आलेख/ विचारमंदसौर जिलामल्हारगढ़
सिर्फ एक ही चाह -न नाम की, न जान की, न धन की, न यश की, न परिवार की, न मोक्ष की

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सिर्फ एक ही चाह -न नाम की, न जान की, न धन की, न यश की, न परिवार की, न मोक्ष की
–ओमप्रकाश बटवाल,
मल्हारगढ मोब.9425106594
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जिम्मेदार पदों पर जो बैठे हैं
सत्ता सुंदरी उनकी दासी है
यदि उन्हें-
न नाम की, न जान की
न धन की, न यश की
न परिवार की, न मोक्ष की
और न-
वैभव के विराटता की
तो ऐसे मानव ही
विकृतियों के वृत्तासुर
कमिशनों के कौरव
तस्करों के रावण
आंतक के कंशो को और
देशद्रोहियों के अवैध आशियाने को
जमीदोज कर
भारतमाता के गौरव को
पुनः स्थापित कर सकते है
यदि आप उन्हें
अवतारी, महामानव
युग पुरुष व इतिहास पुरुष से
न भी नवाजो तो
उन्हें कोई फर्क नही पड़ता
क्योंकि-
उनकी तो सिर्फ एक ही चाह
माँ तेरा आँगन सुंदर, श्रेष्ठ बने
हम दिन चार रहे या न रहे !
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