किसान बन्ने सिंह चंद्रावत ने रसायनिक से नष्ट हुई खेती को जैविक खेती अपना कर पूर्न जीवित किया

किसान बन्ने सिंह चंद्रावत ने रसायनिक से नष्ट हुई खेती को जैविक खेती अपना कर पूर्न जीवित किया
आलोट। रतलाम क्षेत्र के ताल तहसील के गांव आक्या खुर्द निवासी किसान बनेसिंह चंद्रावत ने बताया कि वह विगत 15 वर्षो से जैविक खेती करते आ रहे है। जैविक खेती अंतर्गत वे 2 हेक्टेयर मे संतरे के पौधे, गेहूं, चना एवं राजमा की खेती कर रहे है। किसान बनेसिंह ने बताया कि बाजार से उन्हें डी ए पी ,यूरिया लाने की जरुरत नहीं पडती, वह स्वयं ही वर्मिंग कम्पोस्ट बनाकर उसका उपयोग करते है। बने सिंह किसान ने बताया कि प्रथम वर्ष उन्हें एक हेक्टेयर संतरे के बगीचे में लगभग 2 लाख की आमदनी हुई थी, द्वितीय वर्ष में उन्हें 6 लाख की आमदनी तथा तृतीय वर्ष में उन्हें व्यापारियों द्वारा लगभग 27 लाख आमदनी का अनुमान बताया गया। किसान ने संतरे की खेती में लगभग दो से चार गुना मुनाफा होने की बात कही। किसान बने सिंह ने बताया कि जैविक खेती से संतरे में लगभग एक पौधे में एक से दो क्विंटल फल प्राप्त होता है रासायनिक खेती के संबंध में उन्होंने बताया कि जिस खेत में उन्होंने रासायनिक खाद का उपयोग किया था वह पहले साल 5 लाख की संतरे की फसल प्राप्त हुई थी । दूसरे साल में दो लाख तथा अब ऐसी स्थिति हो गई है कि एक लाख की भी संतरे की खेती से आमदनी नहीं हो पायेगी।


