पर्यावरण संरक्षण के महत्वपूर्ण कदम मिलकर अपनाये और पर्यावरण बचाये

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डेजर्ट फेलो – राकेश यादव
होशंगाबाद
आज जब मे सुबह अपने केम्पस से निकलकर बाहर मार्केट के तरफ सामान लाने जा ही रहा था | मेरे आगे रोड पर एक लम्बा जाम लगा हु था |कुछ लोग अपनी गाड़ियो के अंदर बैठे-बैठे लम्बे-लम्बे हार्न बजा रहे थे| वो हरनो की आवाज मनो जैसे दिमाग को खा रही हो,उन आवाजों को सुनकर ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे शांति इस जहा से ख़त्म हो गई हो,और अब बस चारो तरफ एक भयंकर सा आवाजों का युद्ध होने वाला है जो इस संसार को नष्ट कर देगा | मजह आज लिखने की वजह प्रदुषण है ? प्रदूषण एक ऐसी समस्या है जो मानव और पर्यावरण के लिए खतरा पैदा कर रही है। प्रदूषण कई प्रकार का होता है और इन्हें विभाजित किया जाता है वायु, जल, ध्वनि, जलवायु, और प्रक्षेपण आदि।
वायु प्रदूषण- वायु प्रदूषण में वायुमंडल में मौजूद विभिन्न धुएं, धूल, और गैसेस शामिल होती हैं जो मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को हानि पहुंचाती हैं। उदाहरण के रूप में, उच्च शहरी वायु प्रदूषण, गाड़ी का प्रदूषण, और औद्योगिक उपकरणों के उत्सर्जन से होने वाले प्रदूषण को शामिल किया जाता है। वायु प्रदूषण गंभीर समस्या है, खासकर शहरी क्षेत्रों में। इंडस्ट्रीज, वाहनों, बिजली उत्पादन, कृषि और राष्ट्रीय विद्युत उत्पादन केंद्रों से निकलने वाले जहरीले धुएं और गैसेज वायुमंडल में वायु प्रदूषण का मुख्य कारण हैं। कई शहरों में वायु गुणवत्ता परामर्श मानदंडों को पारित नहीं किया जाता है और इसका परिणामस्वरूप नागरिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। धुंधली हवा, स्मॉग, और श्वास तंत्र संबंधी समस्याएं आम हो चुकी हैं।
जल प्रदूषण – जल प्रदूषण जल स्रोतों, जैसे कि नदियों, झीलों, में विभिन्न पदार्थों या उपयोगिताओं के निकास के कारण होता है। इसमें जलमार्गों से विभिन्न विषाणु, जलयान्त्रिकीय उत्पादों, नियंत्रणहीन निकासी, और वृद्धि योग्य जीवाश्म शामिल होते हैं। जल प्रदूषण सतत जलस्रोतों और जलजीवन के लिए महत्वपूर्ण मानवीय स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है।जल प्रदूषण मे वृद्धि कर रहा है और यह नदियों, झीलों, और अंतःसागरों को प्रभावित कर रहा है। निकासी और अपशिष्टों की अनुचित प्रबंधन, औद्योगिक उपयोग, नगरीय निकासी, कृषि उपयोग, और जल संवर्धन की कमी के कारण जलमार्गों में विभिन्न विषाणु, जैविक जीवाणु, कीटनाशक, और अन्य प्रदूषक पदार्थों का मिलावट कर दिया जाता है। इससे पेयजल की कमी, जलस्रोतों का प्रदूषण, और जीवजंतुओं के मारक प्रभाव हो रहे हैं।
ध्वनि प्रदूषण– ध्वनि प्रदूषण आवासीय क्षेत्रों, व्यावसायिक क्षेत्रों, और सार्वजनिक स्थानों में उच्च ध्वनि स्तर के कारण होता है। यह जीवन की गुणवत्ता पर असर डालता है और मानवों को सुख-शांति से प्रभावित करता है। प्रमुख स्रोतों में शोर का उत्सर्जन वाहनों, उद्योगिक प्रक्रियाओं, विज्ञान और टेक्नोलॉजी के उपयोग से होता है। ध्वनि प्रदूषण बड़ी समस्या है, खासकर शहरी क्षेत्रों में। उच्च स्तर की ट्रैफिक, औद्योगिक गतिविधियां, व्यावसायिक क्षेत्रों में मशीनरी संचालन, निर्माण कार्य, और उपयोगमय इलाकों के पास बसस्थान या हवाई अड्डों की मौजूदगी के कारण ध्वनि स्तर अत्यधिक होता है। यह लोगों के शांति और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है, सपनों को प्रभावित कर रहा है और सामाजिक और मनोवैज्ञानिक समस्याओं का कारण बन रहा है।
जलवायु प्रदूषण – जलवायु परिवर्तन और विकास के कारण होने वाला प्रदूषण है। यह प्रदूषण जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, जलस्रोतों का प्रबंधन, और औद्योगिक उपयोग के कारण होता है। जलवायु प्रदूषण में मौसमी बदलाव, उच्च तापमान, अधिक वर्षा, और जलवायु बाधाएं शामिल होती हैं। जलवायु प्रदूषण गंभीर मुद्दा है, और यह अपने प्रभाव के कारण भारतीय मौसम को प्रभावित कर रहा है। जलवायु परिवर्तन, वन कटाई, अधिक वर्षा, और जलवायु बाधाएं जलवायु प्रदूषण के मुख्य कारण हैं। इसके परिणामस्वरूप मौसमी बदलाव, तापमान की बढ़ोतरी, मूसलाधार वर्षा, और जलवायु संकट सामान्य हो चुके हैं।
प्रक्षेपण प्रदूषण – प्रक्षेपण प्रदूषण उद्योग, यातायात, और ऊर्जा उत्पादन के कारण होता है। इसमें विभिन्न प्रदूषक द्रव्यों और उपयोगिताओं के उत्सर्जन के फलस्वरूप होने वाले वायुमंडलीय प्रदूषण, धुएं, गैसेज, और तत्वों का उच्च स्तर होता है। इसके अधिकांश कारक जल और वायु प्रदूषण के साथ संबद्ध होते हैं।भारत में प्रक्षेपण प्रदूषण की स्थिति भी चिंताजनक है। वाहनों, उद्योग, और ऊर्जा उत्पादन संबंधी क्षेत्रों के प्रयोग के कारण वायुमंडलीय प्रदूषण, धुएं, गैसेज, और अन्य प्रदूषक पदार्थों का उच्च स्तर होता है। इससे हवा की गुणवत्ता कम हो रही है और जीवजंतुओं और मानव स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
आओ मिलकर 20 प्रयासों को जीवन मे अपनाये
1- जलाशयों, नदियों और झीलों के प्रदूषित पानी का प्रबंधन करना।
2- वाहनों की प्रदूषण नियंत्रण के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करना और ग्रीन वाहनों को बढ़ावा देना।
3- उद्योगों और कारखानों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों का उपयोग करना।
4- वनस्पति को बढ़ावा देने के लिए पौधों का बागवानी करना।
5- जल बचाव के लिए नियमित तौर पर जल संचयन करना और वापसी का प्रबंधन करना।
6- सफाई सुविधाओं में जलयान्त्रिकीय उपकरण का उपयोग करना और स्वच्छता अभियान में भाग लेना।
7- नियंत्रित उपयोग और उत्सर्जन के साथ कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों में जल का प्रबंधन करना।
8-योग्य इंजन और उपकरणों का उपयोग करें जो कम प्रदूषण उत्सर्जन करते हैं।
9-पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें और व्यक्तिगत वाहनों का उपयोग कम करें।
10- जल संरक्षण के लिए सतत उपयोग करें और जल की बर्बादी को रोकें।
11- जलधाराओं को साफ और स्वच्छ रखें। जलस्रोतों में निकासी को नियंत्रित करें।
12-ध्वनि नियंत्रण कानूनों का पालन करें और शोर प्रदूषण करने वाले स्रोतों को संशोधित करें।
13-शोर प्रदूषण उत्सर्जन करने वाले उद्योगों के लिए शोर नियंत्रण उपकरणों का उपयोग करें।
14-ऊर्जा के स्रोत के रूप में विकल्पीकृत और नवीनीकृत ऊर्जा संसाधनों का उपयोग करें।
15-पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के लिए जागरूकता फैलाएं और समुदाय के साथ साझा करें।
16- जलवायु परिवर्तन से संबंधित जीवनशैली और उपयोग में परिवर्तन करें, जैसे कि पानी की बचत करें और बागवानी में विकल्पीकृत प्रणालियों का उपयोग करें।
17- अपनी खरीदारी में पर्यावरण सुरक्षित उत्पादों को पसंद करें।
18- स्थानीय निर्माण उपायोग करें और नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए उच्च गुणवत्ता और प्रदूषण नियंत्रित उपकरणों का उपयोग करें।
19- उपयोगिताओं की दोबारा प्रयोग और सामरिक उपयोग करने के माध्यम से प्रदूषण को कम करें।
20-पेड़-पौधों को बढ़ावा दें और हरितालिका योजनाएं समर्थन करें।