जनहित की लड़ाई लड़ने वाले पर ही कार्रवाई: अतिक्रमण हटाने वाले कय्यूम कुरैशी पर 50 हजार का जुर्माना*
50 साल पुराना अतिक्रमण हटाया, लेकिन शिकायतकर्ता ही बना आरोपी – राजस्व विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल
क़यामपुर- ग्राम क़यामपुर में जनहित का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें वर्षों पुरानी शासकीय जमीन से अतिक्रमण हटाने की पहल करने वाले शिकायतकर्ता कय्यूम कुरैशी को ही राजस्व विभाग द्वारा आरोपी बना दिया गया। इस कार्रवाई ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे क्षेत्र में प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, सर्वे नंबर 458 रकबा 16 आरी की शासकीय भूमि पर करीब 50 वर्षों से अतिक्रमण किया गया था। इस जमीन पर अतिक्रमणकर्ता द्वारा न केवल कब्जा किया गया था, बल्कि इमली के पेड़ों से वर्षों तक आर्थिक लाभ भी कमाया गया। इस पूरे मामले को जनहित में उठाते हुए कय्यूम कुरैशी ने राजस्व विभाग में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाया।
लेकिन हैरानी की बात यह रही कि जिस व्यक्ति ने शासन की मदद कर शासकीय भूमि को मुक्त कराया, उसी पर इमली का हरा वृक्ष गिराने का आरोप लगाते हुए 50,000 रुपये का जुर्माना लगा दिया गया। इस फैसले से ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है और लोग इसे अन्यायपूर्ण कार्रवाई मान रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति जनहित में आगे आकर अवैध कब्जे हटवाने में प्रशासन का सहयोग करता है, तो उसे प्रोत्साहन और सम्मान मिलना चाहिए, न कि दंडित किया जाना चाहिए। वहीं यह भी सवाल उठ रहा है कि 50 वर्षों से शासकीय भूमि पर अतिक्रमण करने वाले व्यक्ति पर क्या कार्रवाई की गई और क्या उस पर भी मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता के तहत जुर्माना लगाया गया या नहीं।
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह मामला प्रशासन की निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। लोगों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता को ही दोषी ठहराया जाएगा, तो भविष्य में कोई भी व्यक्ति जनहित के मुद्दे उठाने से पीछे हटेगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या राजस्व विभाग ने निष्पक्ष जांच की है या फिर कहीं न कहीं प्रभाव में आकर कार्रवाई की गई है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की पुनः जांच कर वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई की जाए और कय्यूम कुरैशी पर लगाया गया जुर्माना वापस लिया जाए।
अंततः यह मामला न केवल एक व्यक्ति के साथ हुए अन्याय का है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक संदेश भी है कि जनहित में आवाज उठाने वालों के साथ किस प्रकार का व्यवहार किया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या *कय्यूम कुरैशी* को न्याय मिल पाता है या नहीं।



