अल्पवर्षा से महंगी हुई खाद्य सामग्री, फिर भी दीपावली पर बाजार में उत्साह और उमंग

अल्पवर्षा से महंगी हुई खाद्य सामग्री, फिर भी दीपावली पर बाजार में उत्साह और उमंग
- दीपावली पर खाद्य वस्तुओं में महंगाई की गर्मी, दाल-चावल से लेकर आटा, शक्कर और ड्राई फ्रूट्स तक बढ़े दाम।
- तुअर दाल 12 रुपए, हरी मूंग 8 रुपए और चना दाल 7 रुपए किलो महंगी; दुबराज चावल में 10 और बासमती में 14 रुपए की तेजी, ड्राई फ्रूट्स 20 से 30 प्रतिशत तक महंगे
- अल्पवर्षा से प्रभावित हुई फसलों की पैदावार, मांग और आपूर्ति के अंतर से बढ़े भाव; सरकार की ओर से बाजार में स्थिरता और उपभोक्ताओं को राहत देने के प्रयास।
भोपाल। दीपावली के त्योहार से पहले खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी का असर अब आम आदमी की रसोई तक पहुंचने लगा है।
भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू ने बताया कि आटा, मैदा, सूजी, शक्कर, दाल, चावल, प्याज और ड्राई फ्रूट्स सहित रोजमर्रा की जरूरतों वाली कई वस्तुओं के दामों में बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते इस बार घरों में बनने वाली मिठाइयों, नमकीन और पारंपरिक पकवानों की लागत भी बढ़ने की संभावना है। बाजार में आई इस तेजी का एक महत्वपूर्ण कारण इस वर्ष कई क्षेत्रों में हुई अल्पवर्षा और उसके चलते फसलों की पैदावार तथा आवक पर असर माना जा रहा है।
भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू ने आगे बताया कि इस बार खाद्य वस्तुओं के बाजार में एक साथ कई वस्तुओं के भाव बढ़े हैं। अल्पवर्षा के कारण कृषि उत्पादन और बाजार में आवक प्रभावित होने से मांग और आपूर्ति के बीच अंतर देखने को मिल रहा है। इसका असर दाल, चावल और अन्य खाद्य सामग्रियों पर पड़ रहा है। हालांकि सरकार की ओर से आवश्यक खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने, बाजार की स्थिति पर निगरानी रखने और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए लगातार सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि त्योहार के समय आम जनता पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ न पड़े और बाजार में आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे।
ड्राई फ्रूट्स के थोक व्यापारी किशोर राजदेव ने बताया कि ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में करीब 20 से 30 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। काजू, बादाम, किशमिश, पिस्ता सहित अन्य सूखे मेवों के भाव बढ़ने से मिठाई निर्माताओं और उपभोक्ताओं की लागत बढ़ी है। दीपावली पर मिठाइयों, गिफ्ट पैक और घरों में बनने वाले पकवानों में सूखे मेवों का इस्तेमाल अधिक होता है। ऐसे में इस बार ड्राई फ्रूट्स की खरीदारी पिछले साल की तुलना में महंगी पड़ रही है।
थोक चावल दाल एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश रामरखवानी ने बताया कि दाल और चावल के बाजार में भी तेजी बनी हुई है। तुअर दाल के भाव में करीब 8 से 12 रुपए प्रति किलो, हरी मूंग में 8 से 10 रुपए और चना दाल में 6 से 8 रुपए प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं चावल की कीमतों में भी उल्लेखनीय तेजी आई है। दुबराज चावल करीब एक महीने में 8 से 10 रुपए प्रति किलो और बासमती चावल लगभग 12 से 14 रुपए प्रति किलो तक महंगा हुआ है। अल्पवर्षा और फसलों की आवक पर पड़े असर के साथ बाजार की मांग भी कीमतों को प्रभावित कर रही है। दाल और चावल आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरत हैं, इसलिए इनके भाव बढ़ने का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ता है।
आटा, मैदा और बेसन के थोक व्यापारी अभिषेक साहू ने बताया कि दीपावली से पहले आटा, मैदा और सूजी के भाव में तेजी आई है। आटे में करीब 250 रुपए प्रति क्विंटल, मैदा में 200 रुपए और सूजी में 300 रुपए प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी हुई है। बेसन सहित इन सामग्रियों का इस्तेमाल दीपावली पर बनने वाली मिठाइयों, नमकीन, मठरी और अन्य पारंपरिक पकवानों में बड़े पैमाने पर होता है। कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी से घरेलू रसोई के साथ मिठाई और नमकीन कारोबार की लागत भी प्रभावित हो रही है।
प्याज के थोक व्यापारी हसीन भाई ने बताया कि प्याज के थोक भाव बढ़कर करीब 50 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। प्याज की कीमतों में तेजी का असर आम रसोई के साथ होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर भी पड़ रहा है। बाजार में आवक और उपलब्धता के अनुसार भावों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
सरकार के प्रयासों से राहत की उम्मीद
भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू ने कहा कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार की ओर से समय-समय पर बाजार की निगरानी, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बढ़ाने और आपूर्ति व्यवस्था मजबूत करने जैसे सार्थक कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता महंगाई पर नियंत्रण रखते हुए आम उपभोक्ता को राहत देना है। सरकार के इन प्रयासों से बाजार में स्थिरता आने और आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर इस दीपावली पर खाद्य वस्तुओं की महंगाई का असर बाजार से लेकर घर की रसोई तक दिखाई दे रहा है। हालांकि अल्पवर्षा से उत्पन्न उत्पादन और आपूर्ति की चुनौतियों के बीच सरकार के प्रयासों से कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद भी बनी हुई है।



