दलौदा क्षेत्र में मानसून की दस्तक के साथ खरीफ बुवाई, लेकिन किसानों की चिंता बरकरार

दलौदा क्षेत्र में मानसून की दस्तक के साथ खरीफ बुवाई, लेकिन किसानों की चिंता बरकरार

दलौदा।मालवा अंचल के प्रमुख कृषि क्षेत्र दलौदा एवं आसपास के गांवों में मानसून ने दस्तक तो दे दी है, लेकिन इस बार बारिश का मिजाज किसानों की चिंता बढ़ा रहा है। कहीं अच्छी बारिश हुई है तो कहीं अब भी खेत पर्याप्त पानी का इंतजार कर रहे हैं। असमान वर्षा के बावजूद किसानों ने हिम्मत नहीं हारी और खरीफ फसलों की बुवाई लगभग पूरी कर ली है। महंगे बीज, बढ़ती लागत और अनिश्चित मौसम के बीच किसान बेहतर बारिश की उम्मीद लगाए हुए हैं।
दलौदा क्षेत्र के अधिकांश गांवों में सुबह से शाम तक खेतों में ट्रैक्टर और कृषि यंत्रों की आवाजें सुनाई दे रही हैं। किसान खरीफ सीजन की प्रमुख फसल सोयाबीन के साथ-साथ उड़द, मूंग, मक्का और मूंगफली की बुवाई में जुटे रहे। क्षेत्र के लगभग 80 से 85 प्रतिशत खेतों में बुवाई का कार्य पूरा हो चुका है। किसान दयाराम पाटीदार ने बताया अब किसानों की नजर केवल समय पर होने वाली बारिश पर टिकी है।
हालांकि इस बार किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बारिश है। एक गांव में अच्छी वर्षा होने से खेतों में पर्याप्त नमी है, जबकि कुछ किलोमीटर दूर ही कई खेतों में बारिश कम होने से नमी की कमी बनी हुई है। ऐसे में जिन किसानों ने पहले ही बुवाई कर दी है, उन्हें बीज के अंकुरण की चिंता सता रही है।
मौसम की अनिश्चितता के साथ-साथ खेती की लागत भी किसानों की परेशानी बढ़ा रही है। इस वर्ष प्रमाणित बीजों के दाम पहले की तुलना में अधिक हैं।
आकोदड़ा के किसान श्याम लाल पाटीदार ने बताया, “महंगे दामों पर बीज खरीदकर बुवाई तो कर दी है, लेकिन अब अच्छी बारिश का इंतजार है। अगर अगले कुछ दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो बीज खराब होने और दोबारा बुवाई की नौबत आ सकती है।”
वहीं अन्य किसान आकोदड़ा के किसान राम नारायण धनगर ने बताया की फिलहाल दलौदा क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। अब पूरे क्षेत्र के किसानों की उम्मीदें केवल नियमित औ
अच्छी बारिश पर टिकी हैं। यदि आने वाले दिनों में मौसम मेहरबान रहा तो फसलों की बढ़वार अच्छी होगी और किसानों की मेहनत सफल हो सकेगी।




