सिर्फ कप्तानी निर्देश ओर कागजी पुलिसिंग पर फोकस छोटे अपराधों को अनदेखा करने के चलते लगातार बढ़ रही जिले में गंभीर अपराधों की संख्या…।

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सिर्फ तस्करों तक सीमित रह गई कप्तानी पुलिसिंग…!
हत्या,अपरहण से लेकर छोटे अपराधों में अंकुश लगाने में नाकाम पुलिस,पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार अपराधों में अव्वल रहा मंदसौर
बलवंत भट्ट
मंदसौर :- जिले में पुलिस कप्तान बदलने के बाद उम्मीद लगाई जा रही थी की अब सबकुछ बदल जाएगा। लगातार बढ़ते अपराधों पर अंकुश लगेगा अपराधियों ने भय पैदा होगा। चोरियों से लेकर हत्याओं अपरहण सहित अन्य गंभीर अपराधों में कमी आएगी साथ ही मादक प्रदार्थों के मामले में वसूली का दाग झेल रही खाकी भी बेदाग होती हुई नजर आएगी। लेकिन जिले में सेटिंग वाली तस्करी को छोड़ दे तो वर्तमान में कुछ भी बदला हुआ नजर नहीं आ रहा है। जिले में गंभीर अपराधों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है हत्या,अपहरण,आपसी विवादों में गंभीर अपराधों का होना जिले के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। कप्तानी सख्ती के चलते मादक प्रदार्थों की तस्करी और जानलेवा ड्रग्स की लत के जद झुलस रहे युवाओं के मामले में जरूर कमी आई है जिसकी जितनी तारीफ की जाए कम है, लेकिन जिले की पुलिस असल पुलिसिंग में कोई दिलचस्वी नहीं दिखा रही है। सिपाही से लेकर थाना प्रभारी तक सिर्फ कप्तान के निर्देशों ओर कागजी कार्यवाही को ही पुलिसिंग मानकर चल रहे हैं। थानाक्षेत्रों में चल रही अवैध गतिविधियों,शराब तस्करी,जमीनी विवाद सहित छोटे विवादों में प्राथमिक तौर पर हल्के में लेकर उनमें दिलचस्वी नहीं दिखाना बड़े अपराधों का मुख्य कारण बन रहा है। कप्तानी कार्यवाही का डर कहा जाए या आर्थिक लाभों का सिद्ध नहीं होना समझा जाए लेकिन वर्तमान में हालात यह हे की थाना स्तर पर कोई संदिग्ध गतिविधियों की सूचना भी हो तो पुलिस उसे नजरअंदाज करना ही अपना भला समझने में लगी है यही कारण हे की पुलिस ने अपने सूचनातंत्रों को भी निष्क्रिय कर दिया है। अब यह भी संभव नहीं है की हर गतिविधि की सूचना कप्तान तक या उनकी विशेष टीम तक पहुंच जाए और उनपर कार्यवाही हो सकें।