
अष्टापद जैन तीर्थ पर हर्ष उल्लास के साथ चढ़ाई ध्वजा, इक्षु रस से वर्षीतप पारने का हुआ आयोजन

किशनगढ़ तालठाकुर शंभू सिंह तंवर
। अक्षय तृतीया पर जावरा के समीप अष्टापद जैन तीर्थ पर संभावनाथ भगवान की ध्वजा विधि विधान के साथ साध्वी सुजेस्टा श्रीजी आदि ठाणा 2 की निश्रा में हर्ष उल्लास के साथ लाभार्थी सुशीला बाई कोलन परिवार द्वारा चढ़ाई गई, इसके बाद वर्षीतप के आराधकों एवं श्राविकाओ का बैंड बाजों के साथ परिसर में चल समारोह निकाला गया जो कार्यक्रम स्थल पर पहुंचा, वहां पर साध्वी सुजेस्टा श्रीजी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहां कि भगवान आदिनाथ ने कठिन तपस्या की, जहां भी गोचरी के लिए जाते थे तो हीरे जेवरात लेकर उनके सामने लोग खड़े हो जाते थे । लेकिन वे उन्हें नहीं लेते थे और वापस चले जाते थे, जब राजा श्रेयांश ने अपने पुराने भव को पहचानते हुए उनके सामने ईशु रस के 108 लोटे भरकर उन्हें वेहराने के लिए उनके सामने ले आए तब आदिनाथ भगवान ईशु रस से पारणा किया । तब से ही यह परंपरा आज तक चली आ रही है । आज एक वर्ष की कठिन तपस्या कर श्रावक श्राविकाओं ने वर्षीतप की आराधना की है, और आज अष्टापद तीर्थ में आदिनाथ के दरबार में यह पारणा उत्सव हो रहा है । अष्टापद तीर्थ मालवा की भूमि पर तीर्थ प्रेरिका श्री जिन शिशु प्रज्ञा श्रीजी ने इसकी संरचना कर आज यह तीर्थ विशालता का रूप ले चुका है ।
कार्यक्रम के दौरान इन सभी 10 तपस्वियों के पारणा कराने के लाभ बोली लेकर ज्योति अरोड़ा जावरा ने लिया वही ट्रस्ट मंडल द्वारा ध्वजा के लाभार्थी कोलन परिवार जावरा तथा पारणा के लाभार्थी ज्योति अरोड़ा का बहुमान किया गया ।
कार्यक्रम का संचालन सचिव रविंद्र सिंह श्रीमाल ने किया, साध्वी सुजेस्टा श्री जी को ट्रस्ट मंडल द्वारा कामली भी ओड़ाई गई इस दौरान ट्रस्ट मंडल के अध्यक्ष जयंतीलाल दख, संरक्षक आजाद सिंह ददढा, राजमल धारीवाल, डॉ सुरेश मेहता, कोषाध्यक्ष मनीष कोचर, सह कोषाध्यक्ष पंकज मेहता, कार्यकारिणी सदस्य सरदार मल चौरडिया, डॉ सुनील चोपड़ा एवं विपुल दख तथा ताल, आलोट, नीमच, दलोट, जावरा, रतलाम, इंदौर, रिंगनोद, रोजाना सहित आसपास के श्री संघ भी उपस्थित था।



