्ण करने के बााद ही डीजे प्लाजा का निर्माण कार्य शुरू करना था। फिर भी कलेक्ट्रेट भवन का निर्माण कार्य अधूरा है। इस ओर गृह निर्माण मंडल के जिम्मेदार अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। गृह निर्माण मंडल के उपयंत्री एवं सहायक यंत्री संविदाकार को मनमानी करने का पूरा खुला संरक्षण दे रहे हैं। जिसके चलते संविदाकार द्वारा निर्माणाधीन कलेक्ट्रेट भवन का कार्य काफी मंथर गति से चला जा रहा है। मौके पर लंबे समय से काम बंद करके रखा गया है। जिसको देखने वाला कोई भी अधिकारी नहीं है। यदि कलेक्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण भवन का निर्माण कार्य 3 वर्ष में भी पूर्ण नहीं हो सकता तो अन्य सरकारी भवनों के निर्माण कार्य के संबंध में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।