28 लोकसभा 8 राज्य सभा भाजपा सांसदों ने 58 गांवों लिए गोद, जिन सांसदों ने गोद लेने के बाद सांसद दुबारा गांव नहीं गए ?

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विकास के झंडा बरदार ज्योतिरादित्य सिंधिया गांव गोद लेना भूले- आप अध्यक्ष रानी अग्रवाल
मध्य प्रदेश में गांवों से सांसदों को बेरुखी और दूरी को लेकर आम आदमी पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष रानी अग्रवाल ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सांसदों से सवाल पूछा है कि आखिर सांसदों को गांवों के विकास और गांव के लोगों से क्या परेशानी है। आखिर क्यों सांसदों ने 5-5 गांव अबतक विकास के लिए गोद नही लिए? क्यों गांवों का विकास सांसद नहीं कराना चाहते हैं? उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में कुल 40 सांसद भाजपा और कांग्रेस के ही हैं। दोनों पार्टियों के सांसद ने गांवों को गोद लेकर उनके विकास में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। ये बेहद ही शर्मनाक है।
आम आदमी पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष और सिंगरौली महापौर रानी अग्रवाल ने कहा कि मध्य प्रदेश में 29 लोकसभा और 11 राज्यसभा सांसद हैं। हर सांसद को 5-5 गांव गोद लेकर उनका सर्वांगीण विकास कराना था लेकिन किसी भी सांसद ने गांवों को गोद लेने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने सिर्फ 3 गांवों को गोद लिया है, भोपाल सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने 2 और छिंदवाड़ा सांसद नकुलनाथ ने केवल 1 गांव ही गोद लिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 13 सांसदों ने एक भी गांव को गोद नहीं लिया। इन 13 सांसदों में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और वीरेंद्र कुमार भी शामिल हैं।
रानी अग्रवाल ने कहा कि हैरानी की बात तो ये है कि सांसदों ने जिन गांवों को गोद लिया है उनमें भी विकास काम नहीं हुए हैं। सांसद गोद लिए गांवों में एक- दो बार ही गए हैं। गोद लेने के बाद गांवों की ओर मुड़कर भी नही देखा।सांसदों के गोद लिए गांवों में विकास काम के प्रोजेक्ट अधूरे पड़े हैं। गांवों को सांसदों द्वारा नजरंदाज करने से अधिकारियों ने भी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।
आप की प्रदेश अध्यक्ष रानी अग्रवाल ने कहा कि आखिर मध्य प्रदेश के भाजपा और कांग्रेस के सांसदों को गांवों और गांव के लोगों से इतनी एलर्जी क्यों हैं।क्यों गोद लेने के बाद सांसद दुबारा गांव नहीं गए? क्यों सांसदों ने गांवों के विकास कामों को नहीं देखा और उन्हें पूरा क्यों नही कराया? कई सांसद तो गांव में जाना भी पसंद नही करते हैं, न ही उन्होंने गांव गोद लिया है।
रानी अग्रवाल ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस के सांसदों द्वारा गांव गोद न लिए जाने और गांव में न जाने से उनकी मानसिकता पता चलती है कि एसी कमरों में बैठने के आदी हो चुके सांसदों को गांव और गांव के लोगों से कितनी नफरत है।केवल वोट मांगने के लिए मजबूरी में ये सांसद गांवों में जनता तक पहुंचते हैं लेकिन चुनाव जीतने के बाद ये दर्शन भी नही देते। अबकी बार चुनाव में जनता ऐसे विधायकों, सांसदों को करारा जवाब देने वाली है।