आलेख/ विचारमंदसौरमध्यप्रदेश

धन्य है भानपुरा की पवित्र पावन भूमि जहां पूज्य शंकराचार्य परंपरा की अवांतर पीठ है 

प्रसंगवश….आद्य शंकराचार्य जयंती

++++++++++++++++++++++

धन्य है भानपुरा की पवित्र पावन भूमि जहां पूज्य शंकराचार्य परंपरा की अवांतर पीठ है 

-ब्रजेश जोशी

विचारक एवं वरिष्ठ पत्रकार मंदसौर 

मंदसौर जिले के वासियों के लिए यह बहुत ही गर्व और आनंद का विषय है कि हमारे जिले की पवित्र पावन भानपुरा नगर की भूमि पर आद्य शंकराचार्य परंपरा की अवांतर पीठ प्रतिष्ठापित है और आज शंकराचार्य जयंती के अवसर पर यहां पूज्य पाद शंकराचार्य स्वामी श्री ज्ञानानंद जी महाराज के सानिध्य में विविध आयोजन होने जा रहे हैं।

प्रसंग आदि शंकराचार्य जी के प्रगट उत्सव का है तो वास्तव में यह हम सभी के लिए कितना सौभाग्य है कि जब संपूर्ण भारतवर्ष में पूज्य आदि गुरु शंकराचार्य जी ने चार मठों की स्थापना की तो यह हमारे देश को सांस्कृतिक सूत्र में पिरोने का बहुत ही पवित्र प्रयोजन रहा। कालांतर में विस्तारित होकर अवांतर पीठ की प्रतिष्ठापना की गई और इस श्रृंखला में भानपुरा पीठ को प्रतिष्ठा पित किया गया।

आज आदि शंकराचार्य जी के जयंती के अवसर पर यह वर्णन करते हुए बहुत ही आनंद की अनुभूति हो रही है और मन भावों से भर रहा है। भानपुरा पीठ के प्रथम शंकराचार्य पूज्य ब्रह्मलीन स्वामी जी विश्वेश्वरानंद जी महाराज उनके पश्चात पूज्य ब्रह्म लीन स्वामी श्री सदानंद जी महाराज फिर पूज्यपाद स्वामी ब्रह्मलीन श्री सत्यमित्रानंद जी महाराज आपने सनातन धर्म धरा की राजधानी हरिद्वार में भारत माता मंदिर की स्थापना कर धर्म अध्यात्म और देश प्रेम की भावनाओं का संगम किया। उनके निवृत्तमान होने के बाद पूज्य पाद ब्रह्मलीन स्वामी श्री रामाश्रम जी महाराज आसीन हुए ओर उनके बाद पूज्य पाद ब्रह्मलीन स्वामी श्री दिव्यानंद जी तीर्थ महाराज भानपुरा शंकराचार्य पीठ पर आसीन हुए। आपने पीठ को सुविकसित सुव्यवस्थित और विस्तारित कर इस पवित्र स्थल को पूजनीय के साथ-साथ दर्शनीय भी बनाया। और वर्तमान शंकराचार्य परम पूज्य स्वामी श्री ज्ञानानंद जी तीर्थ महाराज श्री का सानिध्य इस संपूर्ण क्षेत्र अंचल और देश को प्राप्त हो रहा है।

शंकराचार्य जयंती पर हम आदि शंकराचार्य और सभी पीठों के पूज्य ब्रह्मलीन शंकराचार्य वृन्द और वर्तमान पूज्य शंकराचार्य वृंद के साथ ही भानपुरा पीठ के परम पूज्य शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के चरणों में सादर वंदन करते हैं।

वास्तव में सनातन परंपरा को संरक्षित और क्रियान्वित रखने में आदि शंकराचार्य के बाद उन्हीं की परंपरा ने निर्णायक और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और आज भी निभाई जा रही है। शंकराचार्य

पूज्य ज्ञानानंद जी तीर्थ महाराज अत्यंत ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी विद्वत प्रवर और सभी विषयों के परम ज्ञाता हैं।

आपकी वाणी को जब हम प्रवचनों के माध्यम से सुनते हैं तो आपके हर प्रवचन में कोई नई बात होती है जो सीखने और अनुकरण करने योग्य होती है। हम धन्य है ऐसे परम विद्वान संत शिरोमणि जो भानपुरा पीठ के पूज्य शंकराचार्य पद पर आसीन उनका सानिध्य हमें प्राप्त होता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
WhatsApp Icon
Whatsapp
ज्वॉइन करें
site-below-footer-wrap[data-section="section-below-footer-builder"] { margin-bottom: 40px;}