नीमचमध्यप्रदेश

समाचार मध्यप्रदेश नीमच 03 मई 2026 सोमवार

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नीमच से उठी आवाज: मनासा में बन रहे स्विमिंग पूल को मिले राज्य-राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी


-कान्हा नेशनल पार्क में हुई प्रदेश स्तरीय बैठक में लिए गए कई बड़े फैसले, तैराकी खेल को नई दिशा देने की रणनीति तैयार
नीमच। मध्यप्रदेश तैराकी संघ की अहम बैठक मंडला जिले के कान्हा नेशनल पार्क में आयोजित हुई, जिसमें प्रदेशभर के पदाधिकारियों ने भाग लिया। नीमच जिला तैराकी संघ के अध्यक्ष अशोक मोदी ने जिले का प्रतिनिधित्व करते हुए मनासा में बन रहे स्विमिंग पूल को राज्य व राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी दिलाने का प्रस्ताव प्रमुखता से रखा।
विगत 27 अप्रैल को आयोजित इस बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए पदाधिकारियों ने तैराकी खेल की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। बैठक मप्र तैराकी संघ के अध्यक्ष पियुष शर्मा एवं सचिव जय वर्मा की मुख्य उपस्थिति में संपन्न हुई। नीमच के अध्यक्ष अशोक मोदी ने अपने संबोधन में मनासा में बन रहे स्विमिंग पूल को उज्जैन संभाग का सबसे बड़ा पूल बताते हुए इसकी विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस पूल की साइज 25 बाय 50 मीटर है, जो इसे राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए भी उपयुक्त बनाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि इस सुविधा का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो नीमच जिला बड़े खेल आयोजनों का केंद्र बन सकता है। बैठक में उपस्थित अन्य प्रतिनिधियों ने भी इस प्रस्ताव को सकारात्मक रूप से लिया और खेल अधोसंरचना को मजबूत करने पर सहमति जताई।
30 मई से 3 जून तक रीवा में होगी राज्य चैम्पियनशिप-
बैठक के बाद मध्यप्रदेश तैराकी संघ द्वारा 54वीं राज्य तैराकी चैम्पियनशिप की तारीख और स्थान तय कर जारी कर दिए गए हैं। यह प्रतियोगिता 30 मई से 3 जून 2026 तक रीवा स्थित मिहिर सेन तरणताल, सिविल लाइंस में आयोजित की जाएगी। इस निर्णय के बाद अब प्रदेशभर के खिलाड़ी निर्धारित तिथि के अनुसार अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देंगे।
वेब पोर्टल पर मिलेगी पूरी जानकारी-
संघ ने पारदर्शिता और सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह तय किया कि इस वर्ष की चैम्पियनशिप से संबंधित सभी नियम, दिशा-निर्देश और पॉलिसी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी। इससे खिलाड़ियों, कोच और जिला इकाइयों को एक ही स्थान पर संपूर्ण जानकारी उपलब्ध हो सकेगी और किसी भी प्रकार के भ्रम की स्थिति नहीं बनेगी।
चयन में टाइमिंग को प्राथमिकता-
खिलाड़ियों के चयन को अधिक प्रतिस्पर्धात्मक बनाने के उद्देश्य से नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत प्रतियोगिता में दूसरे स्थान पर आने वाले खिलाड़ी का चयन उनके प्रदर्शन के क्वालीफाई टाइम के आधार पर किया जाएगा, जिससे बेहतर प्रदर्शन करने वालों को ही आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।
मनासा को मिलेगा खेल मानचित्र पर स्थान-
नीमच जिला तैराकी संघ अध्यक्ष अशोक मोदी द्वारा मनासा में निर्माणाधीन स्विमिंग पूल को राज्य और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए विकसित करने की मांग रखी गई है। आधुनिक मापदंडों के अनुसार तैयार हो रहा यह पूल भविष्य में बड़े आयोजनों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है, जिससे जिले में खेल गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
प्रशिक्षण शिविरों की तैयारी-
तैराकी को सुरक्षित और तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए संघ ने सभी जिला इकाइयों के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने की योजना बनाई है। इन शिविरों में नए कोच और लाइफ गार्ड को प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे प्रतियोगिताओं के दौरान बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।
एफीलेशन फीस बढ़ाई गई-
संघ ने अपनी गतिविधियों को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए जिला तैराकी संगठनों की वार्षिक एफीलेशन फीस में वृद्धि का निर्णय लिया है। अब यह शुल्क 5000 रुपए से बढ़ाकर 10000 रुपए कर दिया गया है, जिससे भविष्य की योजनाओं को प्रभावी रूप से क्रियान्वित किया जा सके।

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एसीएस डॉ.राजेश राजौरा ने ली उज्जैन संभाग की समीक्षा बैठक:

उपार्जन में समय पर भुगतान और केंद्रों पर छांव-पानी के दिए निर्देश

नल-जल योजनाओं को तत्काल चालू करने,जलाशयों की मॉनिटरिंग व जरूरत पर निजी जलस्रोतों के अधिग्रहण के निर्देश

नीमच 02 मई 2026, अपर मुख्य सचिव डा.राजेश राजौरा की अध्यक्षता में आज उज्जैन संभाग की उपार्जन एवं पेयजल प्रदाय व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई। वीसी के माध्यम से हुई इस बैठक में संभागायुक्त श्री आशीष सिंह ,संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर्स एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

उपार्जन संबंधी निर्देश: अपर मुख्य सचिव डा. राजौरा ने उपार्जन प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए निम्न निर्देश दिए:

समय पर भुगतान: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार उपार्जन प्रक्रिया में किसानों का भुगतान निर्धारित समय-सीमा में सुनिश्चित करवाएं।

बुनियादी सुविधाएं: सभी उपार्जन केंद्रों पर पेयजल एवं छांव की पर्याप्त व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जाए।

सतत निरीक्षण: सभी संबंधित अधिकारी उपार्जन केंद्रों का सतत निरीक्षण कर उपार्जन की प्रक्रिया व्यवस्थित रूप से संचालित करवाएं।

पेयजल प्रदाय संबंधी निर्देश: ग्रीष्मकाल में पेयजल की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु एसीएस, डा.राजौरा ने निर्देशित किया:

गुणवत्ता जांच: पेयजल की सैंपलिंग नियमित रूप से की जाए।

जलाशय मॉनिटरिंग: सभी जलाशयों की लगातार मॉनिटरिंग की जाए।

बंद योजनाएं चालू करें: तकनीकी कारणों से बंद नल-जल योजनाओं को तकनीकी मदद प्रदान कर तत्काल चालू किया जाए।

वैकल्पिक व्यवस्था: जरूरत पड़ने पर निजी जलस्रोतों का अधिग्रहण कर पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। बैठक में नीमच जिले से कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा सहित जिला आपूर्ति अधिकारी एवं पीएचई विभाग के अधिकारी एवं सभी सीएमओ शामिल हुए।

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 सरकारी नीतियों से श्रमिकों में असंतोष ,सीटू ने गांधी वाटिका में मनाया मजदूर दिवस


नीमच। 1 मई 2026 मजदूरों का अंतरराष्ट्रीय त्यौहार मजदूर दिवस आज नीमच में भी सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन सीटू ने स्थानीय गांधी वाटिका मनाया। इस अवसर पर ट्रेड यूनियन के प्रमुख साथी उपस्थित थे। साथियों को संबोधित करते हुए कामरेड विजय बैरागी ने बताया कि मई दिवस की शुरुआत 1886 में अमेरिका के शिकागो शहर में मई महीने के पहले सप्ताह  में हजारों औद्योगिक मजदूरों द्वारा की गई हड़ताल से हुई थी। सड़कों पर आकर 8 घंटे का कार्य दिवस और कार्यस्थल पर सम्मानजनक व्यवहार की मांग पर किये गए रोष प्रदर्शनों से निपटने के लिए पुलिस द्वारा की गई गोलीबारी में कई मजदूर शहीद हुए थे । बाद में हिंसा फैलाने के मनघड़ंत आरोपों में मुकदमें चलाकर 6 श्रमिक नेताओं को मृत्यु दंड दिए गया था । तभी से दुनिया के श्रमिक अपने उन शहीद साथियों को याद करते हैं जिनकी कुर्बानियों से इस वैज्ञानिक और मानवीय दिनचर्या को अंतर्राष्ट्रीय स्वीकार्यता मिली कि आठ घंटे काम, आठ घंटे नींद और आठ घंटे परिवार के साथ बिताना।
कामरेड निरंजन गुप्ता राही ने कहा कि   1889 में पेरिस में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कम्युनिस्ट आंदोलन के आह्वान पर 1890 में 1 मई को पहली बार मई दिवस दुनिया भर में मनाया गया। तब से सभी देशों के श्रमिक इस दिन अपने -अपने शहरों में इकठ्ठे होकर  शोषण, उत्पीड़न और गैर बराबरी वाली व्यवस्था को  बदल कर श्रम का पूरा मूल्य गरीमामय जीवन व समतामूलक समाज की स्थापना के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता प्रकट करते हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता कामरेड किशोर जेवरिया ने अपनी बात रखते हुए कहा भारत के श्रमिक आंदोलन पूंजीवादी शोषण की समाप्ति, साम्राज्यवाद की नव उपनिवेशवादी आक्रामकता के साथ ही सांप्रदायिक और जातिवादी फूट पैदा करने वाले षडयंत्रों के खिलाफ अपनी एकता प्रदर्शित करते हैं। वे अपने शासकों द्वारा साम्राज्यवाद के साथ किये जा रहे समर्पण के विरोध में अपने देश की संप्रभुता की हिफाजत में खड़े होते हैं और युद्धों का विरोध करते हुए विश्व शांति के पक्ष में संकल्प लेते हैं।
कामरेड सुनील शर्मा ने कहा  ध्यान रहे कि 2026 का मई दिवस अपने आपमें अभूतपूर्व परिस्थितियों में आया है। हम देख रहे हैं कि राष्ट्रीय राजधानी के चारों ओर हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान यहां तक की मध्य प्रदेश  के औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में श्रमिकों का असंतोष सड़कों पर प्रकट होता देखा जा सकता है। आटोमोबाइल, गारमेंट उधोग, रिफाइनरी एवं पावर प्लांट आदि में काम करने वाले हजारों युवा श्रमिकों की दो मुख्य मांगें हैं। पहली न्यूनतम वेतन में वृद्धि और दूसरी आठ घंटे का कार्य दिवस कोई भी इन दोनों मांगों को अनुचित नहीं कह सकता।
नितेश यादव ने कहा कि अफसोस की बात है कि मानेसर, गुड़गांव, भिवाड़ी और नोएडा सिंगरौली में फूटे आक्रोश को शांत करने के लिए श्रमिकों की सुनवाई करने की बजाय उन पर पुलिस बल का प्रयोग किया गया है। बहुत सारे मजदूरों को चोटें लगी जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं ।अंधाधुंध गिरफ्तारी करके महिलाओं समेत बहुत सारे जेलों में डाल दिए गए हैं। इनमें  भारतीय न्याय संहिता की गंभीर आपराधिक धाराएं भी लगाई गई हैं। गिरफ्तार लोगों के परिजनों तक को सूचित नहीं किया गया जो उनकी तलाश में भटकते रहे हैं ।
कामरेड शैलेंद्र सिंह ठाकुर ने बात को आगे बढ़ते हुए कहा कि ऐसे श्रमिक विस्फोट अब और प्रदेशों में भी फैलते जा रहे हैं। पिछले दिनों ऐसी ही स्थिति पानीपत रिफाइनरी के श्रमिकों के आकस्मिक विस्फोट के रूप में भी देखने को मिली थी।  इसमें आश्चर्य नहीं कि सत्ता पक्ष ने, श्रमिकों के इस स्वत:स्फूर्त असंतोष के पीछे आतंकवादी ताकतों की साजिश बताकर श्रमिक असंतोष को सनसनीखेज दिखाने की कोशिश की,  लेकिन असंतोष की आग अभी भी आगे से आगे सुलग रही है। पश्चिम एशिया में साम्राज्यवादी युद्ध  के चलते पैदा हुए ऊर्जा संकट के कारण गुजरात व अन्य प्रदेशों से बडी़ संख्या में मजदूर पलायन कर गए हैं।
बीएसएनएल के साथी कैलाश चंद्र सेन ने कहा कि इस समय अमेरिका-इजराईल ने ईरान पर भयानक युद्ध थोपने का विनाशकारी कदम उठाने का जो दुस्साहस किया है उसका खामियाजा पूरे विश्व के आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। हमेशा की तरह पूंजीवादी सिस्टम अपने अंतर्निहित संकट के दृष्टिगत अपने मुनाफे की दर बनाए रखने हेतु संकट का बोझ किसान व मजदूर वर्ग के ऊपर डालने के रास्ते पर चल रहा है। हाल में गैस की कीमतें बढ़ने से, कंपनियों को अपने मुनाफे बनाए रखने के लिए श्रमिकों के काम के घंटे बढ़ाना एक मात्र आसान विकल्प दिखाई  देता है।
औद्योगिक मजदूर एकता यूनियन के मुकेश बाबा ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के श्रमिकों को खाड़ी युद्ध से ऊर्जा के दाम बढ़ने और बेतहाशा महंगाई के कारण 8-10 हजार रुपये के मामूली वेतन में गुजारा करना असंभव हो गया है। मकानों के किरायों में बढ़ोतरी, बच्चों की स्कूल फीस, स्वास्थ्य खर्च आदि को देखते हुए मजदूर अपना पेट काटकर भी परिवार का गुजारा नहीं चला सकते हैं।
राज्य सरकारों ने आंदोलन भड़कने के उपरांत हाबड़ -तोबड़ में कई सालों से लंबित न्यूनतम वेतन में जो वृद्धि की हैं वह न केवल अपर्याप्त हैं बल्कि उनका अनुपालन नहीं करवाया जाता है। इसके अलावा एक बड़ा हिस्सा ऐसा भी है जिसे “पीस रेट” के तहत लगाया हुआ है। संगठित क्षेत्र का यह ऐसा मजदूर है जो असंगठित है। इनकी कोई वैधानिक सामाजिक सुरक्षा नहीं है न ही दुर्घटनाओं से कोई सुरक्षा तथा बहुत ही जोखिमपूर्ण कार्य स्थितियों में इन्हें काम करना पड़ता है। नरेंद्र कमल वाले बताया कि शौचालय जाने की एवज में भी इनके पैसे काटे जाने जैसे अमानवीय व्यवहार की खबरें, 1886 की शिकागो जैसी हालात की याद ताजा करवा देती हैं । इस स्थिति में निर्मम शोषण के शिकार इन तबकों का संगठित होना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि नीमच और उसके आसपास के क्षेत्र में भी मजदूरों से 12-12 घंटे काम दिया जा रहा है कई औद्योगिक संस्थानों में आज तक न्यूनतम वेतन का एरियर भी नहीं दिया गया है।
आशा कार्यकर्ता सुनीता धाकड़ ने कहा कि नव -उदारवाद के दौर में कारपोरेट के मंसूबों के चलते वर्ष 2020 में सभी 29 श्रम कानूनों को हटाकर उनकी जगह पर चार श्रम संहिता (लेबर कोड) संसद में पारित कर दिए गए। तमाम मुख्य ट्रेड यूनियनों के तीखे विरोध के बावजूद 21 नवंबर 2025 में इन्हें लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी गई।
देश की सभी प्रमुख ट्रेड यूनियनों का मानना है कि चार श्रम संहिता लागू होने की स्थिति में काम के घंटों में वृद्धि होगी, यूनियनों का पंजीकरण करवाना बहुत कठिन होगा, हड़ताल करने पर दंडात्मक कारवाई की जा सकेगी, स्थाई रोजगार की बजाय ठेका प्रणाली का प्रचलन बढ़ेगा और श्रमिकों को लगाना व हटाना आसान होगा। यही नहीं बल्कि 300 तक श्रमिक संख्या वाले उद्योगों को श्रम विभाग की अनुमति के बिना मजदूरों को हटाने की छूट रहेगी। इस सबके चलते श्रम विभाग निरर्थक हो कर रह जाएगा और श्रमिकों की स्थिति कमोवेश बंधुवा मजदूर जैसी बनना निश्चित है। वैसे ही काम वेतन पर गुजारा कठिन हो रहा था और ऊपर से भयानक रूप से बढ़ती महंगाई ने जीवन और मुश्किल कर दिया है।
युवा किसान  नेता राधेश्याम नागदा ने कहा कि गौरतलब है कि  लेबर कोड के पक्ष में जैसी थोथी दलीलें दी जा रही हैं,  ठीक वैसी ही धूर्ततापूर्ण दलीलें तीन कृषि कानूनों के संबंध में भी दी गई थी जिन्हें किसानों ने आंदोलन करके वापिस करवाया था। स्वागत योग्य बात है कि इस समय मजदूरों के साथ किसान संगठन भी खड़े हो रहे हैं और कारपोरेट सांप्रदायिक गठजोड़ के खिलाफ देश भर में एकता स्थापित हो रही है। भविष्य में इस एकता के आशाजनक संकेत आएंगे। इस अवसर अरिजीत यादव, जितेंद्र वर्मा, चिंटू मित्तल, दीपक भट्ट, नीरज जोशी, मनोहर वर्मा इत्यादि साथी उपस्थित थे।

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नीमच में आंगनवाड़ी केंद्रों पर हुआ लाड़ली लक्ष्मी बेटियों का स्वागत

विधायक श्री दिलीप सिंह परिहार के आतिथ्य में मनाया लाड़ली लक्ष्मी उत्सव,

प्रमाण-पत्र वितरण के साथ बेटियों ने दी रंगारंग प्रस्तुतियां

नीमच 02 मई 2026, ‘लाडली लक्ष्मी उत्सव’ के अवसर पर शनिवार को नीमच जिले के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में उत्साहपूर्ण तरीके से मनाया गया। जिला प्रशासन एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के निर्देशन में आंगनवाड़ी केंद्रों को आकर्षक ढंग से सजाकर लाडली बेटियों और उनके अभिभावकों का सम्मान किया गया। परियोजना नीमच शहरी का मुख्य कार्यक्रम विधायक श्री दिलीप सिंह परिहार के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत लाडली बेटियों को तिलक लगाकर की गई। विधायक श्री परिहार ने बेटियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

प्रमाण पत्र वितरण: नव पंजीकृत लाडली लक्ष्मियों को योजना के प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

लाडली संवाद:आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने बालिकाओं और उनके माता-पिता को शिक्षा के महत्व एवं बाल विवाह जैसी कुरीतियों की रोकथाम के लिए जागरूक किया।

बेटियों ने किया संचालन: कार्यक्रम का संचालन लाडली लक्ष्मी बालिका तनुश्री पाठक ने किया । लाडली लक्ष्मी संगठन की अध्यक्ष बालिका पूर्वी ने किए गए कार्यों की जानकारी दी।

सांस्कृतिक प्रस्तुति: उत्सव के दौरान आंगनवाड़ी केंद्रों पर बेटियों ने गीत-संगीत और कविताओं की मनमोहक प्रस्तुति दी।

जिला कार्यक्रम अधिकारी सुश्री अंकिता पंड्या ने बताया कि नीमच जिले में लाडली लक्ष्मी योजना का लाभ पात्र बालिकाओं तक सुगमता से पहुंचाया जा रहा है। आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हर बेटी का स्वास्थ्य और शिक्षा का स्तर बेहतर हो। उपस्थित माताओं को लाडली लक्ष्मी योजना 2.0 के नए प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई, ताकि वे अपनी बेटियों के उच्च शिक्षा के सपनों को पूरा कर सकें।

कार्यक्रम के अंत में प्रभारी परियोजना अधिकारी श्रीमती दीपिका नामदेव ने आभार व्यक्त किया। जिले के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों पर हर्षोल्लास के साथ उत्सव मनाया गया।

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संवेदनशील पहल: रिनोवेशन से परेशान छात्राओं को कलेक्टर ने दिलाया नया आशियाना

पिछड़ा वर्ग पोस्ट मैट्रिक छात्रावास की बालिकाओं को मिली राहत,

आनंद विहार स्थित अ.जा. बालिका छात्रावास क्रमांक-1 में की गई आवास व्यवस्था

नीमच, 02 मई 2026। कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा की संवेदनशील पहल से पिछड़ा वर्ग पोस्ट मैट्रिक बालिका छात्रावास की छात्राओं की आवास संबंधी समस्या का तत्काल समाधान हो गया है।

समस्या का निराकरण: 36 नंबर स्कीम में संचालित पिछड़ा वर्ग पोस्ट मैट्रिक बालिका छात्रावास में मरम्मत एवं पुनर्निर्माण कार्य जारी होने के कारण छात्राओं को हो रही असुविधा को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर श्री चंद्रा ने तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश दिए। शनिवार को छात्राओं ने कलेक्टर से भेंट कर रिनोवेशन कार्य के कारण हो रही परेशानी बताते हुए अन्यत्र रहने की व्यवस्था करने की मांग की थी। कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला संयोजक को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

नई व्यवस्था: कलेक्टर के निर्देशानुसार पिछड़ा वर्ग पोस्ट मैट्रिक बालिका छात्रावास की सभी बालिकाओं के लिए आनंद विहार के पास संचालित अनुसूचित जाति बालिका छात्रावास क्रमांक-1 में आवासीय व्यवस्था की गई है।

जिला संयोजक, आदिम जाति कल्याण ने बताया कि कलेक्टर के निर्देशों के परिपालन में छात्राओं को तत्काल प्रभाव से नए छात्रावास में शिफ्ट कर समुचित सुविधाएं उपलब्ध करा दी गई हैं। अब छात्राएं सुरक्षित एवं सुविधाजनक वातावरण में रहकर अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगी।

कलेक्टर श्री चंद्रा ने कहा कि विद्यार्थियों की सुविधा एवं सुरक्षा जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। रिनोवेशन कार्य पूर्ण होने तक छात्राएं नए छात्रावास में रहेंगी।

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