शामगढ़ में हल्की बूंदाबांदी के बीच हुआ रावण दहन, फिर जोरदार बारिश से मेला हुआ अस्त-व्यस्त

शामगढ़ में हल्की बूंदाबांदी के बीच हुआ रावण दहन, फिर जोरदार बारिश से मेला हुआ अस्त-व्यस्त
शामगढ़। नगर में विजयादशमी का पावन पर्व परंपरागत हर्षोल्लास और वैदिक रीति-रिवाज के साथ मनाया गया। नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती कविता नरेंद्र यादव एवं दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष निलेश संघवी की उपस्थिति में मंगलवार को सबसे पहले वैदिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई, जिसके पश्चात मुख्य रावण दहन का कार्यक्रम संपन्न हुआ।
*खुशनुमा मौसम के बीच हुई जोरदार आतिशबाजी*- रावण दहन के कार्यक्रम से ठीक पहले नगर में हल्की ठंडी हवाएं चलने लगीं, जिसने मौसम को बेहद खुशनुमा बना दिया। इस सुहावने मौसम के बीच आसमान सतरंगी आतिशबाजी से सराबोर हो उठा। हल्की बूंदाबांदी के बीच हुई इस जोरदार और आकर्षक आतिशबाजी ने उपस्थित जनसमुदाय का दिल जीत लिया। जैसे ही रावण के पुतले का दहन हुआ, पूरा मैदान “जय श्री राम” के जयकारों से गूंज उठा।
*अचानक आई तेज बारिश, भीगते नजर आए लोग-* रावण दहन का कार्यक्रम संपन्न होते ही अचानक मौसम ने करवट बदली और मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। जोरदार बारिश के कारण उत्सव का माहौल अचानक अस्त-व्यस्त हो गया। मैदान और मेले में मौजूद लोग खुद को बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की तलाश में भीगते हुए भागते नजर आए।
*छोटे गरीब व्यापारियों का हुआ नुकसान, भीगा सामान-* दशहरे के पावन अवसर पर नगर में भव्य मेले का आयोजन किया गया था, नगर परिषद शामगढ़ की शानदार व्यवस्थाओं के बीच जहाँ बड़ी संख्या में दूर-दराज से व्यापारी अपनी दुकानें लगाने पहुंचे थे। लेकिन रावण दहन के तुरंत बाद हुई इस तेज बारिश ने मेले के रंग में भंग डाल दिया। अचानक हुई बारिश के कारण मेले में आए व्यापारियों का बहुत सारा सामान बिकने से बच गया और सारा सामान भीग गया, जिससे दुकानदारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
*गले मिलकर दी दशहरे की बधाई-* मौसम की इस बेरुखी के बावजूद लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। रावण दहन के बाद दशहरे की सनातन परंपरा का निर्वहन करते हुए सभी नागरिकों ने एक-दूसरे को गले लगाकर पर्व की शुभकामनाएं दीं। वहीं युवाओं और बच्चों ने अपने से बड़ों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया और ‘सोना पत्ती’ भेंट कर सुख-समृद्धि की कामना की।



