इसलिए बगावती तेवर में हैं उपेन्द्र कुशवाहा:उनकी पार्टी RLSP और चुनाव चिन्ह आज भी सुरक्षित; 2022 में कराया था रिटर्न फाइल

इसलिए बगावती तेवर में हैं उपेन्द्र कुशवाहा:उनकी पार्टी RLSP और चुनाव चिन्ह आज भी सुरक्षित; 2022 में कराया था रिटर्न फाइल
पटना:–
सुर्खियों में रहने वाले उपेंद्र कुशवाहा भले जदयू से एमएलसी हो या फिर जदयू के संसदीय बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष हो लेकिन, उनकी पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी आज भी सक्रिय है।
उपेंद्र कुशवाहा भले जदयू के कार्यालय में जाकर अपने चेंबर में बैठकर जदयू कार्यकर्ताओं की बात सुनते हो लेकिन कागज पर उनकी पार्टी अभी भी सक्रिय हैं और उनका चुनाव चिन्ह सीलिंग फैन अभी आवंटित है।
दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा ने 2021 के मार्च महीने में अपनी पार्टी आरएलएसपी के जदयू के साथ विलय की घोषणा कर दी थी। पार्टी के सभी नेता जदयू में आकर मिल गए थे, लेकिन आज भी उनकी पार्टी पूरी तरह से सक्रिय है और चुनाव चिन्ह आज भी आवंटित है।
2021 के मार्च महीने में आरएलएसपी के विलय की हुई थी घोषणा
2021 के मार्च महीने में आरएलएसपी के विलय की हुई थी घोषणा
2021 में बनाया था अध्यक्ष
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2021 के मार्च में आनन-फानन में उपेंद्र कुशवाहा को जदयू के संसदीय बोर्ड का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया। 1 महीने के बाद उन्हें विधान परिषद का सदस्य भी बना दिया गया।
माना गया कि पूरी तरह से उपेंद्र कुशवाहा जदयू के पदाधिकारी भी हो गए और जदयू कोटे से बिहार विधान परिषद के सदस्य भी हो गए, लेकिन इस बीच उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पार्टी आरएलएसपी को मरने ही नहीं दिया। आरएलएसपी को वे समय-समय पर ऑक्सीजन देते रहे।
क्षेत्रीय दलों की सूची में रालोसपा का नाम
आपको बता दें कि चुनाव आयोग की तरफ से नोटिफिकेशन जारी किया जाता है, जिसमें राष्ट्रीय दल और राज्यस्तरीय क्षेत्रीय दल की सूची होती है। उसमें 2021 के सितंबर महीने में क्षेत्रीय दलों की सूची में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी का नाम है और चुनाव आयोग की तरफ से दिए गए चुनाव चिन्ह सीलिंग फैन भी है।
हालांकि इस दौरान उपेंद्र कुशवाहा जदयू के लिए लगातार काम करते रहे, लेकिन 2022 के अगस्त महीने में आरएलएसपी का इनकम टैक्स भी भरा गया। जाहिर सी बात है भले पूरी पार्टी के लोगों को लेकर उपेंद्र कुशवाहा जदयू में चले आए लेकिन उनके आरएलएसपी वाली दुकान शटर बंद होने के बावजूद चलती रही।
आरएलएसपी के पूर्व नेता ने बताई पूरी बात
इस पूरे मामले में नाम नहीं छापने के अनुरोध पर आरएलएसपी के पूर्व नेता ने बताया कि जब विलय की घोषणा हुई थी तो चुनाव आयोग के तरफ से उपेंद्र कुशवाहा के पास चिट्ठी आई थी, जिसका जवाब उपेंद्र कुशवाहा ने नहीं दिया था।
इसके साथ ही उपेंद्र कुशवाहा ने इनकम टैक्स को आरएलएसपी की तरफ से लड़े गए लोकसभा 2014, बिहार विधानसभा 2015, फिर लोकसभा 2019 और बिहार विधानसभा 2020 में हुए चुनाव का रिटर्न भी फाइल किया। यानी इस दौरान पार्टी ने क्या चंदा लिया और क्या खर्चे किए इसका भी ब्योरा दिया।
जदयू के संसदीय बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं उपेन्द्र कुशवाहा। –
जदयू के संसदीय बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं उपेन्द्र कुशवाहा।
काफी मुखर हो गए हैं उपेन्द्र कुशवाहा
उपेन्द्र कुशवाहा इन दिनों जदयू को लेकर काफी मुखर हो गए हैं। मुख्यमंत्री से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह पर अलग-अलग आरोप लगा रहे हैं। जदयू को काफी कमजोर बता रहे हैं। साथ ही आरजेडी के साथ एक अलग डील होने की बात कह रहे हैं। उपेंद्र कुशवाहा के इस तेवर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ-साफ कह दिया कि उनको जहां जाना है जाएं। उनको रोका नहीं जाएगा।
इधर, आरएलएसपी से जदयू में आए नेता भी परेशान हो गए। अब तक उपेंद्र कुशवाहा के लिए सबसे विश्वासी नेता रहे जदयू के प्रदेश सचिव धीरज सिंह कुशवाहा ने उपेंद्र कुशवाहा से अपना पीछा छुड़ाते हुए उनके द्वारा चलाए जा रहे महात्मा फूले समता परिषद से इस्तीफा दे दिया। धीरज कुशवाहा ने दो संगठन का हवाला देकर यह इस्तीफा दिया है, लेकिन, साफ तौर पर धीरज कुशवाहा ने अपने आपको उपेन्द्र कुशवाहा से अलग कर लिया।