मंदसौरमध्यप्रदेशराजनीति
निजी अस्पतालों के लायसेंस निरस्त करने और फिर बहाल होने पर भाजपा के खेल को समझे जनता – श्री कुमावत

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मंदसौर। प्रदेश के जबलपुर में निजि नृसिंग होम में आग लगने की घटना के बाद प्रदेश भरमें निजि अस्पतालों की जांच हुई, मंदसौर में भी ऐसा हुआ लेकिन मंदसौर में ऐसी क्या बात हो गई कि जिन 23 निजि अस्पतालों पर मंदसौर के स्वास्थ्य सुविधाओं की जिम्मेदारी है उन्हें बिना सोचे समझे इनके लायसेंस निरस्त कर दिये गये, इसमें भाजपा के जनप्रतिनिधियों द्वारा बडा खेल करने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
उक्त बात कहते हुए प्रदेश कांग्रेस सचिव सुरेन्द्र कुमावत ने कहा कि पर्याप्त समय देने के बाद निजी अस्पतालों के लायसेंस निरस्त किये गये थे फिर और समय देने की बात कहते हुए इन निरस्त लायसेंस को बहाल कर दिया गया यह बात सामान्य नजर नहीं आती। पूरे प्रदेश में सिर्फ मंदसौर में ही इस प्रकार की कार्यवाही हुई इससे पहले इस प्रकार की कार्यवाही कभी नहीं हुई। श्री कुमावत ने बताया कि यदि येे निजि अस्पताल बंद हो जाये तो क्या प्रशासन और भाजपा के जनप्रतिनिधि जिला चिकित्सालय में जिले भरे के मरीजों के उपचार की व्यवस्था कर पायेगा क्योंकि जिला अस्पताल में जो गिने चुने मरीज उपचार के लिए पहुंचते है उन्हें ही संतोष जनक उपचार नंहीं मिल पा रहा है। ऐसे में निजि अस्पताल बंद हो जायेंगे तो मंदसौर में हाहाकार की स्थिति बन जायेंगी।
श्री कुमावत ने कहा कि प्रदेश में 19 सालों से भाजपा की सरकार है इस दौरान मंदसौर में भी भाजपा के जनप्रतिनिधि रहें 12 वर्ष पूर्व बजट में ट्रामा सेन्टर पास होने के बावजूद आज दिनांक तक भाजपा के जनप्रतिनिधि मंदसौर में ट्रामा सेन्टर नहीं बनने दियें जबकि कमलनाथ सरकार के समय मंदसौर में ट्रामा सेन्टर के लिए बजट के साथ वर्क आॅर्डर तक पास कर दिया था लेकिन दुर्भाग्य से कांग्रेस की सरकार गिरा दी गई और फिर भाजपा जनप्रतिनिधियों ने मंदसौर में ट्रामा सेन्टर को ठंडे बस्ते में डालवा दिया और आज तीन साल बाद भी इसको लेकर कोई प्रयास नहीं किये गये। जिला चिकित्सालय की स्थिति यह है निजि लैबों को लाभ पहुंचाने के उद्येश्य से जिला अस्पताल मे कई जांच मशीने बंद पडी है। श्री कुमावत ने कहा कि भाजपा जनप्रतिनिधियों के दबाव में ही जिला प्रशासन ने 23 अस्पतालों के लायसेस निरस्त किये और फिर आमजनों में अच्छा बनने के लिए सामने आकर पुनः इन्हें बहाल करवाया जिसकी जांच हो तो बडे भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है।
उक्त बात कहते हुए प्रदेश कांग्रेस सचिव सुरेन्द्र कुमावत ने कहा कि पर्याप्त समय देने के बाद निजी अस्पतालों के लायसेंस निरस्त किये गये थे फिर और समय देने की बात कहते हुए इन निरस्त लायसेंस को बहाल कर दिया गया यह बात सामान्य नजर नहीं आती। पूरे प्रदेश में सिर्फ मंदसौर में ही इस प्रकार की कार्यवाही हुई इससे पहले इस प्रकार की कार्यवाही कभी नहीं हुई। श्री कुमावत ने बताया कि यदि येे निजि अस्पताल बंद हो जाये तो क्या प्रशासन और भाजपा के जनप्रतिनिधि जिला चिकित्सालय में जिले भरे के मरीजों के उपचार की व्यवस्था कर पायेगा क्योंकि जिला अस्पताल में जो गिने चुने मरीज उपचार के लिए पहुंचते है उन्हें ही संतोष जनक उपचार नंहीं मिल पा रहा है। ऐसे में निजि अस्पताल बंद हो जायेंगे तो मंदसौर में हाहाकार की स्थिति बन जायेंगी।
श्री कुमावत ने कहा कि प्रदेश में 19 सालों से भाजपा की सरकार है इस दौरान मंदसौर में भी भाजपा के जनप्रतिनिधि रहें 12 वर्ष पूर्व बजट में ट्रामा सेन्टर पास होने के बावजूद आज दिनांक तक भाजपा के जनप्रतिनिधि मंदसौर में ट्रामा सेन्टर नहीं बनने दियें जबकि कमलनाथ सरकार के समय मंदसौर में ट्रामा सेन्टर के लिए बजट के साथ वर्क आॅर्डर तक पास कर दिया था लेकिन दुर्भाग्य से कांग्रेस की सरकार गिरा दी गई और फिर भाजपा जनप्रतिनिधियों ने मंदसौर में ट्रामा सेन्टर को ठंडे बस्ते में डालवा दिया और आज तीन साल बाद भी इसको लेकर कोई प्रयास नहीं किये गये। जिला चिकित्सालय की स्थिति यह है निजि लैबों को लाभ पहुंचाने के उद्येश्य से जिला अस्पताल मे कई जांच मशीने बंद पडी है। श्री कुमावत ने कहा कि भाजपा जनप्रतिनिधियों के दबाव में ही जिला प्रशासन ने 23 अस्पतालों के लायसेस निरस्त किये और फिर आमजनों में अच्छा बनने के लिए सामने आकर पुनः इन्हें बहाल करवाया जिसकी जांच हो तो बडे भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है।