मंदसौरमध्यप्रदेश
मंदसौर जिले के 8 नगरों में हजारों स्वयंसेवकों ने की कदमताल





सभी संचलन के वक्ताओं ने कहा ‘स्व’ की संकल्पना को लेकर स्वभाषा, स्वभूषा,स्वदेशी,स्वावलंबन,
पर्यावरण संरक्षण,सामाजिक समरसता,कुटुंब प्रबोधन,नागरिक शिष्टाचार के लिए समाज को जागृत करने का आह्वान किया। संघ का पथ संचलन समाज में शक्ति और अनुशासन का प्रतीक है।शक्ति के बगैर कोई भी राष्ट्र महान नहीं बन सकता , गत वर्ष भारत में स्वराज का 75 वा अमृत महोत्सव मनाया गया।
2047 में स्वराज के शताब्दी वर्ष में भारत को विश्व गुरु के सिंहासन पर आरूढ करना है। इसलिए देश के प्रत्येक नागरिक को देश के हित में एवं राष्ट्र के लिए जीना होगा। आज वैश्विक बाजारवाद एवं सांस्कृतिक मार्क्सवाद ने भारत की मूल संस्कृति व आत्मा को मिटाने का प्रयास किया है।भारत के प्रत्येक नागरिक को जातिगत भेदभाव को भुलाकर सामाजिक समरसता को बढ़ाना होगा,राष्ट्र निर्माण का यह कार्य हमें स्वयं के उदाहरण से ही करना होगा। आज भारत विश्व पटल पर अग्रणी देश है,ये विश्व गुरु होने के ही संकेत है। हम सभी आज के दिन अपने देश की उन्नति के लिए कार्य करने का संकल्प ले।देश के प्रत्येक व्यक्ति युवा,वृद्ध,बाल,मातृ शक्ति हम सभी को मिलकर अपनी भारत माता को परम वैभव पर पहुंचाना है।