शिक्षक दिवस विशेष – आनंद कुमार, एक प्रेरणास्पद शिक्षक

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आनंद कुमार: एक प्रेरणास्पद शिक्षक
-लेखक – लोकेश हरदा (मध्यप्रदेश)
यह कहानी है एक ऐसे युवा की, जिनका नाम आनंद कुमार है, जो ने अपने गांव के शिक्षा सिस्टम में सुधार करने के लिए अद्वितीय कदम उठाया है । आनंद कुमार का जन्म पन्ना जिले के विक्रमापुरा पंचायत के पास ही हुआ है, और वे ददोलपुरा गांव में रहते है।
ददोलपुरा गांव की दूरी पन्ना से 35 किलोमीटर की है, और यहां आदिवासी समुदाय के बहुत सारे परिवार रहते है। पंचायत मुख्यालय से 1 किलोमीटर की दूरी पर गांव बसा हुआ है, लेकिन बरसात के मौसम में लोगों को इस छोटी सी पगडंडी से गुजरना पड़ता है। बरसात के महीनों में, बच्चों को स्कूल जाने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता है। ददोलपुरा गांव में सिर्फ 5वीं तक की शिक्षा मिलती है, और बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए विक्रमपुर पंचायत स्कूल जाना होता है। लेकिन कई बार इस स्कूल में समय पर शिक्षा नहीं मिलती है, और यह समस्या समुदाय के लोगों ने प्रशासन को सूचित की है।
यहीं पर आनंद कुमार की कहानी शुरू होती है। वे अपनी कॉलेज की पढ़ाई कर रहे है, लेकिन उन्होंने यह देखा कि उनके गांव के बच्चों को शिक्षा की आवश्यकता है, और वे उनकी इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए कुछ कर सकते हैं।
2020 में, उन्होंने अपने घर में समुदाय शिक्षण सेंटर खोल दिया, और रोज़ शाम को करीब 50 बच्चों को पढ़ाने लगे। वे न केवल अकेले पढ़ाते थे, बल्कि उन्होंने बच्चों को विभिन्न खेल विधियों, चित्रकला, और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से शिक्षा देते आ रहे है। आनंद कुमार की यह छोटी सा प्रयास से गांव के बच्चों की शिक्षा में महत्वपूर्ण सुधार ओर पहल तैयार हुई है। वे न केवल शिक्षा सामग्री जुटाने में सहायक रहे, बल्कि उन्होंने एक प्रेरणास्पद शिक्षक के रूप में बच्चों के जीवन में बदलाव लाने के प्रयास किये है ओर आज भी कर रहे है। इसके माध्यम से वे न केवल पढ़ लिख रहे है, बल्कि रचनात्मक सोच और समृद्धि की ओर बढ़े रहे है।आनंद कुमार ने अपने गांव के शिक्षा के स्तर को ऊंचा किया और उसके बच्चों के लिए नए दरवाजे खोले। उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि यदि कोई अपने संघर्षों के बावजूद अच्छी दिशा में कदम बढ़ाता है, तो वह अपने समुदाय के लिए बड़ा बदलाव लाता है।
लेखक – लोकेश हरदा (मध्यप्रदेश)