संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का समापन

संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का समापन
किशनगढ़ ताल
ठा शंभू सिंह तंवर
ग्राम दयालपुरा हनुमान मंदिर प्रांगण में चल रही संप्त दिवसीय संगीत में भागवत कथा का आयोजन का समापन सुदामा चरित्र के साथ संपन्न हुआ ।
भागवत आचार्य भगवती लाल शर्मा गवालद राजस्थान के द्वारा समापन अवसर पर बताया गया।
मानसिक आलस्य बहुत खतरनाक होता है। शरीर द्वारा किसी काम को करने की असमर्थता व्यक्त करना, यह शारीरिक आलस्य है। मगर किसी काम को करने से पहले ही यह सोच लेना कि यह काम मेरे वश का नहीं है अथवा किसी काम को करने से पहले ही हार मानकर बैठ जाना, पीछे हट जाना यह मानसिक आलस्य है।
इस मानसिक आलस्य के कारण बहुत लोग दुखी होते हैं, असफल होते हैं और इसी निराशा के कारण डिप्रेशन तक पहुँच जाते हैं। इस मानसिक आलस्य को दूर करने का उपाय है सदचिन्तन, सकारात्मक चिन्तन और अच्छे लोगों का संग।
एक विचार आदमी के संसार को बदल देता है। यदि वह विचार शुभ है तो वह ना केवल स्वयं की प्रगति का कारण बनता है अपितु दूसरे लोगों के जीवन को भी बदलने तक की सामर्थ्य रखने वाला होता है। अतः हमेशा अच्छा सोचो ताकि मानसिक आलस्य से बच सको।
इस अवसर पर भाजपा युवा नेता लक्ष्मण सिंह परिहार, कैलाश सिंह सिसोदिया ,गुमान सिंह सिसोदिया, विजय सिंह आदि उपस्थित थे



