न्यायमध्यप्रदेशरतलाम

धोखाधडी मामले में सेन्ट्रल बैक आफ इण्डिया,बडावदा, रतलाम के तत्कालीन प्रबंधक नेविल कावराना को 04 वर्ष का सश्रम कारावास व अर्थदण्ड  

धोखाधडी मामले में सेन्ट्रल बैक आफ इण्डिया,बडावदा, रतलाम के तत्कालीन प्रबंधक नेविल कावराना को 04 वर्ष का सश्रम कारावास व अर्थदण्ड  

 

न्यायालय : न्यायालय श्रीमान् संजीव कटारे विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988) रतलाम जिला रतलाम म.प्र.

पैरवीकर्ता : श्री कृष्णकांत चौहान, विशेष लोक अभियोजक (भ्रष्टाचार निवारण अधि नियम)  जिला रतलाम म.प्र.

आरोपी : 1. नेविल कावराना, उम्र 38 वर्ष,पूर्व तत्कालीन मुख्य शाखा प्रबंधक, सेन्ट्रल बैंक आफ  इण्डिया, शाखा बडावदा जावरा जिला रतलाम।

2. देवेन्द्र साण्ड, उम्र 50 वर्ष सर्विस प्रोवाईडर, सेन्ट्रल बैंक आफ इण्डिया, शाखा बडावदा जावरा जिला रतलाम (मृत)

3. खुर्शीद खोखरी कावराना, उम्र 30 वर्ष, निवासी रामदर्शन सोसायटी, भादकामकर, मुबंई, महाराष्ट्र।

4. कांता साण्ड, उम्र 70 वर्ष निवासी मकान नम्बर 86, सदर बाजार, बडावदा, जावरा, जिला रतलाम (मृत)

5. प्रीती सुधा साण्ड, उम्र 45 वर्ष, निवासी मकान नम्बर 86, सदर बाजार, बडावदा, जावरा, जिला रतलाम

6.यास्मिन कावराना, उम्र 80 वर्ष, निवासी रामदर्शन सोसायटी, भादकामकर, मुबंई, महाराष्ट्र

7.गुलनार कावराना, उम्र 30 वर्ष, निवासी बारडोली, आशीष बिल्डिंग, सुथान फलिया, जिला सूरत गुजरात

8.शहजाद मेहता उम्र 40 वर्ष निवासी बारडोली, आशीष बिल्डिंग, सुथान फलिया, जिला सूरत गुजरात 9. जीमी खोखरी उम्र 70 वर्ष निवासी के-22, हवाबाग, बस स्टेण्ड के पीछे, नवसारी, सूरत गुजरात।

रतलाम।आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ इकाई उज्जैन के विशेष प्रकरण क्रमांक 01/2020 में माननीय विशेष न्यायाधीश, विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) श्री संजीव कटारे द्वारा आज दिनांक 30.06.2026 को पारित अपने निर्णय में मुख्य आरोपी नेविल कावराना पिता जीजी कावराना, तत्कालीन मुख्य शाखा प्रबंधक, सेन्ट्रल बैंक आफ इण्डिया, शाखा बडावदा, जिला रतलाम को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 एवं 13(1)(क)(ख) 04-04 वर्ष, धारा 120बी एवं 409 भादवि में 04-04 वर्ष एवं धारा 420 भादवि में 03 वर्ष का सश्रम कारावास एवं अर्थदण्ड से दण्डित कर आरोपी को जेल भेजा गया। प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी कृष्णकांत चैहान, विशेष लोक अभियोजक (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के द्वारा की गई है।

प्रभारी उपनिदेशक अभियोजन/सहायक निदेशक अभियोजन, जिला रतलाम श्रीमती आशा शाक्यवार के द्वारा बताया गया कि श्री सुमित जैन, तत्कालीन शाखा प्रबंधक, सेन्ट्रल बैंक ऑफ इण्डिया शाखा बडावदा ने पूर्व प्रबंधक नेविल कावराना पर वर्ष 2012 से 2014 के मध्य अपनी पदस्थापना के दौरान छल-पूर्वक अपने पद का दूरूपयोग करते हुए, गबन कर स्वयं के खातें, परिजनों के खातों एवं बिजनेस फैसिलेटर देवेन्द्र कुमार सांड तथा उसके परिजनों के खातों में पहुंचाकर अवैध लाभ प्राप्त करने का आरोप शिकायत आवेदन दिया गया था।

उक्त गबन का खुलासा प्रकरण के मुख्य आरोपी नेविल कावराना के स्थानांतरण के पश्चात बडावदा शाखा में पदस्थ हुए नए शाखा प्रबंधक श्री सुमित जैन द्वारा की गई आंतरिक जांच एवं बैंक ई.ओ.डब्ल्यू. उज्जैन को भेजी गई विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट के आधार पर हुआ। उक्त जांच में पाया गया कि इस कृत्य में बैंक के बिजनेस फेसिलीटेटर देवेन्द्र सांड सहित कुल 9 सह-आरोपियों ने मिलीभगत कर बैंक के वित्तीय सॉफ्टवेयर और दस्तावेजों में हेरफेर की थी, जिसके बाद फरियादी सुमित जैन, तत्कालीन शाखा प्रबंधक, सेन्ट्रल बैक आॅफ इण्डिया द्वारा आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ उज्जैन को विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपकर यह आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया था।

विवेचना के दौरान यह तथ्य सामने आया कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक आरोपी नेविल कावराना ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बिजनेस फेसिलीटेटर आरोपी देवेन्द्र सांड एवं अन्य परिजनों के साथ मिलकर एक सुनियोजित वित्तीय घोटाले को अंजाम दिया था। प्रकरण के मुख्य आरोपी नेविल कावराना द्वारा क्षेत्र के भोले-भाले किसानों की सहमति और जानकारी के बिना उनके किसान क्रेडिट कार्ड व अन्य खातों से अवैध रूप से राशियां डेबिट (काट) ली जाती थीं। जिसे अपने स्वयं के एवं अन्य सहआरोपीगणों के बैंक खातों में जमा कर दी जाती थी। कृषकों एवं खाताधारकों के खातो से काटी गई राशियों से फसल बीमा कंपनियों (जैसे चोलामंडलम एम.एस. इंश्योरेंस, एल.आई.सी. ऑफ इंडिया) तथा शासकीय राजस्व मद (वसूली हेतु तहसीलदार) के नाम पर डिमांड ड्राफ्ट तैयार किए जाते थे। उक्त डिमांड ड्राफ्ट्स को संबंधित बीमा कंपनियों या विभागों को न भेजते हुए, मुख्य आरोपी नेविल कावराना द्वारा स्वयं ही उन्हें सिस्टम में निरस्त कर दिया जाता था। निरस्त की गई राशि को वह अन्य सहआरोपीगण अपनी पत्नी (खुर्शीद खोखरी कावराना), अन्य रिश्तेदारों (जिजी कावराना, जिमी खोखरी, गुलनाज कावराना मेहता, शहजाद मेहता, यास्मीन कावराना) तथा बिजनेस फेसिलीटेटर देवेन्द्र सांड व उसकी पत्नी प्रीति सांड के संयुक्त एवं निजी खातों में ट्रांसफर कर अवैध रूप से आहरित कर लेता था। मुख्य आरोपी नेविल कावराना द्वारा न केवल खाताधारकों, बल्कि बैंक के सेंड्री क्रेडिटर खातों तथा लाभ-हानि मद से भी अवैध रूप से राशियां को निकालकर कर स्वयं के एवं अन्य सहआरोपीगणों के खातों में जमा कराई गईं।

विवेचना में अपराध प्रमाणित पाए जाने पर आरोपी नेविल कावराना के विरूद्ध अभियोजन स्वीकृति प्राप्त कर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ उज्जैन द्वारा आरोपीगण मुख्य आरोपी नेविल कावराना, देवेन्द्र साण्ड, खुर्शीद खोखरी, कान्ता साण्ड, गुलनार कावराना, शहजाद मेहता एवं जीमी खोखरी के विरुद्ध अभियोग पत्र विशेष न्यायालय (भ्र.नि.अधि.) रतलाम में प्रस्तुत किया गया था।

जिसमें विचारण उपरांत विशेष न्यायालय (भ्र.नि.अधि.) रतलाम द्वारा मुख्य आरोपी नेविल कावराना, तत्कालीन शाखा प्रबंधक, सेन्ट्रल बैंक आफ इण्डिया, शाखा बडावदा, जावरा, जिला रतलाम को दोषसिद्ध किया गया एवं अन्य शेष आरोपीगणों को दोषमुक्त किया गया।

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