मध्यप्रदेश में उद्योग लगाना हुआ आसान, नया ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026 लागू

मध्यप्रदेश में उद्योग लगाना हुआ आसान, नया ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026 लागू
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने निवेशकों और उद्यमियों के लिए बड़ी राहत दी है। राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम- 2026 (क्रमांक 6 सन् 2026) को लागू कर दिया है। इसे 20 अगस्त 2026 के असाधारण राजपत्र में प्रकाशित किया गया है। इस अधिनियम को 17 अगस्त 2026 को राज्यपाल की मंजूरी मिल गई थी।इस नए कानून के लागू होने से अब प्रदेश में उद्योगों की स्थापना, विस्तार और संचालन की प्रक्रिया बेहद सरल हो जाएगी। पुराने दो कानून – मध्यप्रदेश निवेश संवर्धन अधिनियम, 2008 और मध्यप्रदेश उद्योगों की स्थापना एवं परिचालन का सरलीकरण अधिनियम, 2023 को निरस्त कर दिया गया है।
नये कानून अंतर्गत पांच मुख्य नई बातें-1. स्व-घोषणा से शुरू होगा उद्योग: श्वेत और हरित श्रेणी के उद्योग अब सिर्फ स्व-घोषणा (Self-Declaration) के आधार पर “स्थापना प्रमाण-पत्र” लेकर अपना काम शुरू कर सकेंगे। उन्हें शुरूआत में किसी अन्य स्वीकृति के लिए नहीं भटकना पड़ेगा। यह प्रमाण-पत्र 3 साल तक वैध रहेगा।
2. एकल खिड़की प्रणाली होगी और मजबूत: सभी तरह की स्वीकृतियां, लाइसेंस, अनापत्ति प्रमाण-पत्र अब एक ही जगह – एकल खिड़की प्रणाली (Single Window System) के माध्यम से मिलेंगे। इसके लिए राज्य की नोडल एजेंसी एमपी इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPIDC) को बनाया गया है।
3. समय पर नहीं हुआ काम तो स्वतः स्वीकृति: अधिनियम में हर स्वीकृति के लिए समय-सीमा तय की गई है। अगर सक्षम अधिकारी तय समय में आवेदन पर फैसला नहीं लेता है तो वह आवेदन स्वतः स्वीकृत (Deemed Approval) माना जाएगा।
4. दो स्तरीय निगरानी समिति: निवेश को बढ़ावा देने के लिए दो समितियां बनाई गई जिसमें राज्य निवेश संवर्धन समिति: मुख्य सचिव की अध्यक्षता में, जो बड़े निवेश प्रस्तावों को मंजूरी देगी। जिला निवेश संवर्धन समिति: कलेक्टर की अध्यक्षता में, जो जिले स्तर के निवेश को देखेगी।
5. जमीन और शिकायत निवारण का भी प्रावधान: उद्यमी अपनी औद्योगिक भूमि का अंतरण, पुनः समनुदेशन, विलय या सहबद्धीकरण कर सकेंगे। साथ ही निवेशकों की शिकायतों के लिए एकल खिड़की पर ही निवेश शिकायत निवारण तंत्र भी बनाया गया है।सरकार का कहना है कि इस अधिनियम का उद्देश्य राज्य में कारोबार को सुगम बनाना, पारदर्शिता लाना और निवेशकों को बिना परेशानी के उद्योग लगाने में मदद करना है।
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