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बंगाल में 23-29 अप्रैल को मतदान, असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु में 9 अप्रैल को वोटिंग

बंगाल में 23-29 अप्रैल को मतदान, बाकी 4 राज्यों में 9 अप्रैल को वोटिंग

चुनाव आयोग ने रविवार को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव का ऐलान कर दिया।बंगाल में 23 व 29 अप्रैल को दो चरणों में, तमिलनाडु 23 अप्रैल को एक चरण में जबकि असम, केरल और पुडुचेरी में नौ अप्रैल को एक-एक चरण में चुनाव होंगे। नतीजे सभी राज्यों के चार मई को एक साथ ही आएंगे।

    बंगाल में 294 सीटों पर मतदान- 23 अप्रैल को 152 सीटों के लिए और 29 अप्रैल को 142 सीटों के लिए मतदान होंगे। , इस चुनाव में कुल 7 करोड़ वोटर हैं, जिनमें 3.6 करोड़ पुरुष वोटर और 3.4 करोड़ महिला शामिल हैं। यहां 1402 वोट थर्ड जेंडर के भी हैं।

पश्चिम बंगाल की कुल आबादी में मुसलमानों की संख्या लगभग 30 प्रतिशत है। राज्य विधानसभा में 294 सीटें हैं और लगभग 40 से 50 निर्वाचन क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण 24 परगना और बीरभूम जैसे जिलों में मुस्लिम आबादी सबसे अधिक है। इनमें से कई निर्वाचन क्षेत्रों में, मतदाताओं में से 50 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम हैं, जिससे चुनावी परिणामों को निर्धारित करने में उनका वोट एक महत्वपूर्ण कारक बन जाता है।

जिन पांच राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं, उनमें SIR के बाद तमिलनाडु से सबसे ज्यादा वोटर्स के नाम कटे हैं। चुनाव आयोग ने बताया कि 27 अक्टूबर 2025 को SIR प्रक्रिया शुरू होने के दौरान राज्य में कुल 6,41,14,587 वोटर थे। करीब चार महीने चली SIR में 74,07,207 लोगों के नाम हटाए गए हैं। राज्य में अब 5,67,07,380 मतदाता पंजीकृत हैं।

वहीं पश्चिम बंगाल दूसरे नंबर पर है जहां करीब 58 लाख लोगों के नाम कटे हैं। फिर केरल में 8 लाख, असम में 2 लाख और पुडुचेरी में सबसे कम 77 हजार लोगों के नाम SIR प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से हटाए गए। असम में स्पेशल रिवीजन (SR) कराया गया था।

5 राज्यों में चुनौती और मौजूदा स्थिति

असम- कांग्रेस ने किया 8 पार्टियों से अलायंस: राज्य में 10 साल से भाजपा की सरकार है। पार्टी तीसरे चुनाव की तैयारियों में जुटी है। पीएम मोदी 6 महीने में 3 बार राज्य का दौरा कर चुके हैं। यहां पार्टी ने 126 सीटों में से 100+ सीटें जीतने का टारगेट रखा है। असम में बांग्लादेश, घुसपैठियों/सीमा सुरक्षा, असमिया पहचान जैसे मुद्दे हैं। भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस ने 10 पार्टियों के साथ गठबंधन किया है। इसमें वामपंथी और क्षेत्रीय दल शामिल हैं।

पश्चिम बंगाल-ममता बनर्जी 3 बार से मुख्यमंत्री: 14 साल से CM ममता के सामने BJP मुख्य चुनौती है। 2026 के चुनाव में टीएमसी जीती तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। वे ऐसा करने वाली देश पहली महिला होंगी। जयललिता के नाम 5 बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। हालांकि, वह 1991 से 2016 तक अलग-अलग कार्यकाल (लगातार नहीं) में मुख्यमंत्री पद पर रहीं।

केरल- दक्षिण राज्य जहां लेफ्ट सत्ता में: देश का इकलौता राज्य है, जहां आज भी लेफ्ट सत्ता में है। यहां सत्ता बदलने की परंपरा रही है, लेकिन 2021 में वाम मोर्चा (LDF) ने इस ट्रेंड को तोड़ते हुए लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। कांग्रेस गठबंधन की कोशिश इस बार एंटी इनकम्बेंसी को कैश करानी की रहेगी।

वहीं, BJP अब तक केरल में एक भी विधानसभा सीट नहीं जीत पाई है। पिछले लोकसभा चुनाव में यहां उसने त्रिशूर लोकसभा सीट जीती थी। इसके अलावा दिसंबर 2025 में भी BJP ने पहली बार त्रिवेंद्रम (तिरुवनंतपुरम) नगर निगम का चुनाव जीता।

तमिलनाडु- भाजपा-कांग्रेस 60 साल से यहां सत्ता में नहीं: आजादी के बाद लगभग दो दशक तक यहां कांग्रेस की सरकार रही। 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हार गई और इसके साथ ही राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। 1967 के बाद से तमिलनाडु की राजनीति मुख्य रूप से AIADMK और DMK के बीच घूमती रही है।

 तमिलनाडु में एमके स्टालिन की अगुवाई में DMK की सरकार है, जो 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आई। पार्टी ने कांग्रेस, वीसीके और वामपंथी दल के साथ गठबंधन किया है। बीजेपी ने कई चुनावों में AIADMK जैसे दलों के साथ गठबंधन जरूर किया, लेकिन राज्य में उसकी अपनी सरकार नहीं रही।

पुडुचेरी- सबसे कम सीटों वाली विधानसभा: 2021 में कांग्रेस सरकार गिरने के बाद AINRC-BJP गठबंधन ने सत्ता हासिल की और एन. रंगास्वामी एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। यह पहली बार था जब BJP सत्ता में सीधे तौर पर भागीदार बनी। इस बार कांग्रेस DMK के साथ गठबंधन में वापसी की कोशिश कर रही है और सरकार गिरने के मुद्दे को एंटी-इनकम्बेंसी में बदलना चाहती है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि पांच राज्यों-यूटी में 17.4 करोड़ मतदाता हैं। यहां 824 सीटों पर चुनाव होने हैं। इन राज्यों में आज से ही आचार संहिता लागू हो गई है।

पश्चिम बंगाल में दो चरणों में वोट डाले जाएंगे। 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान होगा। वोटों की गिनती 4 मई को होगी। पोलिंग बूथों पर पर्याप्त इंतजाम रहेंगे। साथ ही सुरक्षा की सख्त व्यवस्था रहेगी। चुनाव आयोग के अनुसार, पश्चिम बंगाल में 6.44 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें पुरुष मतदाता 3.28 करोड़, महिला मतदाता 3.16 करोड़ और थर्ड जेंडर 1152 मतदाता हैं। अगर फर्स्ट टाइम वोटर (18-19 साल) की बात करें तो उनकी संख्या 5.23 लाख है। 20 से 29 वर्ष आयु वर्ग के वोटरों की संख्या 1.31 करोड़ है। 85 साल से अधिक उम्र वाले मतदाता 3.79 लाख हैं। दिव्यांग वोटरों की संख्या 4.16 लाख है। ईवीएम को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

2021 में इन सभी पांच राज्यों के चुनाव का ऐलान 26 फरवरी को किया गया था। पिछली बार बंगाल में 8 चरणों में चुनाव हुए थे।

असम में 3 और तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में सिंगल फेज में वोटिंग हुई थी। पांचों विधानसभाओं का कार्यकाल मई-जून में खत्म हो रहा है।

किस राज्य में कितने मतदाता और कब मतदान

राज्य कुल    मतदाता         मतदान कब
असम        2.50 करोड़     9 अप्रैल
केरल        2.70 करोड़     9 अप्रैल
पुडुचेरी      9.44 लाख      9 अप्रैल
तमिलनाडु   5.67 करोड़    23 अप्रैल
पश्चिम बंगाल 6.44 करोड़   23 अप्रैल (152 सीट) और 29 अप्रैल ( 142 सीट)

पांच राज्यों के होने वाले चुनाव में इस बार तमिलनाडु में पहली बार के सबसे अधिक 12.51 लाख मतदाता हिस्सा लेंगे। इनकी आयु 18 से 19 वर्ष के बीच है। वहीं असम में पहली बार के 5.75 लाख, बंगाल में 5.23 लाख, केरल में 4.24 लाख और पुडुचेरी में पहली बार के 23 हजार मतदाता शामिल होंगे।

किस राज्य में कितनी विधानसभा सीटें
  • असम- 125
  • केरल- 140
  • पुडुचेरी- 30
  • तमिलनाडु- 234
  • पश्चिम बंगाल- 294

चुनाव की तारीखों के ऐलान पर पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष सुवंकर सरकार ने कहा- चाहे चुनाव एक चरण में हो या दो चरण में, कांग्रेस का सिर्फ एक ही रुख है कि वैध मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाए जाने चाहिए।

बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा- हमारी मांग है कि 23 अप्रैल से पहले जिन 60 लाख वोटरों के नामों पर विचार किया जा रहा है, उन्हें स्पष्ट किया जाए। जब तक यह स्पष्ट नहीं होगा, तब तक यह चुनाव कैसे हो सकता है? मैं एक वैध मतदाता हूं, लेकिन मेरा नाम वोटर लिस्ट में नहीं है। मेरी चुनाव आयोग से मांग है कि सभी वैध मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में शामिल किए जाएं।

TMC सांसद कीर्ति आजाद ने कहा– भाजपा एक ऐसी पार्टी है जो हर बात पर शिकायत करती है और रोती रहती है। उसका मुख्य काम लोगों के बीच भ्रम और झूठ फैलाना है। हमारा सवाल है कि भाजपा को हार का सामना करने के लिए कितने चरण चाहिए। चाहे सात चरण हों, आठ चरण हों या दो चरण, उन्हें हार का सामना करना ही पड़ेगा।

इस न्यूज़ का किसी प्रकार संस्कार दर्शन टीम जिम्मेदार नहीं है प्राप्त जानकारी पर आधारित है वास्तविक जानकारी निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर देखे

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