मंदसौरमध्यप्रदेश

जनजातीय समुदाय के विकास के लिए प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान की शुरूआत की

 विशेष समुदाय के विकास के लिए मुखर हुए सांसद गुप्ता द्वारा लोकसभा में पूछे प्रश्न के जवाब में जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके ने कहा
मंदसौर –  जनजातीय समुदाय के विकास के लिए मोदी सरकार द्वारा 10 वर्षो में कई विकास कार्य किए है। इन विकास कार्यो के साथ ही सरकार द्वारा कई योजनाएं संचालित की जा रही है। इसको लेकर सांसद सुधीर गुप्ता ने लोकसभा में प्रश्न किया। सांसद गुप्ता ने कहा कि देश में जनजातीय समुदाय से आने वाले स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती मनाई गई थी इस अवसर पर सरकार द्वारा जनजातीय समुदाय के लिए शुरू किए गए कार्यक्रम / परियोजना क्या है। सरकार ने देश में जनजातीय समुदाय के समावेशी और सतत् विकास की दिशा में कार्य करने के संबंध में विभिन्न हितधारकों और राज्य सरकारों के साथ कोई परामर्श किया है। देश के दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य देखभाल सुविधा, शिक्षा, आवास आदि में वृद्धि करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा की गई और की जा रही विभिन्न पहलु क्या है।
प्रश्न के जवाब में जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके ने बताया कि भारत सरकार ने वर्ष 2021 में 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में घोषित किया है। चौथा जनजातीय गौरव दिवस 15 नवंबर से 26 नवंबर, 2024 तक मनाया गया था। इसके अलावा, सरकार द्वारा 15 नवंबर, 2024 से 15 नवंबर, 2025 तक की अवधि को भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के रूप में मनाने को मंजूरी दी गई है, जिसका समापन 15 नवंबर, 2025 को 150र्वी वर्षगांठ समारोह के रूप में होगा।
उन्होने बताया कि वर्ष 2023-24 के दौरान, 18 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में रहने वाले 75 पीवीटीजी समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमन) शुरू किया गया था। मिशन का उद्देश्य 3 वर्षों में पीवीटीजी/पीवीटीजी बस्तियों को सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल और शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण तक बेहतर पहुंच, सड़क और दूरसंचार सम्पर्क, अविद्युतीकृत घरों का विद्युतीकरण और स्थायी आजीविका के अवसर जैसी बुनियादी सुविधाएँ प्रदान करना है। इन उद्देश्यों को 9 लाइन मंत्रालयों द्वारा कार्यान्वित 11 उपायों के माध्यम से पूरा करने की योजना है। इसके अलावा, पीवीटीजी आबादी को सरकार की अन्य पहलों/योजनाओं, जैसे आधार नामांकन, पीएम-जनधन नामांकन आदि से लाभान्वित करने के लिए आईईसी अभियान और लाभार्थी संतृप्ति शिविर भी चलाए जा रहे हैं।
धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान
उन्होने बताया कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान 2 अक्टूबर, 2024 को शुरू किया गया था। इस अभियान में 17 संबंधित मंत्रालयों द्वारा कार्यान्वित 25 उपाय शामिल हैं और इसका उद्देश्य 63,843 गांवों में बुनियादी ढांचे की कमी को पूरा करना, स्वास्थ्य, शिक्षा, आंगनवाड़ी सुविधाओं तक पहुंच में सुधार करना और 5 वर्षों में 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 549 जिलों और 2,911 ब्लॉकों में 5 करोड़ से अधिक जनजातियों को लाभान्वित करते हुए आजीविका के अवसर प्रदान करना है। इस अभियान का उद्देश्य जनजातीय बहुल गांवों और आकांक्षी जिलों में जनजातीय परिवारों के लिए संतृप्ति कवरेज को अपनाकर जनजातीय समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करना है।
प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान
प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) मिशन के कार्यान्वयन के लिए 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 8 प्रमुख क्षेत्रीय मंत्रालयों/विभागों और उनके समकक्ष विभागों के साथ आगे के रास्ते पर चर्चा करने के लिए 15 दिसंबर, 2023 को मंथन शिविर आयोजित किया गया था। शिविर में ग्रामीण विकास, पेयजल और स्वच्छता, शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, बिजली और जनजातीय आजीविका एवं बुनियादी ढांचे पर 8 क्षेत्रीय कार्यशालाएं शामिल थीं। इसके अलावा, मंत्रालय की चल रही योजनाओं की प्रगति और विजन 2047 के भाग के रूप में प्रस्तावित नई पहलों की समीक्षा के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के जनजातीय कल्याण विभागों के साथ 18 और 19 जुलाई, 2024 को एक कार्यशाला आयोजित की गई थी। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) के कार्यान्वयन के लिए रोडमैप पर चर्चा करने के लिए 17 संबंधित मंत्रालयों के साथ 27.09.2024 को एक और मंथन शिविर आयोजित किया गया था। इस शिविर में मिशन के तहत विभिन्न उपायों के कार्यान्वयन के लिए रोडमैप पर क्षेत्रीय कार्यशालाएँ भी शामिल थीं।
शिक्षा स्तर पर सुधार
उन्होने बताया कि सरकार द्वारा समुदाय के लिए और शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए भी कई योजनाएं संचालित की जा रही है। जिसमें अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति,  अनुसूचित जनजाति उम्मीदवारों के लिए राष्ट्रीय समुद्रपारीय छात्रवृत्तिया,  अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति (कक्षा ग्प् और उससे ऊपर),   अनुसूचित जनजाति के छात्रों की उच्च शिक्षा के लिए राष्ट्रीय अध्येतावृत्ति और छात्रवृत्ति सहित अन्ष्य योजना के तहत चयनित उच्च श्रेणी के सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों में प्रबंधन, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, कानून आदि जैसे पेशेवर क्षेत्रों में स्नातक/स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। सभी अजजा छात्र जिनके माता-पिता की वार्षिक आय 6 लाख रूपये से अधिक नहीं है और मंत्रालय द्वारा अधिसूचित ऐसे 252 संस्थानों में अध्ययन करने वाले छात्र छात्रवृत्ति प्राप्त करने के लिए पात्र हैं।

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