भगवान को प्रणाम नहीं करोगे तो भगवान नाराज नहीं होंगे पर घर में बूढ़े माता-पिता की सेवा और उन्हें प्रणाम करोगे तो भगवान प्रसन्न हो जाएंगे- डॉ कृष्णानंद जी महाराज

*”**************************””””
चित्र में कथा में बालक ध्रुव कि श्री हरि नारायण कि भक्ति का रुपांतरण
सीतामऊ । श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिवस डॉ कृष्णानंद जी महाराज ने भगवान शिव की महिमा कपिल देव और बालक ध्रुव के चरित्र वृतांत का श्रवण कराया।
डॉ कृष्णानंद जी महाराज ने कहा कि जिसके मन में एकाकार हो जाता है अहंकार आ जाता हैं उसका अंत होना निश्चित है। और जिसने एक का अंत कर दिया और सच्चे मन से अपने इष्ट देव भगवान को स्मरण करते हुए अपनी भक्ति कर्म करता है उसे मेरे प्रभु नारायण का आशीर्वाद जरूर मिलता है।
डॉ कृष्णानंद जी महाराज ने कहा कि कोई भी कार्य दिखावे से करने पर सफलता नहीं मिलती है किसी भी कार्य को मन लगाकर करने से सफलता मिलती है आज हम दिखावे की भक्ति कर रहे हैं घर में और मंदिर में बैठकर भक्ति तो करते हैं पर मोह माया के प्रपंच अंदर आत्मा में चल रहे हैं ऐसे में भगवान नहीं मिलते हैं हमें भगवान से मिलना है तो दिखावे से दुर होकर एकांत में जाना पड़ेगा और अंतरात्मा से उसे पुकारना पड़ेगा ।
डॉ कृष्णानंद जी महाराज ने कहा कि भक्त मीराबाई तुलसीदास जी सूरदास जी की भक्ति सबने देखी उन्होंने अंतर्म आत्मा से परमात्मा को पुकारा और परमात्मा ने अपने दर्शन दिए। डॉ कृष्णानंद जी ने कहा कि हम भगवान की पूजा अर्चना करते हैं उन्हें भोग लगाते हैं पर भगवान भावना का भूखा है वह आपका लगाया हुआ भोग ग्रहण नहीं करता है पर भक्ति तो करमा बाई की जिसने भगवान नारायण को अपने हाथों से खिचड़ा खिलाया।
डॉ कृष्णानंद जी महाराज ने कहा कि भक्ति करो तो मेरे प्रभु की ऐसी करो कि उसकी भक्ति में रम जाओ और उसे अपने आप को समर्पित कर दो। ऐसी ही भक्ति कर्दम ऋषि ने भगवान की प्राप्ति के लिए की थी। भगवान ने दर्शन देकर कहा कि ऋषि वर मांगों वरदान। तो ऋषि वर ने कहा कि मैं आपका बन जाऊं और आप मेरे बन जाओ। कृष्णानंद जी महाराज ने कहा कि रिश्तेदार संसार के लोग कहे कि तू अपना है यह बहुत बड़ी बात नहीं हैं पर जब भगवान नारायण परमात्मा कहे कि तू अपना है तो यह बहुत बड़ी बात है। ऋषि वर की भक्ति से भगवान नारायण प्रसन्न होकर ऋषि कर्दम के घर कार्तिक शुक्ल पंचमी बुधवार को पुत्र के रूप में भगवान ने अवतार लिया और उस बालक का नामकरण कपिल रखा जो फिर कपिल मुनि हुए।
डॉ कृष्णानंद जी महाराज ने कहा कि किसी को अपना बनाना है तो घमंड अहंकार लोभ कपट सब को त्याग कर प्रेम भाव याद करते हुए और उसके साथ उसके घर जाना पड़ेगा। जिस प्रकार से हम पत्रिका लेकर निमंत्रण देने किसी मित्र रिश्तेदार के वहां जाते हैं वैसे ही प्रभु के पास उसके मंदिर जाते हैं तो निश्चित वह हमारे भाव को स्वीकार करेगा।
डॉ कृष्णानंद जी महाराज ने कहा कि घर परिवार मैं क्लेश नहीं हो सब आनंद में रहे इसके लिए हमें अपने भगवान कुलदेवता को केवल शादी ब्याह में बुलाने तक नहीं रखें उन्हें रोज धुप दीप लगाएं और अपने यहां बने भोजन का भोग लगा कर उस प्रसादी को सब पावन करें। डॉ कृष्णानंद जी ने बफेट भोजन को गलत बताते हुए कहा कि जिस प्रकार से भोजन बनाने वाली माताएं बहने खड़े होकर भोजन बनाती है और हम सब खड़े होकर भोजन करते आज हमारी जिंदगी भी खड़ी हो गई। पहले माताएं बहनें गीत भजन गाते हुए भोजन बनाते और सब बैठकर भोजन करते थे । डॉ कृष्णानंद जी महाराज ने कहा कि जीवन में हम किसी का साथ देंगे तो वह हमारा साथ देगा जिस प्रकार से भगवान नारायण करते हैं जी मैं तुझे पर दया करु तू मुझे याद कर। ऐसे ही जीवन में धन दौलत तो बहुत इकट्ठा कर लेने से नारायण प्रसन्न नहीं होते हैं नारायण तो कहता है कि तू किसी का भला कर के देख मैं तुझे लाभ ही लाभ प्रदान कर दूंगा।
डॉ कृष्णानंद जी महाराज ने कहा कि आज के समय में जिसके पास धन की कमी है वह गरीब नहीं है गरीब तो वह है जिसके पास धन है पर मन नहीं है। महाराज श्री ने एक उदाहरण के माध्यम से कहा कि एक गरीब ब्राह्मण प्रतिदिन मंदिर में जाकर भगवान की भक्ति में भाव विभोर हो जाता था 1 दिन उसकी पत्नी ने पूछा स्वामी रोज कहां जाते हो गरीब ने कहा मेरे मित्र से मिलने जाता हूं कुछ दिन बीतने के बाद पत्नी ने कहा हम बहुत गरीब हैं मित्र से कुछ मदद मांगो गरीब ने कहा जरूर मांगूंगा हर बार मंदिर जाता तो अपनी बात करना भूल जाता एक दिन उसकी पत्नी ने फिर जोर देते हुए कहा कि अपने मित्र से कुछ मदद क्यों नहीं लेते हो गरीब ने बात को ध्यान में रखते हुए अपनी धोती में एक गठान याद रखने के लिए बांध ली। पर फिर भूल गया गरीब की कन्या बड़ी हो गई और विवाह का दिन आ गया पर गरीब ने प्रतिदिन की तरह भगवान के मंदिर में भक्ति करना बंद नहीं की भगवान ने सोचा कि अब यह मुझसे कुछ नहीं मांग रहा । मुझे इसकी मदद के लिए जाना चाहिए और भगवान ने गरीब की पुत्री के विवाह की सामग्री जाकर प्रदान कि। कहने का अभिप्राय है कि हम किसी कि भक्ति सेवा निस्वार्थ भाव से करते हैं तो उसका एक न एक दिन प्रतिफल जरूर मिलता है।
डॉ कृष्णानंद जी महाराज ने कहा कि धन दौलत पद प्रतिष्ठा तो आती जाती रहती है इसका मनुष्य को कभी हंकार नहीं करना चाहिए एक बार दक्ष प्रजापति को देवताओं का राजा चुना गया राजा दक्ष प्रजापति अपने पद की प्राप्ति में मदहोश हो गया और उसमें बड़े छोटे का आदर भाव अहंकार के आगे विलोपित हो गया। कथा कहती है कि जिसने भी अहंकार किया उसका अंत निश्चित होता हैं। डॉ कृष्णानंद जी महाराज ने कहा कि भगवान महादेव कहते हैं कि शुभ कार्य शादी ब्याह बिन बुलाए नहीं जाना चाहिए पर जब कहीं मृत्यु हो जाए दुख का पहाड़ टूट पड़े संकट की घड़ी आ जाए या कथा हो भगवान के घर मंदिर बिन बुलाए जाना चाहिए। जिस प्रकार से माता सती अपने पीहर पिता राजा दक्ष के द्वारा आयोजित यज्ञ में बिन बुलाए जाने पर तिरस्कार मिला। ऐसे ही बिन बुलाए मेहमान की शादी ब्याह में नहीं जाना चाहिए वहां आव भगत सम्मान नहीं मिलता।
डॉ कृष्णानंद जी महाराज ने उपस्थित जनों से घर परिवार में संस्कारित वातावरण बनाने का आवाहन करते हुए कहा कि परिवार के सदस्य घर के बड़े बुजुर्गो को सम्मान प्रदान करें। भगवान को प्रणाम नहीं करोगे ओ भगवान नाराज नहीं होंगे पर घर में बूढ़े माता-पिता की सेवा और उन्हें प्रणाम करोगे तो भगवान प्रसन्न हो जाएंगे।
डॉ कृष्णानंद जी महाराज ने कहा कि लाख भक्ति कर लो पर माता पिता से प्रमाण पत्र आशीर्वाद और गुरु के ज्ञान के बिना भगवान की प्राप्ति नहीं हो सकती हैं जिस प्रकार से राजा उत्तानपाद एवं रानी सुनीति के पुत्र बालक ध्रुव को अपने माता पिता के आशीर्वाद से बाल रूप में ही भगवान की प्राप्ति हो गई थी।
डॉ कृष्णानंद जी महाराज ने कहा कि हमें कुछ पाना है तो छोटा बनकर बालक की तरह रहना पड़ेगा जिस प्रकार से रोते हुए बालक को हर कोई भी उठाकर उसे सहलाने की कोशिश करते है पर जो बड़ा है उसको रोते हुए मदद के लिए बहुत कम साथ देते हैं।
उपस्थित भक्त जनों के साथ अतिथि जनों ने गुरुदेव से प्राप्त किया आशीर्वाद –
कथा के अवसर पर खाटू श्याम ट्रस्ट समिति सुवासरा तथा पूर्व मंडल सीमेंट के सदस्यों एवं समाजसेवी डॉ परीक्षित कुमावत कांग्रेसी नेता गोविंद सिंह पंवार डॉ.गोवर्धन लाल दानगढ़ वरिष्ठ भाजपा नेता रुघनाथ सिंह काचरिया आदि भक्तजनों ने महाराज श्री को फूल माला बनाकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
कथा के पश्चात अज्ञात चोरों ने महिलाओं कि चेन लूटी-
दूसरे दिवस की श्रीमद्भागवत कथा के विराम के पश्चात प्रसाद लेकर मांगलिक भवन से बाहर निकली महिलाओं अज्ञात चोरों ने सोने की चेन लूट ली इस बार सीतामऊ पुलिस ने मौका मुआयना कर मामले को संज्ञान में लिया।
उल्लेखनीय की कथा के प्रथम दिवस डॉ कृष्णानंद जी महाराज ने उपस्थित सभी धर्म प्रेमी माताओं बहनों से आह्वान करते हुए कहा था कि यहां पर हम भगवत ज्ञान प्राप्ति आत्मा को परमात्मा से मिलाने जा रहे हैं । इसलिए कोई भी सोना चांदी महंगे आभूषण पहनकर नहीं आए।