जो मिले उसमंे संतुष्ट हो जाना महात्मा की निशानी – संत श्री ज्ञानानंदजी महाराज

केशव सत्संग भवन में चल रहे है चार्तुमासिक प्रवचन
मन्दसौर। श्री केशव सत्संग भवन खानपुरा में चातुर्मास हेतु ज्ञानानंदजी महाराज हरिद्वार विराजित है। संतश्री द्वारा केशव सत्संग भवन में श्रीमद भागवत कथा के एकादश स्कंद का वाचन किया जा रहा है।
रविवार को धर्म सभा में संतश्री ज्ञानानंदजी महाराज ने बताया कि हमें अपने जीवन में हाथी, सृप और महात्मा से सीख लेना चाहिए यह जो मिलता है उसमें संतुष्ट हो जाते है। जीवन संतुष्टी सबसे बडी सफलता है आजकल हर व्यक्ति धन कमाने की होड और भौतिक सुख सुविधाओं के पीछे भागता जा रहा है लेकिन असली जीवन का आनन्द संतुष्टी में है। जिसके जीवन में संतोष होता है वह व्यक्ति सर्वाधिक सफल माना जाता है।
संतश्री ने भगवान श्री राम के जीवन के बारे में बताते हुए कहा कि उन्होने अपने जीवन में सर्वाधिक आदर्श स्थापित किये। आपने बताया कि रामायण से हमें यह सीख मिलती है कि जो होना होता है वो होकर रहता है लेकिन हर बात या हर घटनाक्रम कोई न कोई निमित्त या कारण जरूर बनता है जैसे भगवान राम को 14 वर्षो का वनवास देने के लिए कैकई और मंतरा निमित्त बनी।
सभा में संतश्री ने बताया कि हमें अपने जीवन में क्या मिलेगा और क्या नहीं यह सब कर्मो का निर्भर करता है। शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है जैसा कर्म करोगे वैसा फल मिलेगा।
धर्मसभा के अंत में भगवान की आरती उतारी गई और प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर केशव सत्संग भवन के अध्यक्ष जगदीशचंद्र सेठिया, मदनलाल गेहलोत, प्रहलाद काबरा, प्रवीण देवडा, इंजि आर सी पाण्डेय, पं शंकरलाल त्रिवेदी, पं शिवनारायण शर्मा, राव विजयसिंह, घनश्याम भावसार, दिनेश खत्री, भगवतीलाल पिलौदिया, कन्हैयालाल रायसिंघानी, उमेश सोनी, कृष्णगोपाल सोनी, शिवशंकर सोनी सहित बडी संख्या में महिलाएं पुरूष उपस्थित थे।