शेडनेट हाउस में खीरा-ककड़ी उगाकर दशरथ पाटीदार ने कमाए 4.75 लाख

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एकीकृत बागवानी विकास मिशन से समृद्ध हुआ नीमच का किसान
नीमच, 07 जून 2026, योजनाओं का लाभ सही समय पर मिल जाए, तो मेहनत रंग लाती है। यह कहना है नीमच विकासखंड के ग्राम केलूखेड़ा के प्रगतिशील कृषक दशरथ-नरसिंहलाल पाटीदार का। परंपरागत गेहूं की खेती से सीमित आय अर्जित करने वाले दशरथ ने एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना (MIDH) के तहत संरक्षित खेती को अपनाकर अपनी तकदीर बदल दी है। आज वे जिले के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।
पहले थी चुनौतियां, अब मिली नई राह- दशरथ बताते हैं, कि पहले वे 2500 वर्ग मीटर खेत में केवल गेहूं की खेती करते थे। सिंचाई, खाद-बीज पर 45 हजार रुपये खर्च करने के बाद भी 55 क्विंटल उपज से 1,47,125 रुपये की कुल आय होती थी। सभी खर्च काटकर शुद्ध लाभ मात्र 1,02,125 रुपये बचता था। परिवार का भरण-पोषण कठिन था। तभी उन्हें उद्यानिकी विभाग से MIDH योजना की जानकारी मिली।
8.87 लाख के अनुदान से बना शेडनेट हाउस- जिला उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में दशरथ ने 8.87 लाख रुपये के अनुदान से अपने खेत में 2500 वर्ग मीटर का शेडनेट हाउस स्थापित किया। विभाग के तकनीकी अधिकारियों ने उन्हें संरक्षित खेती की वैज्ञानिक विधि, ड्रिप सिंचाई, उन्नत बीज व कीट प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया। इसके बाद उन्होंने खीरा-ककड़ी की व्यावसायिक खेती प्रारंभ की।
चार गुना बढ़ी आय, बदली जीवन की तस्वीर- परिणाम चौंकाने वाले रहे। शेडनेट हाउस में जलवायु नियंत्रित वातावरण मिलने से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बढ़े। एक सीजन में 450 क्विंटल खीरा-ककड़ी का उत्पादन हुआ। 2 लाख रुपये की लागत के बाद भी कुल आय 6,75,000 रुपये हुई। इस प्रकार शुद्ध लाभ 4,75,000 रुपये प्राप्त हुआ, जो गेहूं की खेती से होने वाली आय का लगभग पांच गुना है।
किसान की जुबानी- दशरथ कहते हैं कि शासन की MIDH योजना मेरे लिए वरदान साबित हुई। पहले बाजार में भाव कम मिलने व मौसम की मार से नुकसान होता था। अब शेडनेट में सालभर खेती कर सकते हैं। फसल भी अच्छी गुणवत्ता की होती है, जिससे भाव भी अच्छे मिलते हैं। अनुदान और तकनीकी मार्गदर्शन के लिए मैं कलेक्टर नीमच श्री हिमांशु चंद्रा व उद्यानिकी विभाग का आभारी हूं।”
अन्य किसानों के लिए प्रेरणा – वरिष्ठ उद्यानिकी विकास अधिकारी श्री विजेश वसुनिया ने बताया कि संरक्षित खेती कम पानी, कम भूमि में अधिक उत्पादन का सिद्धांत है। यह योजना छोटे व सीमांत किसानों की आय बढ़ाने में अत्यंत उपयोगी है। दशरथ पाटीदार की सफलता देखकर केलूखेड़ा व आसपास के गांवों के कई किसान अब संरक्षित खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। MIDH योजना वास्तव में “लागत कम-आमदनी ज्यादा” के मूलमंत्र को साकार कर रही है और जिले के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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