तत्व ज्ञानी संसार की मोह माया से दूर रहता है – संत श्री ज्ञानानंदजी महाराज

केशव सत्संग भवन में चल रहे है चार्तुमासिक प्रवचन
मन्दसौर। श्री केशव सत्संग भवन खानपुरा में चातुर्मास हेतु ज्ञानानंदजी महाराज हरिद्वार विराजित है। संतश्री द्वारा केशव सत्संग भवन में श्रीमद भागवत कथा के एकादश स्कंद का वाचन किया जा रहा है। आज चातुर्मास एवं कथा का समापन होगा।
गुरूवार को धर्म सभा में संतश्री ज्ञानानंदजी महाराज ने कहा कि यह संसार मायावी है सामने से जो दुनिया दिखाई देती है वह सत्य नही होती है अर्थात् यह सब एक स्वप्न के समान होता है। तत्व ज्ञानी व्यक्ति इस मोह माया और सांसरिक भौतिकवाद से दूर रहता है। इसलिए हमें अपने मन को प्रभु भक्ति में लगाकर तत्व ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास लगातार करते रहना चाहिए। आपने बताया कि हमें आत्मा और शरीर के अंतर को समझना होगा आत्मा को कोई लालच कोई मोह माया नहीं रहती सांसरिक वस्तुओं से भी आत्मा को कोई प्रेम नहीं होता है यह सब तो सिर्फ शरीर के लिए होते है। हम भी आत्मा से ज्यादा अपने शरीर का ध्यान रखते है। लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए हमें आत्मा को शुद्ध रखने का प्रयास करना चाहिए।
धर्मसभा में संतश्री ने उदाहरण देते हुए बताया कि जिस प्रकार एक जादूगर अपने जादू से कई सारे नोट बना देता है लेकिन वह सच्चाई नहीं होती उसी प्रकार इस संसार में जो सबकुछ दिख रहा है वह सच्चाई नहीं होती है।
संगत का विशेष ध्यान रखें
संतश्री ने बताया कि एकादश स्कंद का 29 सितम्बर को समापन हो जायेगा। इस स्कंद का सार यह है कि हमें अपने आप को प्रभु भक्ति में लगाना चाहिए और जीवन में संगत सोच समझकर करना चाहिए संगत से ही हमारा भविष्य तय होता है। धर्मसभा के अंत में शंकरलाल सोनी और मांगीलाल सोनी द्वारा विशेष प्रसादी का वितरण भक्तों को किया गया।
इस अवसर पर केशव सत्संग भवन के अध्यक्ष जगदीशचंद्र सेठिया, मदनलाल गेहलोत, प्रहलाद काबरा, प्रवीण देवडा, इंजि आर सी पाण्डेय, पं शंकरलाल त्रिवेदी, घनश्याम भावसार, शिवशंकर सोनी, राधेश्याम गर्ग सहित बडी संख्या में महिलाएं पुरूष उपस्थित थे।