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हमें महात्माओं द्वारा किये गये कार्यो का अनुशरण करना चाहिए – डाॅ नारायण चैतन्यजी

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केशव सत्संग भवन में मनाया जा रहा है गीता जयंती महोत्सव
मंदसौर। नगर के केशव सत्संग भवन में गीता जयंती महोत्सव मनाया जा रहा है। जिसके अंतर्गत प्रतिदिन प्रसिद्ध संत डाॅ नारायण चैतन्यजी ब्रम्हचारी वृन्दावन धाम वालों के मुखारविंद भागवत गीता का वाचन किया जा रहा है। जिसे श्रवण करने के लिए बडी संख्या में धर्मालुजन पधार रहें है।
महोत्सव के तृतीय दिवस मंगलवार को संत श्री डाॅ नारायण चैतन्यजी ब्रम्हचारी ने बताया कि हमें महात्माओं द्वारा किये गये कार्यो का अनुशरण करना चाहिए। जिससे हमें भी जीवन में लगातार कुछ नया करने को मिलता रहे। अपने बताया कि महात्माओं द्वारा किये गये कार्यो में आशक्ति नहीं होती उनके कार्यो का अनुशरण कर हम भी उर्जावान बन सकते है।
धर्मसभा में आपने बताया कि भागवन गीता ने भी विज्ञान दिया है। उसे समझने की जरूरत है। आपने बताया कि ईश्वर का स्वरूप निर्मल सच्चिदानंद है और प्रत्येक मनुष्य के अंदर भी ईश्वर वास करता है अर्थात् मनुष्य भी सच्चिादानंद स्वरूपा है। लेकिन मनुष्य सांसारिक बंधनों में बंधा है इसलिए उस स्वरूप को पहचान नहीं पाता।
धर्मसभा में संत श्री डाॅ नारायण चैतन्यजी कहा कि हमें भागवात गीता का श्रवण कर उसके सार को अपने जीवन में उतारना चाहिए। आपने बताया कि सभी पुराणों और ग्रंथों में एक सन्यासी व्यक्ति गृहस्थ लोगों को उपदेश देते है। लेकिन सिर्फ भागवत गीता में ही एक गृहस्थ दूसरे गृहस्थ को उपदेश दे रहे है। सांसारिक कठिनाईयों को दूर करने के लिए भागवत सबसे सरल उपाय जिसका श्रवण प्रत्येक व्यक्ति को कर अपने जीवन में उतारना चाहिए ताकि आपका जीवन सुखमय और आनंदमय हो सकें। प्रवचनों के अंत में संतश्री के साथ सभी ने भजनों को गाया और फिर आरती कर प्रसाद वितरण किया गया।
इस अवसर पर जगदीशचंद्र सेठिया, मदनकुमार गेहलोत, विश्वनाथ शर्मा, आरसी पांडे,  पं शिवनारायण शर्मा, के एल सोनगरा, दिनेश द्विवेदी, महेश गेहलोत, मांगीलाल सोनी सहित बडी संख्या में महिला पुरूष उपस्थित थे।

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