हेल्थ/बीमा कम्पनियों के भ्रामक प्रचार को लेकर विधानसभा में नीमच विधायक परिहार ने की चिंता व्यक्त

हेल्थ/बीमा कम्पनियों के भ्रामक प्रचार को लेकर विधानसभा में नीमच विधायक परिहार ने की चिंता व्यक्त
नीमच। सोशल एवं प्रिन्ट मीडिया में विभिन्न बीमा कम्पनियों द्वारा लगातार भ्रामक प्रचार करके आम जनता को गुमराह कर अपने स्वास्थ्य बीमा उत्पाद बेचे जा रहे हैं। आम जनता से लाखों रूपए की वसूली के बाद भी उन्हें आवश्यकता पडने पर नियमों की जटिलताओं में उलझाकर उन्हें लाभ से वंचित कर दिया जाता है, जिससे हजारों स्वास्थ्य बीमा उपभोक्ता न्यायालय के चक्कर काट रहे हैं। सरकार को चाहिए कि इस सम्बंध में ऐसी कम्पनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। उक्त बात विधायक दिलीपसिंह परिहार ने अपने तारांकित प्रश्न क्र. 2158 के माध्यम से विधानसभा में उठाई। प्रश्नकर्ता विधायक श्री परिहार ने यह भी पूछा कि क्या प्रदेश की विभिन्न बीमा कम्पनियां, कोचिंग केन्द्र और अन्य कम्पनियों द्वारा भ्रामक प्रचार के माध्यम से उपभोक्ताओं को लूटा जा रहा है, यदि हां तो गत 1 जनवरी 2020 के पश्चात् प्रदेश में इन कम्पनियों के खिलाफ कब-कब, किस किस व्यक्ति ने कहां कहां पर शिकायत दर्ज कराई। प्रदेश में भ्रामक विज्ञापनों को लेकर शासन के क्या निर्देश हैं ? क्या प्रदेश में विभिन्न निजी बीमा कम्पनियां हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर 100 प्रतिशत केशलेस बीमे का दावा करती हैं और 41 प्रतिशत तक कटौती करती हैं ? यदि हां तो प्रदेश के विभिन्न उपभोक्ता न्यायालयों में उक्त अवधि में कितने प्रकरण दर्ज हुए हैं और कितनों का निराकरण माननीय न्यायालय द्वारा उपभोक्ता के पक्ष में किया गया ? उसकी जानकारी दें।
जिस पर संक्षिप्त समयावधि में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्दसिंह राजपूत द्वारा जानकारी में बताया गया कि 33 में से 27 प्रकरण उपभोक्ता के पक्ष में निराकृत किए गए हैं। इससे यह सिद्ध होता है कि बीमा कम्पनियां पूर्ण रूप से भ्रामक प्रचार कर उपभोक्ता का शोशण कर रही हैं। ऐसी कम्पनियों को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।
मंत्री श्री राजपूत ने जवाब में बताया कि बीमा अधिनियम केन्द्र सरकार से जुडा है। किन्तु राज्य शासन के उपभोक्ताओं का हित साधना हमारी सरकार का दायित्व है और हम इसे मजबूती से पूरा कर रहे हैं और करेंगे।