रतलामजावरा

बछोड़िया: ‘मौत के जाल’ में फंसी पोकलेन; बिजली विभाग की लापरवाही और चालक की चूक से दो खंभे झुके

रिपोर्टर जितेंद्र सिंह चंद्रावत जडवासा

बछोड़िया: ‘मौत के जाल’ में फंसी पोकलेन; बिजली विभाग की लापरवाही और चालक की चूक से दो खंभे झुके

रतलाम/पिपलोदा: विद्युत वितरण केंद्र सुखेड़ा की निरंतर अनदेखी के कारण आज रात करीब 11:30 बजे ग्राम बछोड़िया में एक गंभीर दुर्घटना घटित हुई। सड़क पर खतरनाक तरीके से नीचे लटक रहे हाई-वोल्टेज तारों में एक पोकलेन मशीन फंस गई, जिससे बिजली के दो खंभे पूरी तरह तिरछे होकर लटक गए हैं। इस घटना में बिजली विभाग की लापरवाही मुख्य रूप से सामने आई है, क्योंकि लंबे समय से इन तारों को सही करने की मांग की जा रही थी। वहीं, अंधेरे के कारण चालक की लापरवाही भी हादसे का एक कारण बनी, जिससे तारों का खिंचाव बढ़ा और खंभे झुक गए।

आज रात का घटनाक्रम:* फिर टली बड़ी अनहोनी

आज रात 11:00 से 11:30 के बीच जब क्षेत्र की बिजली बंद थी, तब यह हादसा हुआ。 यह एक बड़ा सौभाग्य रहा कि विद्युत आपूर्ति बंद थी, अन्यथा पोकलेन और डंपर पूरी तरह आग की चपेट में आ सकते थे और मौके पर मौजूद लोगों की जान जा सकती थी।

ग्रामीणों का कहना है कि विभाग पिछले दो वर्षों से इन जर्जर खंभों और लटकते तारों की शिकायतों को अनसुना कर रहा था। पत्रिका द्वारा पूर्व में भी दो बार इन खंभों की खराब स्थिति पर खबरें प्रकाशित की जा चुकी हैं, लेकिन विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था।

सिस्टम सुधार के लिए पत्रकार का ‘सत्याग्रह’: सुरक्षा नहीं, तो शुल्क क्यों?

क्षेत्र के जागरूक पत्रकार अर्जुन कुमावत ने विभाग की कार्यप्रणाली के खिलाफ एक कड़ा और नैतिक स्टैंड लिया है, जिसे उन्होंने पूर्व में ही अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया था।

उपभोक्ता अधिकारों के लिए संघर्ष: पत्रकार अर्जुन ने पिछले 12 महीनों से अपने घर के बिजली बिल का भुगतान एक ‘सांकेतिक विरोध’ के रूप में रोक रखा है। उनका स्पष्ट तर्क है कि ‘उपभोक्ता संरक्षण कानून’ के तहत विभाग सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बिजली देने के लिए बाध्य है, लेकिन जब विभाग जानलेवा लटकते तारों को ठीक करने में विफल है, तो उसे शुल्क वसूलने का भी कोई नैतिक अधिकार नहीं है。

पूर्व सूचना और पारदर्शिता: इस विरोध के बारे में उन्होंने विभाग के उच्च अधिकारियों को पहले ही सूचित कर रखा था कि जब तक गांव की जर्जर विद्युत व्यवस्था और सुरक्षा मानकों को दुरुस्त नहीं किया जाता, तब तक वे बिल जमा नहीं करेंगे। यह बिल न भरने की मंशा नहीं, बल्कि विभाग को उसकी जवाबदेही याद दिलाने का एक तरीका है।

विभागीय प्रताड़ना: पत्रकार का आरोप है कि इस लोकतांत्रिक विरोध और खबरें प्रकाशित करने के कारण विभाग के कर्मचारी बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के उनके घर की लाइट काट देते हैं और घर जाकर गाली-गलौज व डराने-धमकाने का काम करते हैं।

अधिकारियों का अड़ियल रवैया और संवेदनहीनता

JE भावेश कुमार की लापरवाही: सुखेड़ा विद्युत मंडल के जे.ई. भावेश कुमार का रवैया हमेशा से नकारात्मक रहा है। पत्रकार ने बताया कि उन्होंने कई बार जर्जर व्यवस्था पर चर्चा करनी चाही, लेकिन जेई ने कभी संतोषजनक जवाब नहीं दिया। 20-25 दिन पहले हुई एक व्यक्ति की मौत के मामले में भी उन्हें 2-3 बार कॉल किया गया, लेकिन उन्होंने फोन तक नहीं उठाया।

उच्च अधिकारियों द्वारा नंबर ब्लॉक: मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (181) की शिकायतों को बिना काम किए बंद करने पर जब एसई (SE) मनोज शर्मा को कॉल किया गया, तो उन्होंने भी समाधान देने के बजाय पत्रकार का नंबर ब्लॉक कर दिया।

विगत दिनों की बड़ी लापरवाही: अवैध कनेक्शन ने ली थी जान

यहाँ यह उल्लेख करना आवश्यक है कि करीब 20-25 दिन पहले विभाग की घोर लापरवाही के कारण करंट लगने से एक व्यक्ति की अकाल मृत्यु हो गई थी। आरोप है कि विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से दिए गए अवैध बिजली कनेक्शन ने एक हंसते-खेलते परिवार को तबाह कर दिया। इस पुरानी घटना और शिकायतों के बावजूद विभाग ने गांव की जर्जर व्यवस्था नहीं सुधारी, जिसका परिणाम आज की यह दुर्घटना है।

ग्रामीणों ने अब प्रशासन से मांग की है कि इन तिरछे हुए खंभों को तत्काल बदला जाए और गैर-जिम्मेदार अधिकारियों व अभद्र व्यवहार करने वाले कर्मचारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

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