रतलाममध्यप्रदेश

गिरवी रखने वाले साहूकारों की बड़ी मुश्किलें, वर्षों पहले गिरवी रखे चांदी-सोने के आभूषणों को छुड़वाने पंहुच रहें ग्राहक

 

सोना चांदी के भावों में अप्रत्याशित वृद्धि से गड़बड़ाया बजट!

रमेश सोनी

रतलाम : सोने-चांदी के दामों में बढ़ोतरी से स्वर्ण व्यवसाय एक और बुरी तरह प्रभावित हुआ तो दुसरी और साहूकारों के गले की हड्डी वह ग्राहक बन रहें हैं जिन्होंने अपनी सोने-चांदी की रकमें आवश्यकता पड़ने पर ब्याज देने की हामी भरकर अपने आभूषणों को गिरवी रखे थे जिनकी समयावधि पूरी होने पर साहूकारों द्वारा ग्राहकों को कई मर्तबा तकाजा किया गया था लेकिन ग्राहकों ने या तो मोबाइल अटेंड नहीं किए इसके बाद जब साहूकारों के मुनिम तकाजा करने उनके घरों पर गए तब उन्हें अपमानित कर भगा दिया गया और बोल दिया गया था कि हमें अब रकम नहीं छुडवानी हैं तुम जानों और तुम्हारा काम, ऐसे में कई साहूकारों ने निर्णय लिया कि अब ग्राहकों ने मना ही कर दिया हैं तो क्यों न इन आभूषणों को बेचकर राशि खड़ी कर ली जाएं तो अपना मूल धन प्राप्त हो जाएगा और यदि और भाव घट गए तो हमें बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता हैं और यह सोचकर साहूकारों ने उसी दौरान उचित भावों को देखकर ग्राहकों द्वारा गिरवी रखे आभूषणों को गलवाकर बेच दिए। समय बितता गया और जब सोने-चांदी के भावों में उबाल आया और भाव ने आसमान छू लिए तब उन पलटे हुए ग्राहकों की नींदे खुली और घर पर अपने गिरवी रखे आभुषणों का आंकलन किया और दौड़ते-दौड़ते जा घमके साहूकारों के प्रतिष्ठानों पर इसके बाद साहूकारों ने मना किया तो लड़ाई झगडे और FIR दर्ज कराने की धमकियां देने के मामले देश-भर के सराफा बाजार के व्यापारियों के यहां सामने आ रहें हैं ऐसे में अब यह गिरवी रखने वाले ग्राहक साहूकारों के गले की हड्डी बन चुकें जो ना खाने के रहें और ना निगलने के…

बता दें कि सोना-चांदी के भावों में पिछले कई माह से रिकॉर्ड तेजी चल रही है। चांदी के भावों में हुई अप्रत्याशित तेजी से जहां व्यापारियों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं। वहीं लोगों का बजट भी गड़बड़ा गया है। सोना 1 लाख 40 हजार के आसपास तो चांदी 2 लाख 55 हजार के इर्द गिर्द चल रही हैं। ये भाव हर किसी की समझ से परे है।

इधर अंचल में किसान वर्ग चांदी की खरीदी अधिक करता है। शादी ब्याह व अन्य मांगलिक प्रसंगों पर चांदी की खरीदी इनके द्वारा अधिक की जाती हैं। लेकिन बढ़ते भावों से अब चांदी की खरीदी करना आसान नहीं है। कई लोगों ने शादी ब्याह तक अभी पेंडिंग रख दिए है तो कई लोगों ने आधे या उससे भी कम बजट में खरीदी कर काम निपटाने की कोशिश की है।एक किसान ने अपना नाम नहीं लिखने का कहते हुए बताया कि चांदी के भाव सुनते ही पसीने छूट रहें है। अब नई चांदी खरीदना सपने देखने जैसा लग रहा हैं और जरूरी काम कम बजट में निपटना मजबूरी हो गई हैं। सोने के भाव में भी तेजी होने से शौकिया सोना खरीदने वाले भी अब इस शोक से मुंह मोड़ते दिख रहें है। वह लोग कम भाव में तेजी-मंदी का खेल भी खेल लेते थे। मध्यमवर्गीय परिवार भी शादी ब्याह में सोने की खरीदी करने में संकोच कर रहें हैं। ये लोग भी अभी मांगलिक प्रसंगों को टालते दिख रहें है।

बड़े आभूषण तो ठीक पायल बिछुड़ी भी नहीं खरीद पा रही महिलाएं!

पायल, बिछुड़ी सुहाग की निशानी मानी जाती है। लेकिन सुहागिन महिलाओं के लिए इनको खरीदना भी आसान नहीं रहा। इनकी कीमतों में भी तीन से चार गुना बढ़ोतरी हुई है। जिसके चलते अब महिलाए आर्टिफिशियल ज्वेलरी से काम चला रही हैं। ऐसे में कई महिलाओं के सपने भी टूटे है।

व्यापारियों की बड़ी मुसीबतें….

भावों में हुई अनाप-सनाप तेजी से सराफा व्यवसायियों की मुसीबतें भी कई गुना बढ़ गई हैं। तेजी मंदी के दौर में उन्हें कई बार घाटा भी उठाना पड़ रहा है। बिक्री भी कम हो रही हैं। कुछ दुकानदारों का तो कहना है यही हालात रहें तो भविष्य में व्यवसाय बदलना पड़ेगा। इस व्यवसाय में पैर रखने वाले लोगों ने भी अभी अपने इरादे बदल दिए है।

रोजाना हो रहें विवाद, परेशान व्यापारी!

उधर गिरवी रखी रकमें छुड़ाने लोग अब दुकानों पर पहुंच रहें हैं। जो लोग दस से पंद्रह साल तक साहूकारों के यहां पड़ी रकमों को छुड़ाने नहीं जा रहें थे वे लोग भी अब साहूकारों के पास जाकर रकमें मांग रहें हैं। कई लोग ऐसे भी हैं जो पहले रकमें छुड़ा गए वे भी अब आकर जबरन रकमों की मांग कर रहें हैं। यह बात भी सामने आई कि कुछ लोग जबरन साहूकारों से रकम मांग रहें हैं जबकि उनके यहां कोई रकम उनकी नहीं है। ऐसी परिस्थितियों में कई बार विवाद की स्थिति निर्मित हो रही है। ऐसे में व्यापारियों में भय का माहौल बना हुआ है। कई व्यापारी तो दुकानों पर भी आना मुनासिब नहीं समझ रहें है। व्यापारियों ने बताया कि साहुकारी अधिनियम 1934 में संशोधन होना चाहिए क्योंकि इसमें सिर्फ ग्राहकों को सुरक्षा दी गई है। व्यापारियों का यह भी कहना है कि बैंक तो गोल्ड लोन और पर्सनल लोन आदि पर हर महीने ब्याज लेती है। जबकि व्यापारी ऐसा नहीं कर पाते हैं और वह बेचारे गिरवी रखने के बाद साल भर रकम नहीं छुड़वाई जाती तब जाकर ग्राहकों से तकाजा करते हैं जबकि बैंक में रखें स्वर्ण आभूषणों पर गिरवी रखने के दूसरे महीने से खाते में से सीधे ब्याज की राशि काट ली जाती हैं!

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