एक्सपोज: पिपलियामंडी में ‘सरकारी लैंड माफिया’ सक्रिय? परिषद ने रची हाईकोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखाने की साजिश

एक्सपोज: पिपलियामंडी में ‘सरकारी लैंड माफिया’ सक्रिय? परिषद ने रची हाईकोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखाने की साजिश
पिपलिया मंडी (गोपाल मालेचा)-मध्यप्रदेश के वीआईपी विधानसभा क्षेत्र मल्हारगढ़ में सुशासन के दावों के बीच एक सनसनीखेज सच सामने आया है। पिपलियामंडी नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारी और रसूखदार जनप्रतिनिधि मिलकर ‘राजस्व चोरी’ और ‘शासकीय संपत्ति के गबन’ का नया मॉडल चला रहे हैं। करोड़ों की वह जमीन, जिसका मालिकाना हक तय करने के लिए खुद नगर परिषद हाईकोर्ट में गुहार लगा रही है, उसी जमीन को पीछे के दरवाजे से ‘प्राइवेट बिल्डरों’ और ‘पसंदीदा लोगों’ को परोसा जा रहा है।
डबल गेम’ खेल रही है नगर परिषद, नगर परिषद का दोहरा चरित्र देखिए- परिषद ने हाईकोर्ट में MCC 514/2024 लगाकर गुहार लगाई कि “हमें सुना जाए, यह मामला गंभीर है।” उसी समय से परिषद के अधिकारियों ने उसी विवादित भूमि पर दुकानों का ‘अघोषित आवंटन’ शुरू करने की प्रकिया को कर दिया। जब परिषद खुद मान रही है कि मामला कोर्ट में लंबित है, तो वह किस हैसियत से वहां टैक्स रसीदें जारी कर मालिकाना हक बांट रही है? यह सीधे तौर पर न्यायालय के साथ धोखाधड़ी है।
‘पट्टे’ की आड़ में ‘पेंट हाउस’ और दुकानों की तैयारी– पिपलियामंडी का यह मामला केवल एक जमीन का टुकड़ा नहीं है। 1940 का वह पट्टा जो ‘उद्योग’ के लिए था, उसे 2005 में कलेक्टर ने ‘शून्य’ घोषित कर दिया था। सूत्रों के मुताबिक, नगर परिषद के कुछ रसूखदार लोग इस सरकारी जमीन पर ‘निजी कमर्शियल दुकाने व कॉम्प्लेक्स’ की योजना बना रहे हैं। इसके लिए पुराने पट्टाधारियों के वारिसों के साथ मिलकर ‘बैकडेट’ में सांठगांठ की जा रही है, ताकि कोर्ट का फैसला आने से पहले ही जमीन पर ‘तीसरे पक्ष’ का कब्जा दिखाकर मामले को और उलझा दिया जाए।
‘खेल मैदान’ की फाइल दबाकर दुकाने बनाने का मोह – राजस्व विभाग ने जब 2005 में कब्जा लिया था, तब यह तय था कि इस जमीन का उपयोग जनहित में होगा। नगर परिषद ने जानबूझकर इस फाइल को ‘ठंडे बस्ते’ में डाल दिया। यदि यहाँ खेल मैदान बनता है, तो भ्रष्टाचार का रास्ता बंद हो जाएगा। इसलिए, परिषद इसे ‘व्यावसायिक उपयोग’ में बदलना चाहती है ताकि करोड़ों के वारे-न्यारे हो सके।
उपमुख्यमंत्री की साख दांव पर – क्षेत्र के विधायक और उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा की छवि एक ईमानदार नेता की है, लेकिन उनके ही क्षेत्र की नगर परिषद ‘लैंड स्कैम’ का केंद्र बन गई है। क्या उपमुख्यमंत्री उन अधिकारियों पर कार्रवाई करेंगे जो हाईकोर्ट में केस हारने के डर से अब जमीन को खुर्द-बुर्द करने में लगे हैं? कलेक्टर मंदसौर के पास इस जमीन का कब्जा है, फिर भी उनकी नाक के नीचे नगर परिषद अवैध रसीदें कैसे काट रही है? यह राजस्व विभाग बनाम नगर परिषद की सीधी लड़ाई है।
मामला ‘पद के दुरुपयोग’ का है। हाईकोर्ट में लंबित मामले के दौरान किसी भी संपत्ति का स्वरूप बदलना दंडनीय अपराध है। नगर परिषद जो टैक्स वसूल रही है, वह शासकीय खजाने के बजाय निजी जेबों में जाने का अंदेशा है, क्योंकि यह जमीन परिषद के ‘स्वामित्व’ में दर्ज ही नहीं है।


