कर्मचारी संघनीमचनीमच

जिले के 10000 मजदूर किसानों ने की हड़ताल रैली निकाल कर ज्ञापन सौंपा

डॉ. बबलु चौधरी

नीमच। संयुक्त मजदूर किसान मोर्चा की ओर से जारी एक पेश विज्ञप्ति में सीटू यूनियन के किशोर जवेरिया, सुनील शर्मा, मुकेश नागदा इंटक के भगत वर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार केंद्र राज्य सरकार की मजदूर, किसान आमजन विरोधी नीतियों के चलते आज पूरे देश के मेहनतकश तबके को 16 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। नीमच जिले के 28 से अधिक संगठन के हजारों मेहनतकशो ने इसी तारतम्य में आज हड़ताल करते हुए मजदूर किसान और योजना गर्मियों जिनमें आशा- उषा- पर्यवेक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका, मनरेगा मजदूर मध्यान भोजनकमी,, किसान और औद्योगिक मजदूरों सहित विभिन्न विभाग के पेंशनर्स ने शहर के प्रमुख मार्ग गांधी वाटिका से 40 चौराहा से पुस्तक बाजार से घंटाघर, बारादरी, फवारा चौक, कमल बौक होते हुए 40 चौराहा तक एक रैली निकाली। रेडी के पूर्व गांधी वाटिका में हुई सभा को शैलेंद्र सिंह ठाकुर, यश लोहार, गायत्री खारोल, राजू पाटीदार आदि ने संबोधित किया। रैली के समापन पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन नायब तहसीलदार जागृति जाट को सौंपा। ज्ञापन में बताया गया है कि वर्तमान में केंद्र सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों की आम जनता गरीब मजदूर किसान विरोधी नीतियों से कॉर्पोरेट पूंजी मालामाल देश की जनता बेहाल है। फिर चाहे वे खेतों में हाड़-तोड़ मेहनत कर जनता के पेट में अन्न पहुंचाने वाला किसान हो या फिर फैक्ट्री, दफ्तर, सड़क, बिल्डिंग, आंगनवाड़ी कर्मी, आशा कर्मी, बस ट्रक आटो या फिर घर घर मेहनत करने वाला मजदूर हो, देश के लिए संपदा पैदा करने वाली मेहनतकश जनता आज बेहाल है। न उत्पादित अनाज का उचित मूल्य मिल रहा है और न मजदूर को मेहनत की कीमत। इन सब के ऊपर दिनों-दिन बढ़ती महंगाई की मार ने आम जनता की कमर तोड़ रखी है। केंद्र व प्रदेश में सत्तारूढ़ कॉरपोरेट सांप्रदायिक गठजोड़ के द्वारा बेशर्मी से राष्ट्रीय संपत्ति और वित्त को मुट्ठी भर निजी कॉरपोरेटों को सौंपा जा रहा है और भारतीय लोकतंत्र के सभी संस्थानों को पंगु बना दिया गया है तथा उन पर कब्जा किया जा रहा है। अब यह गठजोड़ समग्र रूप से मेहनतकश लोगों के जीवन और आजीविका पर लगातार बर्बर हमले कर रहा है और विभिन्न कानूनों, कार्यकारी आदेशों और नीतिगत अभियानों के माध्यम से आक्रामक रूप से श्रमिक विरोधी, किसान विरोधी और जन-विरोधी कदम उठा रहा है। यह संवैधानिक रूप से चुनी हुई राज्य सरकारों के अधिकारों को नकार रहा है। यह लोगों के विभिन्नों वर्गों के सभी लोकतांत्रिक दावों और असहमति की सभी आवाजों को दबा रहा है। सत्तासीन व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं का सांप्रदायिकरण करने, प्रशासनिक प्राधिकारियों और एजेंसियों का पूरी तरह से दुरुपयोग करने की खतरनाक योजना को जारी रखे हुए है। इस पृष्ठभूमि में संयुक्त किसान मोर्चा व ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मोर्चा ने लोगों के बीच सघन अभियान और उपरोक्त मांगें पूरी होने तक तीव्र संघर्ष के माध्यम से सांप्रदायिक कॉर्पोरेट गठजोड़ का मुकाबला करने और उसे हराने के लिए एकजुट होकर ऐतिहासिक जिम्मेदारी लेने का संकल्प दोहराया है। ट्रेड यूनियनों / फेडरेशनों / एसोसिएशनों और संयुक्त किसान मोर्चा का साझा मंच को संयुक्त और समन्वित कार्रवाइयों को जारी रखते हुए संयुक्तरूप से जमीनी स्तर पर कार्रवाई करना पड़ रही है। अभी हाल में नववर्ष 2024 का आगाज परिवहन क्षेत्र में कार्यरत ड्राईवरों व अन्य परिवहन श्रमिकों द्वारा भारतीय न्याय संहिता की धारा 06 (1) और (2) के तहत हिट एंड रन के आरोप पर 10 साल तक की कैद और 7 लाख तक के जुर्माने के काले कानून के खिलाफ ऐतिहासिक स्वतः दो दिन की हड़ताल करी है। आज हम सब देशभक्त राष्ट्र संगठन हम आपसे

अनुरोध करते हैं कि आप भारत के संविधान में निहित लोकतंत्र, फैडैलिजम, धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद के मूल सिद्धांतों पर होने जा रही इस हड़ताल व ग्रामीण बंद के मुख्य मांगों को पूरी करने के लिए उचित कार्यवाही करने की कृपा करें। हमारी मांगे निम्न है: श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन 26,000/- रुपये प्रति माह दी जाए। संगठित व असंगठित अर्थव्यवस्था में सभी को पेंशन और सामाजिक सुरक्षा दी जाए। प्रति माह 10,000/- रूपये की गारंटीकृत पेंशन सभी को दी जाए। कर्मचारियों व श्रमिकों नई पेंशन योजना निरस्त कर सभी को पुरानी पेंशन योजना को बहाल कर सुनिश्चित पेंशन दिया जाए। चार काली श्रम संहिताओं को निरस्त किया जाए। सभी श्रम कानूनों को सख्ती से लागू किया जाए। मध्यप्रदेश में 10 वर्ष से ज्यादा लंबित न्यूनतम वेतन में पर्याप्त वृद्धि की जाए। प्रदेश में श्रम कानून उल्लंघन के लिए ऑनलाईन व फीस वाली शिकायत व्यवस्था को समाप्त कर पूर्व की तरह ऑफलाईन व बगैर किसी फीस की व्यवस्था बहाल की जाए। स्थाई काम के लिए स्थायी नियुक्तियाँ की जाए। स्थाई काम का ठेकाकरण बंद हो। फिक्स टर्म एप्प्लॉयमेन्ट (निश्चित अवधि के रोजगार ) की व्यवस्था को खत्म किया जाए। गारंटीशुदा खरीद के साथ सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 6) C2+50% की दर से सुनिश्चित की जाए। अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त किया जाए और उन पर मामला दर्ज किया जाए। एलएआरआर अधिनियम 20/3 (भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनस्र्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 20/3) को लागू किया जाए। ऋणग्रस्तता से मुक्ति के लिए छोटे और मध्यम किसान परिवारों को व्यापक कर्जा माफी की जाए। आईपीसी/सीआरपीसी में किए गए कठोर संशोधनों को निरस्त किया जाए। नए शुरू किए गए भारतीय न्याय संहिता की धारा 06 (1) और (2) को खत्म किया जाए। परिवहन क्षेत्र में कार्यरत ड्राईवरों व अन्य श्रमिकों को सभी अधिकार सुनिश्चित किए जाए। मौलिक अधिकार के रूप में रोजगार की गारंटी दी जाए। समान काम का समान वेतन सुनिश्चित किया जाए। योजना कर्मियों (आंगनवाड़ीकर्मी, आशाकर्मी, मनरेगाकर्मी, मध्यान्हभोजन कर्मी, नलजल चालक) को स्थायी सरकारी कर्मचारी के समान वेतन व लाभ दिया जाए। रेलवे, रक्षा, बिजली, कोयला, तेल, इस्पात, दूरसंचार, डाक, परिवहन, हवाई अड्डे, बंदरगाह और गोदी, बैंक, बीमा आदि सहित सार्वजनिक उपक्रमों का कोई निजीकरण नहीं किया जाए। शिक्षा और स्वास्थ्य का निजीकरण नहीं हो। प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष 200 दिनों के काम और 606/- रुपए दैनिक वेतन के साथ मनरेगा को मजबूत किया जाए। शहरी गरीबों के लिए रोजगार गारंटी की शुरुआत की जाए। निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड की तर्ज पर असंगठित श्रमिकों की सभी श्रेणियों के लिए कल्याण बोर्ड बनाया जाए। नया बिजली कानून वापस लिया जाए। अफीम के नए 50,000 पट्टे दिए जाए। सीपीएस पद्धति बंद की जाए। अफीम के जो पट्टे काटे गए हैं वह 1990-91 से बिना शर्त बहाल करो। अफीम और डोडो का उचित मूल्य दिया जाए अफीम की फसल का भी प्रधानमंत्री बीमा योजना का लाभ दिलाया जाए। अफीम और डोडो की प्रोसेसिंग निजी हाथों में नहीं दी जाए। अफीम प्रसंस्करण का काम सरकारी हाथों में ही रहे। सीसीआई नयागांव सीमेंट प्लांट को सरकारी क्षेत्र में वापस चालू करो। चंबल गांधी सागर डैम का पानी नीमच नगरवासियों के लिए भी उपलब्ध कराओ। इन्टीग्रेटेड मोबीटेक फैक्ट्री ग्राम गिरदौड़ा जिला नीमच से जबरिया निकाले गये मजदूरों को वापस काम पर लिया जावे।

इस अवसर पर मुकेश बाबा, कृष्णा काटे, कृपाल सिंह मंडलोई, वीणा पथरोड, भोपाल सिंह राठौड़, रेखा व्यास, मंजू सक्सेना, सूरजमल आर्य, दिनेश जोशी, काजी नुरुल हसन, रफीक खान, श्यामदास बैरागी, पंकज नागदा, बालमुकुंद भास्कर, मनोज जायसवाल, साहिल खान, कांता अहीर, मधु वर्मा, सुषमा गुप्ता, लीला किलोरिया, अनीता शर्मा, राकेश वर्मा, नरेंद्र कमलवा, राम प्रसाद बोराणा छाया शुक्ला सहित हजारों आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा और मजदूर किसान उपस्थित थे।

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