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सरस्वती शिशु मंदिर सामाजिक चेतना का केन्द्र बने – धनसिंह धनगर

सरस्वती शिशु मंदिर सामाजिक चेतना का केन्द्र बने – धनसिंह धनगर
मन्दसौर। ग्राम भारती जिला मन्दसौर द्वारा आयोजित नवीन आचार्य प्रशिक्षण वर्ग-2026 के अंतर्गत सरस्वती शिशु मंदिर, माल्या खेरखेड़ा में विमर्श सत्र का आयोजन किया गया। सत्र में “सरस्वती शिशु मंदिर सामाजिक चेतना का केन्द्र कैसे बने” विषय पर मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में श्री धनसिंह धनगर (कोषाध्यक्ष, ग्राम भारती मालवा एवं सचिव, अवंतिका प्रकाशन न्यास) उपस्थित रहे। इस अवसर पर श्री प्रभूलाल धनौरा (अध्यक्ष, ग्राम भारती मन्दसौर), श्री सुखलाल आँजना (वर्ग पालक) तथा श्री बगदीरामदास बैरागी (वर्ग संयोजक) की गरिमामयी सहभागिता रही।
अपने उद्बोधन में श्री धनगर ने कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर केवल शिक्षा प्रदान करने का केन्द्र नहीं है, बल्कि समाज में संस्कार, संगठन और राष्ट्रीय चेतना के निर्माण का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि विद्यालय का प्रत्येक आचार्य समाज के प्रति उत्तरदायी है तथा विद्यालय को समाज जीवन से जोड़कर सामाजिक जागरण का केन्द्र बनाया जा सकता है।
उन्होंने विद्यालय, परिवार एवं समाज के मध्य सशक्त समन्वय की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि शिशु मंदिरों के माध्यम से राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक मूल्यों एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का विकास किया जाना चाहिए। विद्यालय की गतिविधियों में समाज की सहभागिता बढ़ाकर उसे सामाजिक चेतना का केन्द्र बनाया जा सकता है।
विमर्श सत्र के दौरान प्रशिक्षणार्थियों ने विषय से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की तथा अपने विचार प्रस्तुत किए। यह सत्र सभी शिक्षार्थियों के लिए प्रेरणादायी एवं मार्गदर्शक सिद्ध हुआ। कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय वर्ग संयोजक श्री बगदीरामदास बैरागी द्वारा किया गया।
मन्दसौर। ग्राम भारती जिला मन्दसौर द्वारा आयोजित नवीन आचार्य प्रशिक्षण वर्ग-2026 के अंतर्गत सरस्वती शिशु मंदिर, माल्या खेरखेड़ा में विमर्श सत्र का आयोजन किया गया। सत्र में “सरस्वती शिशु मंदिर सामाजिक चेतना का केन्द्र कैसे बने” विषय पर मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में श्री धनसिंह धनगर (कोषाध्यक्ष, ग्राम भारती मालवा एवं सचिव, अवंतिका प्रकाशन न्यास) उपस्थित रहे। इस अवसर पर श्री प्रभूलाल धनौरा (अध्यक्ष, ग्राम भारती मन्दसौर), श्री सुखलाल आँजना (वर्ग पालक) तथा श्री बगदीरामदास बैरागी (वर्ग संयोजक) की गरिमामयी सहभागिता रही।
अपने उद्बोधन में श्री धनगर ने कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर केवल शिक्षा प्रदान करने का केन्द्र नहीं है, बल्कि समाज में संस्कार, संगठन और राष्ट्रीय चेतना के निर्माण का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि विद्यालय का प्रत्येक आचार्य समाज के प्रति उत्तरदायी है तथा विद्यालय को समाज जीवन से जोड़कर सामाजिक जागरण का केन्द्र बनाया जा सकता है।
उन्होंने विद्यालय, परिवार एवं समाज के मध्य सशक्त समन्वय की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि शिशु मंदिरों के माध्यम से राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक मूल्यों एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का विकास किया जाना चाहिए। विद्यालय की गतिविधियों में समाज की सहभागिता बढ़ाकर उसे सामाजिक चेतना का केन्द्र बनाया जा सकता है।
विमर्श सत्र के दौरान प्रशिक्षणार्थियों ने विषय से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की तथा अपने विचार प्रस्तुत किए। यह सत्र सभी शिक्षार्थियों के लिए प्रेरणादायी एवं मार्गदर्शक सिद्ध हुआ। कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय वर्ग संयोजक श्री बगदीरामदास बैरागी द्वारा किया गया।



