आलेख/ विचारमंदसौरमध्यप्रदेश

उनके कदम चल दिए मंच की ओर.. अन्दर की कला मानो बाहर आने को मचल उठी..

उनके कदम चल दिए मंच की ओर.. अन्दर की कला मानो बाहर आने को मचल उठी..

-ब्रजेश जोशी  वरिष्ठ पत्रकार मंदसौर

उन्हें खुशी मिली इतनी कि मन में ना समाई ओर फिर बरबस ही उनके कदम चल दिए मंच की ओर.. अन्दर की कला मानो बाहर आने को मचल उठी..।

जो आंखे हमेशा बस एक ही जैसा परिवेश देख देख के पथरा सी गई थी आज उन आंखों में खुशी भरी चमक थी। एक कलाकार ने उन्हें वो खुशी दी जो उन्हें पहले कभी नहीं मिली..।

नगर में ये नजारा पहली बार देखा गया। कॉलेज के कुशाभाऊ ठाकरे ऑडिटोरियम में सोमवार की शाम ऐसी यादें छोड़ गई जो कभी भुलाए ना भूलेगी।

प्रसंग था प्रख्यात गायक अनिल श्री वास्तव की सुरमयी सुहानी शाम का… जिसका आयोजन किया श्री जैन दिवाकर गुरु गौतम मुनि सेवा संस्था ने।

संस्था का सोच यह था कि वह वंचित वर्ग जिनका सहयोग तो सभी करते हैं लेकिन वो नैसर्गिक खुशी जो उन्हें मिलना चाहिए वह नहीं मिलती और यही खुशी उनके चेहरों पर देखना थी।

एक दिन पहले पशुपतिनाथ मेले के सांस्कृतिक मंच पर अमर गायक किशोर कुमार के स्वरों को हूबहू अपनी आवाज से गाने वाले अनिल श्रीवास्तव से संस्था के अध्यक्ष मनीष मारू पाताल लोक के संपादक ईश्वर रामचंदानी ओर डॉ. योगेंद्र कोठारी ने यह चर्चा की कि आप एक दिन और मंदसौर रुक जाएं एक शाम आपकी हमारे शहर के उन लोगों के नाम हो जाए जो कभी किसी समारोह में सबसे आगे कुर्सियों पर बैठे नहीं दिखते जो हमेशा सहानुभूति के पात्र ही माने जाते हैं लेकिन उन्हें सहज खुशी देने का कोई प्रसंग नहीं होता तो क्यों ना हम इन्हें वे खुशियां देवें अनिल श्रीवास्तव तो स्वयं एक बहुत ही संवेदनशील कलाकार हैं उन्होंने तत्काल स्वीकृति दी और सोमवार की शाम कुशा भाऊ ठाकरे ऑडिटोरियम में जम गई वह सुरीली सुहानी शाम।

इस वीडियो में हम देख रहे हैं अनिल जी के गीतों पर बच्चे,वृद्ध मानसिक बीमार महिलाएं दिव्यांग और मजदूर झूम झूमते नाचते …

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