
आलोट प्रशासन के खिलाफ कब फूटेगा गुस्सा जनता का ..?
भू-माफियाओं काॅलोनाइजरों, तथा अवैध निर्माणकर्ता व अवैध रिसोर्टकर्ताओ को नगर परिषद का संरक्षण प्राप्त……?
✍️ राजेन्द्र देवड़ा स्वतंत्र पत्रकार
आलोट- मध्यप्रदेश में ‘सुशासन’ के दावों के बीच रतलाम जिले की आलोट विधानसभा क्षेत्र से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। आलोट में प्रशासन की निष्क्रियता के चलते कई आलीशान ताबुत तथा महल तान दिये गए हैं। जिनके पास ना तो कोई अनुमति हैं ना ही कोई टीएनसीपी विभाग से अभिमत तथा नक्शा संशोधित कराए बिना निर्माण जारी है। यहां तों निंद जब उड़ती है सरकारी जमीन शुगर मिल कि भूमि पर केसे भू माफिया के नाम हों जाती तथा उस पर काॅलोनिया केसे काटी जाती है।
डबल इंजन सरकार में भी कार्यकर्ता लाचार
*देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में भाजपा की सशक्त सरकारें हैं। क्षेत्र में सांसद विधायक और नगर परिषद अध्यक्ष भी भाजपा के हैं इसके बावजूद आलोट का स्थानीय प्रशासन पूरी तरह बेलगाम हो चुका है। ऐसा प्रतीत होता है कि सब कुछ हमारा होने के बाद भी धरातल पर जनता की कोई सुनवाई नहीं है।
सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों का बोलबाला कोई सुनने वाला नहीं है किसी भी अवैध निर्माण की शिकायत कर दो कोई कार्रवाई नहीं होती है।शिकायतकर्ताओं को डराने-धमकाने का काम प्रशासन के अधिकारियों लग रहें है । जब भी कोई सजग नागरिक इन अवैध कब्जों की शिकायत करता है तो उसे कार्रवाई का आश्वासन देने के बजाय उल्टा डराया-धमकाया जाता है शिकायत गलत निकली तो तेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज की धमकी देकर चुप रहने का दबाव बनाया जाता है जो कि लोकतंत्र और पार्टी की शुचिता पर सीधा प्रहार है…..?*
आलोट एसडीएम कार्यालय से नोटिस जारी होने के बाद कार्रवाई हुई जांच होनी थी अब तहसीलदार सीएमओ पटवारी और नगर परिषद इंजीनियर की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच की जाए।भू-माफियाओं को संरक्षण देने वाले ऐसे मिल रही है ऐसे अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाना चाहिए।


