Uncategorizedमंदसौर जिलासीतामऊ

अध्यात्मिक संदेश देते हुए श्री सतपाल जी महाराज की शिष्याएं ने कहा शरीर मन बुद्धि से बनी दस इंद्रियों पर विजय पाने का संकल्प लें साध्वी प्रभावती बाई

*****************************************

 

सीतामऊ- ग्राम मेरियाखेड़ी में आयोजित सत्संग समारोह में श्री सतपाल महाराज की शिष्याओं ने दिए प्रवचन हमारी चाह तो उत्तम है परंतु उसे पाने का जो प्रयत्न कर रहे हैं उसके मूल में ही भूल है हम अनित्य पदार्थों को नित्य समझ कर उनसे सुख लेना चाहते हैं शरीर हमारा है इससे सुख लें परंतु शरीर का क्या भरोसा ? इस शरीर पर गर्व किसलिए ? जब शरीर ही स्थिर नहीं है तो फिर शरीर को मिलने वाले पदार्थ विषय संबंध आदि कहां से स्थिर होंगे अस्थिर पदार्थों की तो बड़ी चिंता करते हैं परंतु हम वास्तव में क्या है यह कभी सोचते नहीं हम मकान के स्वामी है परंतु अपने को मकान समझते है हम अमर आत्मा है परंतु अपने को शरीर समझ बैठे हैं बस यही वह भूल है जिसने हमें सुख के लिए भटकना सिखाया उक्त आत्म कल्याणकारी प्रवचन ग्राम मेरियाखेड़ी में अभा सामाजिक व आध्यात्मिक संस्था मानव उत्थान सेवा समिति द्वारा आयोजित एक सत्संग समारोह में श्री सतपाल महाराज की परम शिष्या सुश्री प्रभावती बाई ने दिया संतश्री ने मातृभक्ति से ओतप्रोत मधुर भजन प्रस्तुत करते हुए कहा हमें इन नौ दिनों में शरीर मन बुद्धि से बनी दस इंद्रियों पर विजय पाकर यानी दशहरा मनाना है इंसान का शरीर तो सिर्फ मूर्ति है इसके भीतर जो जीवित शक्ति है वह ईश्वरीय चेतना है वही सच्चा ईश्वर है बड़ी संख्या में उपस्थित धर्म प्रेमियों को अपनी ओजस्वी वाणी में संत श्री ने कहा संसार की कोई भी वस्तु सुंदर और आनंद रूप नहीं है सुंदर और आनंदरूप एक परमात्मा ही है उसीके सौंदर्य का थोड़ा अंश प्राप्त होने से यह संसार सुंदर लगता है उस आनंदस्वरूप की सत्ता से चल रहा है इसलिए इसमें भी आनंद भासता है अतः हमें चाहिए कि संसार के पदार्थ जिसकी सत्ता से आनंद व सुख रूप भासते हैं उसी ईश्वर से अपना दिल मिलाकर भगवद आनंद प्राप्त करें साध्वी गौतमी बाई जी ने अपने उद्बबोधन में कहा आज के वैज्ञानिक युग में मानव आध्यात्मिकता से अधिक दूर होता हुआ मात्र भोग एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति हेतु ही अथक परिश्रम एवं चिंतन करता हुआ प्रतीत होता है परंतु अनेका नेक सांसारिक उपलब्धियां की प्राप्त होने पर भी मानव मन आज अतृप्त एवं अशांत है इस मौके पर उपस्थित संत श्री शारदा बाई ने भजन तन चलता फिरता मंदिर है भगवान इसी के अंदर है प्रस्तुत करते हुए कहा अंतरात्मा के भाव से ही भक्ति दृढ़ होती है मानव में महामानव बनने की योग्यता है हमने अपनी योग्यता को भुला दिया हम अहंकार से संसार में जी रहे हैं आज हम अपने कर्तव्यों से विमुख होते जा रहे हैं हम कर्महीन हो गए हैं जब तक हमें अपने वास्तविक स्वरूप का बोध नहीं होगा तब तक हम अपने जीवन में परम आनंद का अनुभव नहीं कर पाएंगे कार्यक्रम की शुरुआत में आश्रमवासी सेवक जगदीश जाधव ने ज्ञान भक्ति वैराग्य गुरु महिमा से ओतप्रोत मधुर भजन प्रस्तुत किए समिति के रुघनाथ सिंह धनगर रंगलाल धनगर किशनलाल बापू सिंह नाहर सिंह गुर्जर आदि दिनेश प्रजापति लसुड़िया ने संतों का पुष्पमालाओं से स्वागत किया कार्यक्रम का संचालन बलवंत सिंह राजपूत ने किया व आभार बालकृष्ण गुरुदेव व दिनेश प्रजापति ने व्यक्त किया विश्व शांति की प्रार्थना आरती प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
site-below-footer-wrap[data-section="section-below-footer-builder"] { margin-bottom: 40px;}